जहर खाने Poison Consumed person Treatment & First Aid क्या करे? उपचार

 

  • जहर खाने के बाद समाधान (POISION CONSUMED SOLUTION)

जहर(poision) से केवल हमारा आशय  यहाँ सिर्फ विषैले रसायनिक तत्व ,यौगिक  पदार्थ ,कीटनाशक दवाईयां आदि से ही नहीं है बल्कि प्रत्येक ऐसा  पदार्थ जिसे खाने के बाद व्यक्ति के शरीर को क्षति पहुंचाती है अर्थात उपचार न हो तो प्राण जाती  है उसे जहर के श्रेणी में रखा जाता हैI जहर दूषित भोज्य खाद्य पदार्थ ,नशीली पेय पदार्थ, गंभीर रोगों (नींद,दर्द निवारक,कैंसर आदि)में दी जाने वाली उनका अत्यधिक सेवन (OVERDOSE)में  आदि भी जहर का रूप ले लेता हैI जहर कई प्रकार के हो सकता है कुछ जहरीला पदार्थ तुरंत ही शरीर को प्रभावित करता है तो कुछ 5-6 चांटे बाद या एक दिन बाद भी अपना प्रभाव दिखाता हैI कभी-कभी व्यक्ति के सामने ऐसी परिस्थितियां हो जाती है जाने -अनजाने में इस प्रकार के विषैले पदार्थों का सेवन कर लेता है जिससे उसके शरीर में पूरे जहर फैल जाते हैं और अगर उनके परिवार वाले को जनकारी ना हो या उचित उपचार के अभाव में उस व्यक्ति की  मौत हो जाता हैI इस प्रकार की विकट पिस्थितियाँ आने पर हमारे दिमाग की सक्रियता भी काम करना बंद कर देता है अर्थात उस समय हमें किसी प्रकार का विचार- सोच का समय नहीं मिलता हैI इसलिए यह जरूरी है कि हम उस प्रकार के पदार्थों का सेवन करने से परहेज करें अगर जाने-अनजाने में सेवन हो जाए तो इस आलेख में दी गयी लक्षणों के आधार पर आसनी से पहचन सकते हैं की जहर फ़ैल रहा है या मामूली सा रोगI करीब 30 फीसदी ऐसे लोग हैं जो बिना विस्तृत जानकारियां के आभाव में कोई ऐसे पदार्थों  का सेवन कर लेते हैं जो अंदर -अंदर ही शरीर में जहरीला पदार्थ का रूप ले लेता है और सही समय पर लक्षणों के जानकारी न होने पर इलाज के आभाव में उनकी मौत हो जाती हैI इसलिए यह बेहद आवश्यक है की जहर और उनसे सबंधित तथ्यों की पूरी जानकारी होना जिससे कभी कोई जहर खा लें तो ये  

  • जहर क्या है?(what is poision?)  

वैसे पदार्थ जो मनुष्य के सेवन (खाते) करते हीं उसके कोशिकाएं ,ऊतकों को नष्ट करने लगता है और तंत्रिका तंत्र के साथ-साथ श्लेष्मा झिल्ली और त्वचा पर प्रतिकूल प्रभाव छोड़कर  हमारे परिसंचरण तंत्र(circulatory system)को तुरंत निष्क्रिय बना देता हैI जिससे मनुष्य के शरीर के धीरे -धीरे सारी अंगों(organs)का काम करना बंद हो जाता हैI जिसके कारण व्यक्ति की मृत्यु हो जाती हैI उसे जहर या विष कहते हैंI   उसके शरीर के हर अंग है करना काम बंद कर देता है जिससे व्यक्ति के कुछ समय बाद ही मौत हो सकती हैIकिसी भी प्रकार का केवल बासी(stale) भोज्य पदार्थ हीं नहीं बल्कि ताज़ी हरी सब्जियां अन्य खाद्य पदार्थ भी जिन्हें केवल अनुचित तरीके से जैसे गंदे नाले के दूषित  पानी से, केवल रसायनिक खाद्य पदार्थों से तैयार किया जाता है वह भी दूषित होकर जहर बन जाता है जिनमें अनेक प्रकार कुछ जहरीला तत्वों लेड(pb) क्रोमियम(cr) ,मैग्नीज़(Mn) आदि का मिश्रण होता हैI जो हमारे दिमाग,किडनी ,लिवर को धीरे-धीरे निष्क्रिय बना देता हैI इसलिए हमें  सिर्फ केवल दवाई और रासयनिक पदार्थों पर ही नहीं बलकि ताज़ी भोजन करने के बाद भी उनकी तबियत बिगड़ती है तो हमें तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक के पास अस्पताल जाना होगा क्यूंकि उनके लक्षण भी अन्य जहर की उपभोग के भांति ही होता हैI 

  •  जहर कितने प्रकार के होते हैं?(Types of poision)-

वैसे तो जहर का वर्गीकरण करना मुश्किल है क्योंकि ऐसी कोई पदार्थ नहीं है जो मनुष्य के मरने के योजना से बनाया जाता हैI वह हर रसायन पदार्थ जिसके संपर्क में आते ही सीधा असर मनुष्य के स्वास्थ्य पर पड़े जहर के श्रेणी में आता है,जहर विविध प्रकार  के हो सकता है कार्बनिक ,अकार्बनिक ,ज्वलनशील पदार्थ,अम्लीय, द्रव्य ,अम्ल ,भस्म ,गैस किसी के रूप में हो सकता है जिसके छूने से सूंघने से या सेवन करने से इंसान की मौत हो सकता हैI उदाहरण के तौर पर कुछ ऐसे तत्व फॉस्फोरस ,क्लोरीन,कॉपर,पारा इत्यादि जो की अकार्बिन श्रेणी में आते हैं जो विषैले होते हैं वहीँ कुछ तत्त्व ऐसे हैं  जो अकार्बनिक तो हैं पर विषैले नहीं हैंI ठीक उसी तरह गैसों की बात करें तो जहाँ ऑक्सीजन और कार्बनडाईऑक्सइड के बिना जीवित नहीं रह सकता तो वहीँ कार्बन मोनो ऑक्साइड ,नाइट्रस ऑक्साइड,सल्फर नाइट्रेट के संपर्क में आने से व्यक्ति की मौत हो जाती हैI कुछ जहर ऐसे हैं जिनके सेवन से मात्र सूंघने से ही सीधे तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है और मांसपेशियों को लकवा मार देता है और कुछ मिनटों के अंदर व्यक्ति  हो जाती हैI ऐसे जहर पदार्थ के तीनों अपरूपों में हो सकते हैं चूँकि ये नर्वस सिस्टम को प्रभावित करता है तो इसे नर्व एजेंट कहा जाता हैI जहर केवल मुंह के जरिए ही नहीं नाक,फेफड़ा,त्वचा के जरिये भी पुरे शरीर में फ़ैलता हैI

  • जहर के खाने के बाद का लक्षण -(Symptoms)

अगर कोई इंसान जहर खा लेता है तो उसमें निम्न प्रकार के लक्षण देखने को मिलता है अर्थात शरीर में अनेक प्रकार के प्रतिकूल गतिविधियां होती हैं-

    • व्यक्ति के पेट में बहुत तेज दर्द और ऐंठन होती है और अपर्याप्त निरंतर उल्टियां होना शुरू हो जाता हैI
    • व्यक्ति को बार-बार दस्त होते हैं जिनमें उनके साथ साथ झाग भरे मवाद भी निकलते हैंI 
    •  उनकी सांसें फूलने लगती है और बोलने में भी काफी कठिनाई होती है जिसके कारण उसे सीने में दर्द महसूस होता हैI 
    •  उनके सामने उनकी आंखों के सामने धुंधला दिखाई देता है धीरे-धीरे आंखें बंद होने लगती हैं और आवाज भी काफी कम सुनाई देता हैI 
    • व्यक्ति  कुछ ही मिनट में अचेत होने लगता है अर्थात वह बेहोश होने लगता है वह अच्छे से खड़ा भी नहीं हो पाता है, अनियंत्रित होकर फर्श पर  गिर जाता हैI 
    • चक्कर आना ,सिर में अचानक से तेज दर्द शुरू होनाI 
    • मूत्र के जरिये खून निकलना,नाक से भी कभी-कभी खून निकल सकता है अगर व्यक्ति किसी जहरीली गैस के संपर्क में आ गया हो तोI 
    • पेट और गले में तीर्व जलन होनाI 
    • मांसपेशियों के अंदर ऐंठन शुरू हो जाता है शरीर के निचले अंगों का सुन्न और ठंडापन पड़  जाना इसके उपरांत व्यक्ति को लकवा मार देता हैI 
    •  हृदय गति असमान्य हो जाना ,बार-बार झटके आना
  • त्वचा का नीला और काला पड़  जाना
  •   कोई जहर खा लें तो करें ये घरेलु उपाय -(Emergency First Aid)

अगर कोई व्यक्ति जाने -अनजाने में जहर खा ले तो बिना विलंब किये अस्पताल ले जाने के कर्म में करें ये उपाय-

  •  अगर कोई व्यक्ति जहर खा  लिया हो तो तुरंत ही उल्टी करवाएं अगर पीड़ित खुद से उल्टी ना कर रहा हो तो गले के पीछे मार कर या मुंह के अंदर उंगलियां डालकर उल्टी करवाएंI 
  •  तुरंत अस्पताल पहुंचने की कोशिश करें अगर व्यक्ति बेहोश हो गया हो तो कृपया उसे अच्छे से बिस्तरर पर लेटा देंI 
  • रोगी को दूध पिलाने की कोशिश करें क्यूंकि विष के संपर्क में जाने से दूध फट जाता है और व्यक्ति की शरीर के अंदर से उल्टियों के माध्यम से विष बाहर निकल जाता हैI 
  • गाय का देसी घी और काली मिर्च  भी काफी लाभदायक होता हैI 
  • जहर खा लेने  के बाद पीड़ित व्यक्ति की किसी भी तरीके से पेट खाली करा देना आवश्यक है जिसके उपरांत व्यक्ति की चिकित्सीय उपचार में काफी सहायक हैI 
  • किसी भी तरीके का घरेलू उपचार कर रोगी को ठीक होने की उम्मीद ना करें जल्द से जल्द अस्पताल ले जाने की कोशिश करें बिना चिकित्सीय उपचार का व्यक्ति स्वस्थ नहीं हो सकता हैI 
  • जहर खा लेने पर चिकित्स्कीय उपचार -( Medical Treatment)

जैसे ही जहर खाये हुए रोगी अस्पताल पहुंचता है तो सर्वप्रथम डॉक्टर द्वारा कोशिश की जाती है यह सुनिश्चित करने की व्यक्ति किस तरीके का जहर का सेवन किया हैI उसके बाद व्यक्ति की नाक से एक यंत्र  RYLES TUBE के जरिये पूरी तरीके से पेट को साफ़ किया जाता है ताकि जहर परिसंचरण तंत्र(circulatory system) और पुरे शरीर के अंदर ना फैले इस प्रक्रिया को चिकित्सीय भाषा में Gastric lavage कहा जाता हैI  इसके बाद सूई(Needle) के माध्यम से Normal Saline या अन्य तरल पदार्थ पूरी तरिके से साफ़ किया जाता है ताकि जहर से प्रभावित क्षेत्र पुनः अच्छे तरीके से साफ़ हो जाएI इसके बाद पल्स ,श्वसन दर ,आँखों का आकार  ,हृदय-गति, ब्लडप्रेशर आदि की प्रमुख जांचे करने के बाद व्यक्ति के स्थिति के अनुसार दवाईयां दी जाती हैIअधिक गंभीर मामलों में जहर अधिक और खतरानक हो तो उसका एंटीडोट दिया जाता हैI इसके अलावा व्यक्ति की खून की जाँच और ECG(Electrocardiogram)टेस्ट भी किया जाता हैI 

  • नोट-  यह जानकारी चिकित्सकों और किताबों के अध्ययन के  संग्रह के आधार पर दी गई है जो पूर्ण रूप से आपके  उपचार की पुष्टि नहीं करती हमारा मकसद सिर्फ स्वास्थ्य के प्रति आपको सचेत कर आपके स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करना  है I परन्तु यह बात स्पष्ट हो जाता है अगर जहर खाये हुए पीड़ित व्यक्ति की समय पर सही उपचार मिल जाए तो व्यक्ति की जान बच सकती है और पुनः व्यक्ति पूर्ण रूप से स्वस्थ हो सकता हैI जब भी उपरोक्त लिखी गई लक्षणों या विकार दिखाई देता हो तो यथाशीघ्र अपने नजदीकी चिकित्सकों  से संपर्क करें

  

 

सांप काटने पर क्या करे? उपचार Snake Bite Treatment & First Aid

  •  सांप काटने पर क्या करे?(SNAKE BITE TREATMENT)

सांप ईश्वर का दिया हुआ एक अनमोल उपहार हैIयह मनुष्य के दोस्त है हमें सीमित ज्ञान होने के कारण हम इसे  हमेशा हिंसक समझकर उसे मार देना चाहते हैं या तो हम उसे किसी ऐसी जंगल में छोड़ना चाहते हैं जहां इंसान का वास ना हो यह इसलिए है क्योंकि सांपों के बारे में हमारी जानकारी विस्तृत नहीं हैI सांप हर तरीके से हमारी मदद करता  चाहे वह फसलों के बर्बादी से रोकने का कार्य हो ,हमारे फसलों को ना सिर्फ चूहों से यह रक्षा करता है बल्कि इसके केंचुएं अनेक प्रकर के वैसे जीव-जंतु जो फसलों को क्षति पहुंचाते हैं उससे रक्षा कर हमारे खेत को उर्वरक प्रदान कर उपजाऊ बनाता हैIइनका होना हमारे लिए और पर्यावरण   के लिए बेहद ही आवश्यक हैI सांप थल और जल दोनों में पाया जाने वाला सरीसृप प्राणी है I सांप विषैले और विषहीन दोनों तरह के होते हैंI साँपों के कान नहीं होते इसलिए उन्हें सुनाई नहीं देता जिससे आदमी की आवाजों को सुन सके और आहट पाते भाग जाए या उन्हें जानबूझकर काटे , वैसे तो सांप  का आंख होता है परंतु आंखों से केवल काले और सफेद रंग को ही स्पष्ट रूप से देख पाता हैI हालांकि सांप तभी मनुष्य को काटता है जब जाने -अनजाने में मनुष्यों द्वारा उसको स्पर्श (छेड़ा) किया जाता है जिसके कारण वह आत्मरक्षा के लिए काटता है इसके बावजूद विश्व मे सांप के काटने से करोड़ों लोग जान गवां बैठते हैंI भारत में ही करीब प्रत्येक साल लगभग 50,000 लोगों की मौत सर्पदंश(snake)के कारण हो जाता हैI  सांप स्वाभाव से भले ही आक्रमक दिखे परन्तु डरपोक होता हैI कुछ सांप बेहद ही जहरीले होते हैं वह हमेशा थूकते(spit) रहते हैं चुकी ऊके थूक में विष होने के कारण उनके थूक के प्रभाव में आने से भी किसी भी जीव की जान जा सकती हैIसांप के काटने से तुरंत मौत नहीं होता है बल्कि अन्धविश्वास,इलाज के आधुनिक और मूलभूत सुविधाएँ ना होने के कारण ,इलाज में देरी की वजह से पुरे शरीर में जहर फ़ैल जाती है जिसकी वजह से व्यक्ति को  जान गवांना पड़ता हैI अगर जहरीले साँपों के काटने के बाद तुरंत ही उचित उपचार हो सके तो मनुष्य की जीवन को बचाया जा सकता हैI सांप अधिकतर निशाचर होते हैं और अँधेरे में चाहे रात हो या सुबह भोजन के खोज में वो से निकलते हैंI इसीलिए हमें अपने घरों में रौशनी और उजाला हमेशा रखें जिससे सांप के घरों में घुसने का खतरा कम हो जाता हैI

  • सर्पदंश का लक्षण (Symptomps of snake bite) –

सांप के काटने पर हमारे ऊतक  निरंतर नष्ट होने लगते हैं और जी मचलता है और धीरे -धीरे पूर्ण शरीर में  विष फैलने लगता हैIकई सांप बहुत विषैले होते हैं जिसमें व्यक्ति के पास मात्र उपचार हेतु आधे घंटे ही  समय शेष रहता है ,तो कई सांप ऐसे होते हैं जिनके काटने पर अगर व्यक्ति को 5-6 घंटों के बाद भी उपचार होने पर भी जीवत  और पूर्णत: स्वस्थ रह सकता हैIकई इसे भी सांप है जो विषहीन होते हैंIसांप जब भी काटता है तो निम्न तरह के लक्षण सभी पीड़ित  में दिखाई देती हैI

  • सांप जिस स्थान पर काटता है वहां असहनीय जलन होती हैI
  • जल्दी-जल्दी दस्त होना,जी मचलना और मल-मूत्र त्याग होने लगता हैI
  • रोगी के शरीर पर नियंत्रण नहीं रहता आँखों के सामने अँधेरा छाने लगता हैIधुँधला दिखाई देना,पलकें(Eyelash) बार-बार झपकनाI
  • सर में तेज दर्द, चक्कर आना और भारीपन महसूस होनाI
  • सांस (Breath) में रुकावट साँस लेने में परेशानी  होनाI
  • शरीर का नीला और काला पड़नाI
  • शरीर  में जलन और खुजलाहट होनाI
  •  नब्ज का तेज होना ,मांसपेशियों में ऐंठन होनाI
  •  रक्तस्राव अंदरूनी रूप से और बाहरी रूप से भी हो सकता हैI
  • मुँह से अत्यधिक मात्रा में लार का गिरनाI
  • व्यक्ति के रक्तस्राव उच्च या अत्यधिक काम हो जाता हैI
  • इसमें हृदयघात अर्थात दिल के दौड़ा  (heart attack)भी पड़ सकता है जिससे व्यक्ति की आकस्मिक मौत हो सकता हैI
  • गंभीर सूजन एक हिस्से में रक्त परिसंचरण को काट सकती है और जब परिसंचरण कट जाता है तो वो हिस्सा सुन्ना(blank) पड़ जाता है और तेज दर्द होता हैI

कई बार सांप काटने पर  समझ में नहीं आता कि क्या किया जाए और क्या नहीं, जिससे एक छोटी गलती के कारण व्यक्ति की जान भी जा सकती है इसलिए यह बेहद जरूरी है की सर्पदंश होने पर निचे दिए गए परामर्शों का अनुपालन करेंI

  • किसी व्यक्ति को सांप काटने पर ज्यादा उसके सामने विचलित ना होकर ,बिना घबराहट के यथाशीघ्र  शांत दिमाग से रोगी को बिस्तर पर लेटा दें उसके बाद काटे हुए अंग के ठीक ऊपरी सतह को एक कपडे से बांध दे ताकि विष फैले नहीं और जल्द से जल्द अस्पताल ले जाएँI
  • पीड़ित व्यक्ति को हमेशा सीधा ही लेटाएं अगर शरीर ज्यादा हिलेगा तो विष फैलने की आशंका रहती हैI
  • अगर  अंधेरा हो तो सांप कई बार दिखाई नहीं देते परंतु अगर दिखाई दे तो उसे अच्छी तरह पहचाने की कोशिश करें क्योंकि यह इलाज -प्रक्रिया  में चिकित्सक के लिए सहायक हो जाता हैIसर्प के प्रजाति में अलग -अलग विष पाया जाता है जिसके कारण व्यक्ति में अलग -अलग लक्षण भी देखने  को मिलता हैIसांप के पहचान के आधार पर अलग- अलग उपचार और सूई ,दवाईयां दी जाती हैI 
  • मरीज के शरीर में से मोठे कपडे ,श्रृंगार,आभूषण  अदि को उतार देंI
  • सबसे महत्वपूर्ण यह होता है की मरीज बेहोश ना हो अगर बेहोशी की हालात में  चला जाए तो साँसों पर बारीकियों से ध्यान रखेंI 
  • रोगी के सामने ज्यादा घबराये नहीं जिससे ह्यपरटेंशन का खतरा भी बना रहता है और व्यक्ति को आकस्मिक दिल का दौड़ा पड़ सकता है और उनकी तत्काल मृत्यु हो सकती है इसलियरे रोगी के सामने संयम और सकरात्मक रूप में पेश आएंI
  • अधिकतर सांप हाथ और पैरों में काटता है, अगर दोनों ही स्थितियों में जैसे पैर  में काटे तो सीधा लेटाकर काटे हुए पैर को निचे लटकाकर रखें ,अगर हाथ में सांप काट दे तो हाथ को भी लटकाकर रखे जिससे  विष मस्तिष्क और दिल तक जल्दी नहीं पहुंच पता हैI
  • काटे जाने के बाद तुरंत उस अंग को हमेशा पानी से लगातार धोएंI
  •   किसी भी तरह का घरेलु उपचार खुद से ना करें झाड़ ,फूंक ये सब अंधविश्वास और झुठी मिथ्या है जिससे व्यक्ति की जान चली जाएगी जितना जल्दी हो सके अस्पताल ले जाने की कोशिश करेंI
  • जहाँ सांप ने काटा है वहां उस जख्म (डंक) को चूसे नहीं और ना ही दबाएं और ना ही उस जगह को ब्लेड से काटेंI
  • बिना डॉक्टर के जाँच -पड़ताल के किसी के सुझाव पर खुद दवा ना देंI
  • सर्पदंश में  की जाने वाली प्रमुख जांचे -(TEST)

 सांप के काटने पर चिकिसक द्वारा सांप प्रजाति के पहचान के  अनुसार उस घाव और शरीर के अन्य अंगों की जांच करते हैंI अलग -अलग सांप के अनुसार परीक्षण किया  जाता है जो साधारण होते हैंI उसके बाद व्यक्ति के उम्र और लक्षण के अनुसार अनेक प्रकार के उचित टीके दिए जाते हैंI अगर मामला औसत हो वीषहीन(poisionles) हो तो घाव को अच्छे से साफ़ कर टेटनस सूई देकर  इलास्टिक बैंडेज बांधकर डॉक्टर एक दिन में ही अस्पताल से कर देते हैंI 

अगर सांप बेहद जहरीला हो तो व्यक्ति का स्थिति बेहद गंभीर होने लगती है तब  डॉक्टर द्वारा anti-venom नामक दिया जाता है जो यथाशीघ्र शरीर में जाते हीं असर करता हैI

  • नोट -उपरोक्त लिखी गयी आलेख चिक्तिसक और सांप रेस्क्यू करने वाले विशेषज्ञों के साक्षात्कार के आधार पर दिया गया हैI जिसमें किसी भी तरह के घरेलू उपचार  और झाड़ -फूंक से बचें और सांप के तुरंत काटने के बाद रोगी को अस्पताल ले जाएँ सांप को पकड़कर कभी मारें नहीं बल्कि सांप के पहचान के बाद उसे घने जंगल, पानी में छोड़ देंI  

जलने के बाद क्या करें उपचार | First Aid treatment for Fire Burnt Case

 

  • जलने के बाद क्या करें (FIRE BURNT SOLUTION)

त्वचा हमारे शरीर का सबसे बड़ा अंग है, मनुष्य की सुंदरता के साथ-साथ हर तरीके से अलग-अलग रोगों से  रक्षा करता हैIइसके कारण ही हम सक्रीय जीवन जी पाते हैं क्यूंकि हमारी त्वचा न सिर्फ प्रचंड धूप,कंपकंपाती ठण्ड से हमे बचाती है  बल्कि हमारे अंदरूनी अंगों को भी प्रोटेक्ट करता हैI परन्तु कुछ घटनाएं ऐसे हैं जिनकी वजह से हमारी त्वचा पूर्ण रूप से खराब हो जाती है और इसका सबसे बड़ा कारण हैI   किसी तरह त्वचा  का जल(burn) जाना या झुलस जानाI हर घरों  में देखा जाता है की जाने – अनजाने में कभी भोजन बनाते समय या किसी कारणवश  अचानक से कुछ ऐसा हादसा होता है जिससे परिवार की कोई सदस्य आग की चपेट में आ जाता है जिससे उनका शरीर के किसी अंग जल जाता है और उस समय हमारा दिमाग जरा भी काम(सक्रीय) नहीं करता और चिकित्सक के पास जाने में अगर थोड़ी भी देर हो तो जख्म गहरा होता जाता हैI  अगर जख्म ठीक होने पर भी त्वचा पहले से सुन्दर नहीं दिख पाती जिसके कारण मनुष्य के सौंदर्य पर गहरा प्रभाव पड़ता है और वह हमेशा हताश और आत्महीन महसूस करता हैI इसलिए तुरंत हमें  ऐसे प्राथमिक उपचार करनी चाहिए जो त्वचा को नुकसान भी ना पहुंचाएं और जलन और दर्द से  भी रोगी को राहत मिलेI इसलिए यह बेहद जरूरी है अस्पताल जाने से पहले कुछ घरेलू उपाय एक वरदान की तरह साबित होती हैIसामान्य रूप से साधारण जलन अर्थात पटाखे, चाय, कॉफी या भोजन बनाते समय जलने पर तुरंत प्राथमिक उपचार करने से त्वचा और दर्द जलन के साथ-साथ कोई बड़ा  फफोला भी नहीं होने देताI

  • जलने का प्रकार (TYPES OF BURN)

जलना शरीर को काफी क्षति पहुंचाता है और त्वचा को बदसूरत बनाता हैIऐसा इसलिए क्यूंकि जलने के कारण  त्वचा में प्रभावित कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैI हम केवल सोचते हैं कि आग या कोई गर्म पदार्थ के कारण ही हम  जल(Burn)सकते है परंतु ऐसा नहीं है हमारी त्वचा गर्म और ठंड दोनों के कारण जलती है जैसे प्रकार से धूप तेज हो  या कोई भी गर्म पदार्थ , बिजली से , रासायनिक पदार्थ से जलने का वजह हो सकते हैं उसके अलावा बच्चे धूप में अधिक खेलने से ,पटाखे  से जलते हैं, इसके अलावा अक्सर भोजन बनाते समय गरम दूध या अन्य रसायन पदार्थ और कभी-कभी बर्तन के कारण भी हो सकता हैI इसके अलावा कुछ वैज्ञानिक पद्धति भी  हमारे शरीर को नुकसान पहुंचाता है जिस कारण आदमी जल सकता है जैसे कि X-RAY निकलने वाले विकिरण जो कैंसर के इलाज में उपयोग में आने वाली पराबैगनी किरण के संपर्क में  हमारी त्वचा जल सकती हैI इसके अलावा पेट्रोल अन्य रासायनिक तत्व के कारण,गर्म कुछरेशे वाले कपडे जिनमे अधिक गर्म होने पर घर्षण होने पर आग लग सकती है,रसोई के जैसे ओवन शेल्व आदि  बिजली उपकरणों वाले वस्तओं के कारण भी हमारा त्वचा जल सकता है त्वचा का जलना अनेक प्रकार का होता है जैसे त्वचा के मुख्य रूप से दो परतें होती हैंI डर्मिस और एपिडर्मिस और इनके उप- परतें भी  होती हैं कुल मिलाकर त्वचा के 7 परतें होतीं हैंI चिकित्सीय रूप से किसी तरह के आग से झुलसे जलन को तीन रूपों में वर्गीकरण किया गया है I जिनको फर्स्ट डिग्री, सेकंड डिग्री और थर्ड डिग्री बर्न मैं चिकित्सकों द्वारा विभाजित किया गया है

फर्स्ट डिग्री बर्न –फर्स्ट डिग्री वैसी परिस्थितियों को कहा जाता है त्वचा की सबसे ऊपर वाली परत प्रभावित होती है गांव में दर्द होता है और सूजन के साथ-साथ लाली दिखाई पड़ता है इसे सामान्य रूप का जलन होता है जिसमें इसके दाग भी अच्छे से उपचार करने पर थोड़ी ही दिन में स्वत: या उपचार के बाद मिट सकते हैंIइसके अगर लक्षण  की बात की जाए तो जाली हुई त्वचा काफी लाल हो जाता है जिसमे लालिमा के साथ -साथ सूजन और फफोले भी हो जाते हैंI  

सेकंड डिग्री बर्न-  इसमें बाहरी त्वचा के साथ-साथ अंदरूनी परत एपिडर्मिस जिसे त्वचा की भूमि कहा जाता है दोनों को प्रभावित करता है इसमें जख्म  गहरे होते हैं जिससे जले हुए अंग को हिलाने में भी तकलीफ होता हैI इसके जलन के साथ-साथ सूजन और दाग उपचार के बावजूद उम्र भर  रहता हैI इसका जख्म हमेशा गीला अर्थात जली हुई भाग में चिपचपा द्रव्य भर जाता है जिसको रीम कहा जाता हैI इसमें दर्द और जलन थोड़ी अधिक रहती है और सबसे बड़ी चिंता की बात यह होती है की उपचार होने के बाद रोगी पूर्ण रूप से स्वस्थ तो हो जाता है परन्तु त्वचा पर आजीवन गहरा जख्म का दाग रह जाता हैI 

थर्ड डिग्री बर्न –इसमें त्वचा के तीसरा परत  भी प्रभावित होता है अर्थात त्वचा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो जाती है जिसमें जले हुए स्थान को उत्तक  उत्पन्न होने के कारण स्वेट ग्लैंड पूरी तरीके से खत्म हो जाता है इसका असर रुखसार के बरसों बाद भी देखने को मिलता है अत्यधिक रोगी अनेक प्रकर के अन्य  गंभीर रोगों के शिकार भी जाते हैंI यह बहुत घातक होता है थर्ड डिग्री बर्न की परिस्थितयां तब पैदा होती है जब शरीर के आधे फीसदी से अधिक जल जाते हैं इसमें रोगी न तो पूर्ण रूप से ठीक हो पता है और अधिकांशतः रोगियों की जान चला जाता  हैI 

इसके  अलावा कुछ तापमान के कारण चाहे वह अधिक हो या कम कभी-कभी तो त्वचा जिनके अति संवेदनशील होते हैं संपर्क में आते हैं जल सकते हैंI इसमें त्वचा करा चटक लाल सफेद काले दिखते हैंI  उदाहरण के तौर पर अगर आपकी त्वचा के संपर्क में आने से जला है तो ठन्डे प्रदेशों जहाँ बर्फ़बारी होती होगी वहां लम्बे समय तक रहने के कारण हो सकते हैं और गर्म प्रदेशों और धुप के जरा भी संपर्क में आने से जलन महसूस होता हैI 

इसके अलावा  कभी-कभी ऐसा होता है कुछ रसायन पदार्थ से या लिथियम ,सोडियम ,मैग्नीशियम ,फास्फोरस जैसे ज्वलनशील तत्वों के संपर्क में आने से जल सकता है जिसका असर तुरंत देखने को ना मिले परंतु एक-दो दिनों बाद देखने को मिलती है जिसमें धब्बे  लाल, खोलें और खुजली होता है और इन्फेक्शन होने का भी डर लगता है इसका सीधा उपचार हमें चर्म रोग विशेषज्ञ डर्मेटोलॉजिस्ट पास ही करवाना चाहिएI   

  • सामान्य उपचार /घरेलु उपचार(HOME REMEDIES 

सामान्यतः जलने के बाद बेहद अहम होता है समान्य उपचार क्यूंकि अस्पताल पहुंचने में अगर थोड़ी देर  हो जाए तो हमारी त्वचा की कोशिकाएं (cells)अधिक नष्ट होने लगेगीं जिससे जख्म अधिक गहरा होता चला जाएगा  इसलिए यह बेहद आवश्यक है की तुरंत घरेलु उपचार करके रोगी को राहत पहुंचाया जाएI (यह उपचार सिर्फ फर्स्ट डिग्री  बर्न तक ही कारगर साबित होगी)

  • जब भी किसी कारणवश शरीर के किसी अंग  जल जाए तो बिना देर किए उस पर ठंडा पानी डालें या हाथ , पैर जली हो तो  इनको ठंडे पानी में जल्दी से भिंगो कर थोड़ी देर तक रखें और एक कपड़ा भिगोकर लपेट दें जिससे जलन भी कम होगी और दर्द जख्म बनने का इतना खतरा नहीं रहेगा परंतु यह सब सिर्फ और सिर्फ साधारण रूप से जलने के परीस्थिति में किया जाना चाहिएI 
  • अगर रोगी गरम पानी या भोजन बनाते समय छिटपुट अर्थात जलन गंभीर ना हो तो नारियल के तेल के साथ चूने का पानी मिलाकर एक पेस्ट बनाया जाता है जिसके फलस्वरूप जले हुए भाग पर लगाने से तुरंत जलन  और दर्द से राहत मिलता हैI 
  • जलन को दूर करने के लिए किसी भी तरीके का टूथपेस्ट बढ़िया उपचार है जले हुए अंग पर टूथपेस्ट लगाने ना सिर्फ जलन बल्कि दर्द भी कम हो जाता हैI 
  •  नीम के पत्ते  को पीसकर तथा नीम का तेल का जले हुए भाग पर लगाएं नीम तेल में मौजूद मौजूद एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण होते हैंI 
  • इसके अलावा तुलसी के पत्ते का रस जले हुए स्थान पर लगाने से भी संक्रमण के साथ -साथ दाग कम होने की संभावनाएं रहती हैंI 
  • अगर जल कर छोटा जख्म बना लें उस पर सिरका अच्छी तरह से उपयोगी होता है क्योंकि इसमें एंटीसेप्टिक गुण होते हैं जो घाव के निशान को कम करते हैं और जलन से भी राहत देते हैं इसका असर तुरंत ही रोगी में देखने को मिलेगाI  जो घाव के निशान को भी कम करते हैं और को भी देते हैं ठंडे पानी में 
  • कभी-कभी जलन  में आलू का रस काफी उपयोगी होता है क्योंकि इनमें विटामिन सी के साथ-साथ बी कॉन्प्लेक्स और आयरन जैसे तत्वों के गुण पाए जाते हैं जो त्वचा के निशानों को कम करने में अहम भूमिका निभाते हैंI 
  • लैवेंडर का तेल विशेष रुप से मक्खियों के विरुद्ध अधिक प्रभावशाली होते हैं परंतु इसमें एंटीसेप्टिक और दर्द निवारक गुण होने के कारण जलने में इसका उपयोग किया जा सकता है जो बाहरी संक्रमण को रोककर त्वचा की देखभाल करने में करने के लिए हमें साफ-सुथरे सूती कपड़े में तेल की डाल कर जले हुए स्थान पर लगाना चाहिएI 
  •  इसके अलावा एलोवेरा ,सरसों का तेल आदि  भी प्रयोग में लाया जाता हैI 
  • अगर त्वचा सामन्य रूप से भी जली हो तो डॉक्टर से  यथाशीघ्र संपर्क कर इलाज अवश्य करवाएं डअस्पताल क्यूंकि इस प्रकार के उपचार  अस्पताल पहुंचने तक ही प्रभावी हो सकते हैं अथवा पूर्ण रूप से स्वस्थ होने के लिए बिना चिकित्सक संभव नहीं हैI 
  •  जलने पर सावधानी बरतें  (Precaution tips for burn)-

कुछ देखो क्योंकि कारण या हम यूं कहें की नासमझ होने कारण हम कुछ कुछ लोग अपने घर में ऐसी गलतियां कर जाते हैं जिससे रोहित की स्थिति गंभीर हो जाती है अर्थात जला हुआ भाग अधिक भयंकर रूप ले लेता है और काफी नुकसान पहुंचाता हैI  

  • अगर त्वचा गंभीर रूप से जल जाए  तो अंग को कभी भी पानी में ना डुबाएं क्योंकि यह एक गलत मिथ्या ही  उससे और जख्म गहरी हो सकती हैIजिसके कारण त्वचा पर घातक प्रभाव पड़ता हैI   
  • किसी तरिके से कपड़े भी  जलकर शरीर से चिपक गया हो तो घाव को कुरेद कर ना निकाले बल्कि उसी अवस्था रोगी को तुरंत अस्पताल पहुंचाएंI 
  • गंभीर रूप से जले हुए घाव पर कोई मलहम क्रीम तेल या किसी प्रकार के घरेलू उपचार ना करें इससे इंफेक्शन होने का भी डर रहता हैI 
  • उपचार के बावजूद भी घाव के रंग में लाल गुराया काले रंग का बदलाव होने पर हमेशा नजर रखें किसी प्रकार से गांव के आसपास उस प्रकार के वर्षा के पद से जो अंदर हरे रंग के विवांता पर भी नजर रखेंI 
  • अगर  अगर जलन समान हो और दलाल भाग परंतु फफोले में बदल जाए तो उस फोड़े को बल्कि चिकित्सक के बताए हुए दवाइयां नियमित रूप से लेंI 

  नोट -इस लेख में उपरोक्त लिखी गई बातें अर्थात चिक्तिसकीय आलेख लोगों की  स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने बीमारी के बारे में अवगत कराने के लिए हैI  जो इलाज की पुष्टि नहीं करता हैI इसलिए स्वयं इलाज न करें उपरोक्त लिखी गए लक्षण होने पर  चिकित्सक से संपर्क करें और नियमित रूप से इलाज करवाएंI 

 

पायरिया PYRIA/PERIODONTITIS Tooth Problem के Symptom-लक्षण-cause-treatment-उपचार

 

  • पायरिया (PYRIA/PERIODONTITIS)

मनुष्य के जीवन  में दांत हमारे सौंदर्य का अहम् हिस्सा होता हैIया यूँ कहें की हमारे स्वास्थ्य की कुंजी है दांत,सेहत और सुंदरता का दर्पण हैI जब भी हम अपनी ओर  किसी को आकर्षित करना या सकारात्मक प्रभाव छोड़ना चाहते हैं तो हमारा मुस्कान इसमें सहायक होता है जिससे हमारे दांतो का निखार पता चलता हैI परन्तु दांतो में किसी तरह का समस्या हो तो उनकी मुस्कान को काम कर देती है उनके व्यक्तित्व पर नकरात्मक प्रभाव पड़ता है अक्सर अधिकांश लोग अपने चेहरे पर निखार के लिए फेयरनेस क्रीम पर अधिक पैसे खर्च करते हैं परंतु अपने दांत को किस तरह से सफाई किया जाए किस तरीके का भोजन (खाद्य पदार्थ – पेय पदार्थ) हमारे दांतों को नुकसान पहुंचाती है इस पर काफी काम लोग ध्यान देते हैंI  इसका आशय यह नहीं है की जो लोग बाजार के मसालेदार और चटपटी भोजन करते हैं या किसी तरह के पेय पदार्थ और ध्रूमपान करते हैं केवल उनके ही दांतों में समस्या हो सकती है,बल्कि दांत और मसूड़े इतने सवेंदशील होते हैं की किसी तरह की भोजन -पानी या ख़राब वातावरण हमारे दांतो को संक्रमित कर देता हैI दांत की समस्याएं विविध प्रकार की होती है ये रोगी को बुरे तरीके से प्रभावित भी करता है दांत के रोग से ग्रसित व्यक्ति हमेशा सोच में पड़ जाता है कि हमें क्या खाना है क्या पीना है क्योंकि उनकी दांत और मसूड़े  (oral health) में तुरंत ही परेशानियां आने लगती हैI दांतो का रोग इतना आम है कि बच्चे से लेकर युवा बुजुर्ग सभी लोग इससे ग्रसित हो जाते हैंIअक्सर लोग जागरूक तो हुए हैं अपने स्वास्थ्य को लेकर परंतु फिर भी अपने संपूर्ण स्वास्थ्य में दांतो को जोड़ना भूल जाते हैं जबकि कभी -कभी किसी रोग का शुरुआती लक्षण दाँते और मसूड़े देती हैंI बताते हैं कि दांतो की मालिक से करीब 70 सीसी लोग ग्रसित है अर्थात उनका दांत या मसूड़े कुछ न कुछ कमी पाई गई है जो शुरुआती अवस्था में ना पता चले तो अनेक प्रकार के दांत से संबंधित गंभीर बीमारियों में तब्दील हो जाता हैI  ओरल हेल्थ संबंधी कुछ बीमारी साँस के रोग और अन्य प्रकार के गंभीर बीमारियों को जन्म देती है जो जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित नहीं करता बल्कि जानलेवा भी हो सकता हैIइसलिए यह बेहद जरुरी है की दांतों से सबंधित रोगों की शुरुआती लक्षणों को तुरंत पहचान कर उसका उपचार किया जायI

  • पायरिया क्या है?(WHAT IS PYORRHOEA?)  

पायरिया दांतो और मसूड़ों  में होने वाला एक संक्रमण है जो जीवाणु के कारण होता हैIयह बिमारी मुख्य रूप से मसूड़ों को  प्रभावित करता है Iइस रोग में दांतों के चारो ओर सूजन हो जाता हैI इसमें मसूड़े के अंदरूनी परत और हड्डियां ,दांतो और  दांतो के खांचे से थोड़े दूर हो जाते हैं जिसके कारण वहां थोड़ा गड्ढा हो जाता है वहां BACTERIA (जीवाणु) मौजूद होने लगते हैंIयह एक समान्य संक्रमण रोग है परन्तु यदि सही समय पर इलाज नहीं किया जाय तो हमारे दांतों और मसूड़ों के हड्डियों को धीरे -धीरे कमजोर और नष्ट हो जाता  है जिसके कारण व्यक्तियों के मुंह से बदबू आने लगती I पायरिया में मसूड़े लाल हो जाता है और कभी-कभी मसूड़ों से रक्तस्राव होने लगता हैI स्वस्थ्य वयक्ति के मुंह में विभिन्न प्रकार के जीवाणु होते हैं उनमें से अधिकांश जीवाणु किसी प्रकार के हानी नहीं पहुंचाते हैं पर जब दांतो को पूरे तरीके से अच्छे से साफ नहीं किया जाता है तो मुंह में बैक्टीरिया बढ़ने लगते हैं जो दांतो को और मसूड़ों को पायरिया रोग से प्रभावित्त करते हैंI एक प्रकर से यह एक ऐसी बीमारी ही जिसमे  समय पर अपने दांतो की साफ सफाई कर काफी हद तक फैलने (बढ़ने )से रोका जा सकता है वरना हड्डियां क्षतिग्रस्त हो जाती है दांत टूट कर गीरने लगते हैं और दर्द के साथ- साथ अनेक प्रकार के दिल से संबंधित अंदरूनी बीमारी को भी पायरिया जन्म देता हैI

  • पायरिया के प्रमुख कारण क्या है?(CAUSES)

हमारे मुँह में विभिन्न प्रकार के जीवाणु मौजूद रहते हैंIवे  जीवाणु हमारे दांतो और मसूड़ों को अनेक प्रकार के गंदगी और बीमारियों से बचाते हैं परंतु अगर मुंह के अंदरूनी भाग दांत और जीभ की सफाई नियमित रूप से सही तरीके ना हो तो  जीवाणुओं की संख्या बढ़ने लगते हैं और दांत और मसूड़ों को नुकसान पहुँचाते हैंI मुंह में जीवाणु (BACTERIA) वृद्धि होने पर एक चिपचिपा पदार्थ बनाते हैं जिसे प्लेग कहा जाता है यह दांत और मसूड़ों को हानि पहुंचाती है जिसे पायरिया रोग के नाम से जाना जाता हैI  जब भोजन में उपस्थित स्टार्च और शर्करा मुंह में पाए जाने वाले जीवाणु के संपर्क में आते हैं तो प्लेग दातों पर बनता है दांतो पर प्लेग के जमा होने से हानिकारक एनारोबिक नामक बैक्टीरिया जहरीले पदार्थों को छोड़ता है जिसकी वजह से दांतों और मसूड़ों के हड्डियों ,दांतो को क्षति पहुंचता हैI 

  • दांतों और मसूड़ों को लेकर हम इतना सक्रिय नहीं रहते अन्य रोगों की  तुलना में जिसके कारण हम सही तरीके से अपने दांतों और मसूड़ों का साफ़ -सफाई , क्या उचित-अनुचित है इस पर अधिक ध्यान नहीं देते जिसकी वजह से पायरिया जैसे रोग उतप्पन होते हैंI  
  •   हमेशा सही तरीके का जो हमारे दांतो और मसूड़ों के लिए अनुकूल हो उस प्रकार का भोजन -पानी नहीं करने का कारणI 
  • भोजन के पश्चात ब्रश नहीं करने से हम जितनी बार कुछ खाते -पीते हैं तो कुछ भोजन का भाग हमारे दांतों और मसूड़ों के बिच रह जाते हैं जो  हानिकारक जीवाणु का निर्माण करते हैं जो पायरिया के लिए जिम्मेदार हैI
  • शराब का सेवन और गुटका ,तम्बाकू अदि ध्रूमपान करने सेI 
  • किसी प्रकार के अधिक गर्म या ठंडा पेय पदार्थ पिने या भोजन करने से भी पायरिया हो सकता हैI
  • बार -बार टुथपेस्ट बदलने से, हमे हमेशा हर्बलयुक्त टूथपेस्ट से ब्रश ही करनी चाहिएI 
  • किसी भी तरह दांतो के साथ-साथ छेड़ने ,कुदेरने सेI 
  • हमारे हार्मोन में परिवर्तन भी पायरिया के लिए जिम्मेदार हैI 
  • यह आनुवंशिकी के कारण भी हो सकता है परन्तु इसकी वजह बहुत कम रोगियों में देखने को मिलता हैI 
  • अगर हम पहले से ही किसी पेट से सबंधित बीमारी से ग्रसित हों तो भी पायरिया हो सकता हैI 
  •  पायरिया के प्रकार (TYPES  OF PYORRHEA)-

पायरिया के  अलग- अलग लक्षणों के आधार पर इसे तीन भागो  में विभाजित किया गया हैI (1) क्रोनिक पायरिया (Chronic pyorrhea) (2)एग्रेसिव पायरिया(Aggresseive pyorrhea) (3)निकटैचिंग पायरिया (Nicktaching pyorrhea)

  •  पायरिया के प्रमुख लक्षण-(SYMPTOMS OF PYRIA)

 पायरिया के लक्षण शुरुआत में दिखाई नहीं देती है परन्तु धीरे -धीरे अगर समय पर उपचार न होने के कारण व्यापक रूप ले लेता हैI दिखाई नहीं देती हैI 

  • ब्रश करते समय मसूड़ों से खून आनाI 
  • मसूड़ों में सूजन आना 
  • साँसों से बदबू आने लगता हैI 
  • मुंह का स्वाद परिवर्तित होनाI 
  • भोजन के उपरान्त चबाने से खून और दर्द महसूस होनाI 
  • एक -दूसरे दांतो के बिच अंतराल हो जानाI 
  • पायरिया में दांत कमजोर होकर खुद झड़ने लगते हैंI 
  • दांतो की जड़े दिखाई देनाI  
  • विभिन्न रंगों का आवरण दांतों पर दिखाई देनाI 
  • मसूड़ों में सनसनाहट और जलनI 
  • पायरिया के उपचार की प्रक्रिया(procedure of treatment)

पायरिया का उपचार दो तरीके से किया जाता हैI

 (1)नॉन सर्जिकल उपचार(NON-SURGICAL) (2)स्केलिंग उपचार(SCALING TREATMENT) वैसे तो पायरिया के लक्षणों को देखकर शुरुआती में ही दन्त चिकित्सक समान्य उपचार कर सकते हैंI परन्तु रोगी में पायरिया जटिल हो जाता है जैसे दांतों में टार्टर और प्लेग दोनों पाए जाते हैं तो इसे मशीने द्वारा सफाई कर हटा दिया जाता हैI पायरिया में दांतों और हड्डियों का आकलन करने के लिए एक्स-रे द्वारा जांच किया जाता हैI दांतो और मसूड़ों के बिच के दूरी का मापन करते हैं एक स्वस्थ मनुष्य में 1 से 2mm होता है अगर इससे अधिक दूरी बढ़ जाये तो इलाज किया जाता हैI

नॉन सर्जिकल उपचार में समान्य  रूप से सूई, दवाई आदि के साथ लेजर  उपकरणों के द्वारा टार्टर और दांतों मसूड़ों में उपस्थित गंदगी को साफ़ किया जाता हैI

जबकि सर्जिकल (स्केलिंग) उपचार में  डॉक्टर द्वारा कई प्रकार के सर्जरी लक्षणों को भांपकर किया जाता हैI जिनमें फ्लेप सर्जरी ,बोन ग्राफ्टिंग सर्जरी,टिश्यू ग्राफ्ट सर्जरी आदि कराया जाता हैI

  • पायरिया के घरेलु उपचार(Home remedies)

पायरिया का मुख्य घरेलु इलाज है हमेशा अच्छे तरीके से दांतो का सफाई करना और  नियमित रूप से समय पर स्वयं जांच करनाI

  • हमेशा भोजन के शुद्धता पर ध्यान दें अधिक मांसाहार तथा मसालेदार भोजन ना करें I
  • अधिक गर्म और अधिक ठंडी भोजन न करेंI
  •  शराब और ध्रूमपान ना करेंI
  • दांतों को प्रतिदिन भोजन  करने के बाद अच्छे तरीके से ब्रश करेंI
  • ब्रश के साथ-साथ नियमित रूप से नीम का दातुन भी  सर्वोत्तम हैI

 

   

   

  

 सफ़ेद दाग vitiligo,leucoderma,white spot के Symptom-लक्षण-cause-treatment-उपचार

 

  • सफ़ेद दाग  (vitiligo,leucoderma)जीवन शैली में आये बदलाव ,खान-पान के विविधता के अलावा प्राकृतिक संसाधनों में कमी अनेक प्रकार के रोगों की जन्म दे रहा हैI कुछ रोग वातावरण के प्रदूषित होने पर भी होता है उन्ही रोगों के श्रेणी में शामिल है – विटिलिगो(VITILIGO) त्वचा रोग का एक प्रकार है,इसे ल्युकोडेर्मा (leucoderma)भी कहा जाता है और इसे आम बोल-चाल के भाषा में सफ़ेद दाग भी कहा जाता हैI  दुनियाभर में करीब 2% लोग इस बिमारी से ग्रसित हैं भारत में करीब 5 करोड़ लोग इस बिमारी से ग्रसित हैं I इसको लेकर समाज में अनेक भ्रांतियां फैली हुई है सफ़ेद दाग के रोगियों को हीनता के नजरिये से देखा जाता हैI विशेष कर ग्रामीण क्षेत्रों में इस रोग को दैविक (divine) श्राप या सामजिक अभिशाप भी माना जाता हैI जिसके कारण विटिलिगो से पीड़ित रोगियों में आत्म-हीनता और भय उतपन्न हो जाता हैI उन्हें हमेशा सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ता हैI जिसके कारण वह हमेशा दबाव में रहते हैं और जीवन के प्रति  उनकी नजरिया बदल जाता हैं, इसलिए इस त्वचा विकार (सफ़ेद दाग) के बारे में जानना ,समझाना बेहद आवशयक है ताकि लोग इसे लाइलाज बिमारी न समझें और ना हीं किसी प्रकर के मन में भ्रांतियां होंIइसलिए प्रत्येक वर्ष 25 जून को विश्व विटिलिगो दिवस मनाया जाता है ताकि इस रोग के प्रति लोग अधिक जागरूक होंI
  • सफेद दाग क्या है?(what is vitiligo?)  

 इस रोग {सफ़ेद दाग (vitiligo)}  में त्वचा का रंग  बदल जाता है शरीर के किसी भी अंग में शुरुआत में त्वचा के रंग में धीरे-धीरे बदलाव होता है और कुछ समय बाद यह लगभग शरीर के विभिन्न भागों में फैलने  लगता हैI समाज में इसको लेकर कई तरह का मिथक है कुछ लोग सोचते हैं की यह एक-दूसरे के संपर्क में आने से फैलता है जबकि सच्चाई यह है की यह किसी तरह की संक्रामक बिमारी नहीं हैI हमारे त्वचा के अंदर एक परत होता है जिसे एपिडर्मिस (Epidermis)कहा जाता हैI एपिडर्मिस परत के अंदर मेलेनोसाइटस  नामक कोशिकाएं होते हैं जो पिगमेंट्स(pigment) का निर्माण करते हैं जिसे मेलेनिन(melanin)कहा जाता हैI जो हमारे त्वचा को  रंग प्रदान करते हैंI हमारे त्वचा का रंग के बदलाव मेलेनिन (Melanin)पिग्मेंट का शरीर में उपस्थित उसके मात्रा(Quantity) पर निर्भर करता है, अगर शरीर में मेलानिन पिगमेंट का मात्रा अधिक रहता है तो त्वचा सांवला और गहरा  होता है और उसकी उपस्थिति कम होता है तो तो उतना ही निखार और सफ़ेद ,गोरा त्वचा का रंग होता हैI इसके अलावा मेलेनिन पिंगमेंट (Melanin-pigment) हमारे त्वचा को पराबैंगनी किरणों (Ultraviolet rays) से बचाता हैI पराबैंगनी किरणें हमारे त्वचा के लिए काफी घातक सिद्ध होता हैI किसी भी आंतरिक या चिकित्स्कीय(Medical)कारण  मेलेनिन पिगमेंट की मात्रा कम हो जाती है तो शरीर के त्वचा में सफ़ेद दाग बनने लगते हैं जिसे विटिलिगो या श्वेत कुष्ठ ,लुकोडेर्मा (Leucoderma)कहा जाता हैI इसमें रंग प्रदान करने वाले कोशिकाएं अपना कार्य करना बंद कर देती है अर्थात निष्क्रिय हो जाती हैI इसकी शुरुआत टांग,नाक ,होठ,आँख या चेहरे से होती है पहले छोटे -छोटे चकते  पड़ने लगती है उसके बाद पूरे शरीर में फैल जाता हैIइससे प्रभावित रोगियों में त्वचा के अलग -अलग जगहों पर विकार देखने को मिलता हैI 

  • सफ़ेद दाग (vitiligo) का मुख्य कारण क्या है?

हालांकि  अभी तक सफेद दाग होने के ठोस कारणों  पता नहीं चल पाया है परंतु चिकित्सक इसे कुछ स्थितियों को जिम्मेदार मानते हैंI

  • रोग प्रतिरोधक क्षमता(Auto immune system) का कमजोर होनाI 
    • आनुवांशिकी भी होता है अगर घर में किसी भी परिवार के सदस्य इस रोग से पीड़ित हों तो उनके वंशज में  सफ़ेद दाग के लक्षण दिखाई दे सकते हैंI 
  • कभी कभी कुछ ऐसे रसायन(प्रेट्रोल ,अन्य गैसें अदि जैसे) जो हमारे शरीर के प्रतिकूल होते हैं तो उसके संपर्क में आने से भी यह रोग उतपन्न हो सकता हैI 
  • अगर किसी भी यकृत या पेट से सबंधित बीमारी से अगर लम्बे समय से पीड़ित हों तो उसके कारण भी सफ़ेद दाग हो सकता हैI
  • सफ़ेद दाग के प्रमुख लक्षण (symptomps of vitiligo) 

सफ़ेद दाग हमारे जन्म के बाद होने वाला एक त्वचा का विकार हैI  यह कभी जन्मजात नहीं हो सकता हैI यह ना तो जानलेवा है और ना ही किसी प्रकार के फैलने वाली बिमारी हैI यह पुरुष और महिलाओं दोनों में हो सकता है और किसी भी उम्र मेंI 

  • सफ़ेद दाग का धीरे-धीरे बढ़ना ,फैलनाI 
  • बालों का झड़ना और समय से पहले सफ़ेद होनाI 
  • धूप  पर आने में जलन होनाI 
  • त्वचा पर शुरुआत में  छोटा चकता या सफ़ेद दाग होनाI 
  • दाग पर स्थित बालों का भी सफ़ेद हो जानाI
  • अगर थायरॉइड ,डायबिटीज एलोपेसिया जैसे रोगों से पीड़ित हैं तो भी सफ़ेद रोग होने की आशंका होता हैI 
  • तनाव और चिंता के कारण भी हो सकता हैI 
  • यह वायरल इन्फेक्शन के कारण भी हो सकता हैI  
  • सफ़ेद दाग के रोगियों को आँखों के आंतरिक पार्ट के रंग बदलने लगता है अर्थात कुछ परिवर्तन देखने को मिलती हैI 
  • सफ़ेद दाग(vitiligo) कितने प्रकार के होते हैं?

सफ़ेद दाग को उनके लक्षणों के आधार पर मुख्य रूप से दो भागों में बांटा गया हैI

(1)Segmental vitiligo   (2) Non-segmental vitiligo or generalize vitiligo 

(1)Segmental vitiligo(खंडयुक्त)-इस तरह के विटिलिगो काफी कम लोगों में  दिखाई देते हैं यह हमारे चेहरे या किसी भी हिस्से को पूरी तरीके से प्रभावित नहीं करता है छोटे-छोटे भागों में फैलता हैIsegementl vitiligo स्थाई रहता है  उतना फैलता नहीं और इसके उपचार के काफी कम समय में ही असर देखने को मिलता हैIबच्चों में सबसे अधिक segmental vitiligo का ही असर देखा जाता हैI

 (2)  Non-segmental vitiligo or generalize vitiligo(गैर -खंडयुक्त सफ़ेद दाग)- इस तरह के विटिलिगो अधिकांशत:लोगों में होता हैIयह शरीर की किसी भी अंग में फ़ैल सकता हैIइसके दाग सभी जगह समान  दिखाई देते हैंI  

  • सफ़ेद रोग के इलाज की प्रक्रिया (Treatment)-

 सफ़ेद दाग को  पूर्ण रूप से इलाज के द्वारा ख़त्म किया जा सकता  हैIआमतौर पर विटिलिगो के लिए किसी प्रकार के मुख्य जांच की आवश्यकता नहीं होती  परंतु डॉक्टर जरुरत पड़ने पर अपने -अपने हिसाब से कुछ साधारण जाँच कराये जाते हैंI  ब्लड टेस्ट, त्वचा की बायोप्सी ,डर्मेटोस्कोप(dermetoscope) जैसे आधुनिक उपकरणों द्वारा भी जाँच की जाती है,ताकि  विटिलिगो की पुष्टि हो सकेIकभी -कभी पहले किसी रोग से ग्रसित व्यक्ति की दवाईयां और उपचार के बारे में विस्तृत संज्ञान चिक्तिसक द्वारा लिया जाता हैI जरूरत पड़ने पर आँखों की भी जाँच कराई जाती हैI

  इसके दो तरह से उपचार किये जाते हैं (1) सर्जिकल उपचार(Surgical treatment) (2)नॉनसर्जिकल उपचार(Non -Surgical treatment) 

नॉन सर्जिकल उपचार में लक्षणों के आधार पर दवाइयां ,क्रीम और अल्ट्रावॉयलेट लाइट का उपयोग किया जाता हैI      सर्जिकल ट्रीटमेंट बहुत सटीक और साधारण होता है इसमें डॉक्टर सर्जरी द्वारा मृत मेलनॉइट्स पिगमेंट्स कोशिकाओं को हटा दिया जाता है और त्वचा के सफ़ेद जगहों को स्थानांतरण (Transplant) कर दिया जाता हैI 

  • सफ़ेद दाग (Leucoderma)के घरेलु उपचार –

 सफेद दाग के इलाज को जितना डॉक्टर द्वारा देखभाल किया जाता है उतना ही अपने घरों में भी रोगी के  परिजनों द्वारा और रोगगी को खुद परहेज सावधानियां बरतनी होती है ताकि इसको कम समय में पूर्ण रूप से ख़त्म किया जा सकेI

    • त्वचा में जहां भी सफेद दाग है  खुजली होने पर नाखून से उसे ना कुरेदेI
    • सोने से दो-तीन घंटे पहले ही भोजन करनी चाहिएI
    •  धूप ,धुल एवं धुंए से हमेशा बचेI
    •  वैसे कपड़े जो काफी गर्म और कसक  होते हैं उसे ना पहनेI
  • बिना  डॉक्टरी परामर्श के किसी भी प्रकार के  साबुन ,इत्र , फेयरनेस क्रीम का इस्तेमाल ना करेंI 
  • अधिक मेहनत वाले व्यायाम और काम  ना करेंI
  • आग और अधिक गर्म स्थान पर सैर करने से बचेंI
  • अपने खान -पान में अधिक सावधानी बरतें खट्टा ,तीता और अधिक गर्म वाले भोजन ना करें विशेषकर मांसाहरी भोजन काफी कम मात्रा में लेंI
  • किसी भी प्रकर के आत्महीनता या मानसिक तनाव या निराश न होI
  • अपने डॉक्टर के निरंतर संपर्क में रहें और उनके परामर्श को ईमानदारीपूर्वक पालन करेंI
  • नोट – सफेद दाग पर आधारित आलेख पूर्ण रूप से  त्वचा विशेषज्ञ डॉक्टर से साक्षात्कार और चिकित्सीय अध्ययन के आधार पर लिखा गया है जिससे यह स्पष्ट होता है कि सफेद दाग किसी भी प्रकार के समाजिक अभिशाप नहीं है और ना ही या कोई गंभीर बीमारी है और ना ही किसी के संपर्क में आने से फैलता हैI इसमें ना तो रोगी को दर्द होता है और ना ही किसी प्रकार के बहुत अधिक परेशानी केवल त्वचा का रंग  सौंदर्यीकरण से बदसूरत हो जाता हैIइसके शुरुआती लक्षण को पहचान कर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें और अपना इलाज करवाएं,किसी भी प्रकार के घरेलु या स्वयं इलाज ना करेंI हमारा मकसद केवल आपको रोगों के बारे में जानकारी पहुंचाकर जागरूक करना है हम किसी भी प्रकार के चिकित्सीय उपचार का पुष्टि नहीं करते हैंI

 

 

गंजापन ALOPECIA/BALDNESS Hair fall problem के cause-treatment-उपचार

 

  • गंजापन(ALOPECIA/BALDNESS)

सेहत हमारी जीवन का खुशियों का चाभी है, अगर हम स्वस्थ रहते हैं तो हमारे जीवन खुशहाल और नन्द से भरपूर रहता हैI परंतु जब हम अस्वस्थ होते हैं तो शारीरिक विकार के साथ  मानसिक रूप से भी काफी दबाव में होते हैंI हम अपने दैनिक गतिविधियों में इस कदर उलझे हुए हैं कि हमें अपने शरीर के प्रति अनुकूल /प्रतिकूल  वातावरण परिस्थितयां,भोजन आदि पर जरा भी ध्यान नहीं देतेI हम आरामदायक और ऐश्वर्य जीवन चाहते हैं परन्तु आराम के कुछ क्रियाकलाप के वजह से शरीर के सक्रियता रुक जाता है ठीक उसी प्रकार हम स्वादिष्ट और समय बचत के लिए बाहर के व्यंजनों पर ज्यादा जोर देते हैं कई तरह के व्यंजनों का लुफ्त केवल जीभ ईमानदारीपूर्वक उठा पाता है अन्य अंग तो बजारु भोजन के कारण विकारों से घिरने लगते हैं जिसका असर थोड़े ही दिनों में अनेक प्रकर के रोगों के रूप में देखने को मिलते हैं अक्सर बाजार के बिकने वाली अधिक व्यंजन सस्ते और गंदे खाद्य पदार्थों से मिश्रित होते हैं जो कि दूषित भोजन की श्रेणी में आ जाता हैI जाहिर सी बात है दूषित भोजन करने से सबसे अधिक रोग और अनेक प्रकार के शारीरिक समस्याएं उतपन्न होते हैंI गंजापन  उन्हीं में से एक बीमारी है जो मुख्य रूप से हमारे गलत खान -पान के कारण होता है भारत में एक सर्वे के मुताबिक़ काफी कम उम्र में ही बालों का झड़ना शुरू हो गया है और तेजी से लोग गंजेपन का शिकार हो रहे हैंIऐसा नहीं की केवल खान -पान ही इसका मुख्य कारक हैं इसके साथ-साथ इसके और भी अनेक कारक हैंI गंजापन के रोगियों में देखा गया है की उनमें आत्मग्लानी स्वत: उतपन्न हो जाती है ,उनमें हीनता के भाव के साथ-साथ आत्मविशास की कमी आ जाती है जिसके कारण उनके अपने कार्यों में उतनी रुचि नहीं लग पाती और वह धीरे-धीरे डिप्रेशन में आ जाते हैंIउनका बौद्धिक और शारीरिक विकास भी रुक जाता हैI इसलिए गंजापन को कह सकते हैं की यह न सिर्फ लोगों के चुनौतीपूर्ण है बल्कि एक गंभीर बिमारियों की तरह चिक्तिसकीय परामर्श के अलावा इसमें छोटी -छोटी सावधानियां काफी अहमियत रखती हैI इससे हमें अभी मालूम चलता है की पुरुष या महिला दोनों के बालों का उनके व्यक्तित्व को निखारने में बड़ा योगदान रहता है अगर सिर पर भरपूर बाल हो तो व्यक्ति हर कठिन परिस्थितियो में भी आत्मविश्वास से लबरेज होकर उस काम के प्रति ज्यादा रहता है पुरुषों के लिए तो श्रृंगार की तरह है या यूं कहें की इंसानो  के चेहरे का सौंदर्य में उनके बालों (Hairs)का अहम योगदान हैI बाल हमारे त्वचा का अंग है जो हमें सर्दी गर्मी तथा अन्य प्रकार के दुर्घटना से न सिर्फ रक्षा करता है बल्कि सुंदर और आकर्षक दिखाने में भी इनकी अहम भूमिका होती हैइसलिए हमें शुरुआत से ही अपने शरीर के प्रति सचेत रहनी चाहिए और हमेशा कोशिश करना चाहिए कि हमें स्वस्थ खानपान को बढ़ावा देना चाहिए हमेशा शारीरिक सक्रियता को बढ़ावा देना चाहिए ताकि गंजापन और इसके जैसे अन्य रोगों से बचे रहेंI

  • गंजापन क्या है?(What is baldness/hair loss)

हमारे बाल(hair) मूल रूप से कैरोटीन नामक प्रोटीन के बने होते हैंI सामन्यत: हमारे बचपन से लेकर किशोरावस्था तक हमारे सिर पर घने बाल हमेशा रहता है और जब हम बुजुर्गावस्था में  जाते हैं तो धीरे- धीरे बालों का पतन शुरू हो जाता हैI परन्तु किसी कारणवश समय से पहले जब हमारे बाल झड़ने लगते हैं तो गंजेपन की समस्या शुरू हो जाता हैI गंजापन अलग-अलग प्रकार के होते हैं ,कुछ पुरुषों में इसके लक्षण धीरे -धीरे दिखाई देने लगती है अर्थात उनके बाल काफी कम मात्रा में निरंतर टूटते और  झड़ते हैं तो कहीं किसी में एक खास ढंग से खोपड़ी के किसी एक स्थान से झड़कर कर सिर को रिक्त कर देता हैI तेजी से शरीर के किसी भी अंग से जब बाल गिरने लगते हैं तो उसे Alopecia कहा जाता हैI सबसे अधिक गंजेपन का जिम्मेदार Alopecia ही हैIवैसी परिस्थतियाँ जिनमें एक किसी घुमावदार आकृति में होकर बाल झड़ने लगते हैं तो उसे ALOPECIA AREATA कहते हैंI  इसकी समस्या किसी भी उम्र में देखि जाती हैI यह गंजापन की सबसे गंभीर बिमारी है इसमें त्वचा से बाल संपूर्ण झड़ने लगते हैं और पूर्ण रूप से गंजा कर देता है और कहीं कहीं धब्बों का निशान बना देता हैIउस समय होता है जब आपके सर के बाल ना के बराबर रह जाते हैं जब पूरी तरह से अगर बाल झड़ जाए तो उसे एलोपेसिया कहते हैंI 

  • गंजापन के प्रकार(Types of Baldness)

लक्षणों के आधार पर अलग-अलग वर्गों में बांटा गया हैI

(1)एंड्रोजेनिक एलोपीसिया-ज्यादातर लोगों में एंड्रोजेनिक एलोपिसा का  लक्षण देखने को मिलते हैं यह महिला और पुरुष दोनों में होता है परन्तु पुरुष इससे अधिक ग्रसित होते हैंI इसलिए इसे  पुरुषों का गंजापन भी कहा जाता हैI शुरुआत में इसके लक्षण कनपटी और सिर के ऊपरी हिस्से में दिखाई देता हैI वैसे तो इसके लक्षण 40 वर्ष के ऊपर के व्यक्तियों में अधिक देखने को मिलती हैI इस किस्म के गंजापन मुख्यत: टेस्टोस्टेरॉन नामक हारमोन में असंतुलन के कारण होता हैI 

(2)ट्रैक्शन एलोपीसिया-  इस प्रकार के गंजापन  बाल के खिंचाव के कारण होता है अगर हम हेयर स्टाइल में  निरंतर परिवर्तन करते हैं तो बाल आधे- आधे पर से टूटने लगते हैंI 

(3)एलोपीसिया एरिटा- इसमें शरीर के किसी भी अंग से  बाल झड़ने लगता हैI परन्तु इसका प्रभाव मुख्य रूप से सिर व  खोपड़ी के त्वचा में अधिक देखने को मिलती हैI इसमें गोलाकर (सिक्कानुमा) आकृति के  बनावट बन जाता है और उस आकृति के अंदर का बाल पूरी तरीके से झड़ जाते हैंIएलोपीसिया एरिटा में  त्वचा पूरी तरीके से चिकनी हो जाती है Iयह किसी भी उम्र में हो सकता है या पुरुष और महिलाओं दोनों में होता हैI 

  • गंजापन के मुख्य लक्षण-(Symptomps of baldness)

ऐसे बहुत ही कम ही देखने को मिलता है जिसमें गंजापन या बाल अचानक तेजी से झड़ जाता हैI इसके कुछ संकेत और लक्षण होते हैं

  • शरीर के ख़ास कर सिर के ऊपर  शैम्पू करते समय या रगड़ते समय समय टूट-टूट कर बाल गिरने लगता हैI 
  • कभी -कभी दाग और धब्बे होकर बाल झड़ते हैंI 
  • लम्बे समय के बाद  बालों का आनाI
  • बालों का अत्यधिक पतला होनाI  
  • गंजेपन के गोल और धब्बेदार निशानI  
  •  गंजापन के  कारण (causes of Bladness)-

गंजापन के मुख्य कारण बदलते जीवनशैली और हमारी खान-पान में परिवर्तन होते हैंI  

  •  किसी भी प्रकार  के over thinking या मानसिक तनाव के कारणI 
  • टेस्टोस्टेरॉन नामक हारमोन सबंधी बदलाव के कारणI 
  • गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में हुए हार्मोनल असंतुलन के कारणI
  • अनुवांशिकी के कारण  
  • प्रोटीन की कमी के कारण 
  • बढ़ती उम्र भी गंजेपन के लिए जिम्मेदार हैI 
  • Unhealthy food अर्थात बाजारों के रेडीमेड किसी तरीके के खाद्य पदार्थ मसालेयुक्त भोज्य पदार्थ , जंक फ़ूड ,फ़ास्ट फ़ूड के सेवन करने से  क्योंकि उनमें पोषक तत्व की कमी होती है 
  •  आधुनिक जीवनशैली में युवाओं का नए -नए हेयर स्टाइल  के लिए हेयर केयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करने से क्यूंकि इसमें  प्रयुक्त रसायनिक पदार्थ हमारे बालों के लिए काफी नुकसानदायक हैI 
  • हार्मोनल असंतुलन के कारण 
  • शराब और ध्रूमपान के कारण सेI 
  • अगर हम पहले से ही किसी तरह के रोग से ग्रसित है जैसे थायरॉइड,एड्स,अस्थमा आदि  जैसी बीमारियों से ग्रसित हैं तो ये भी गंजापन का कारण हैI 
  • गंजापन के घरेलु उपाय –
  • बाहरी भोजन ना करेंI 
  • हमेशा योग और व्यायाम करेंI 
  • ध्रूमपान और शराब सेवन ना करेंI 
  • आवंला और जैतून तेल का प्रयोग करेंI 
  • हमेशा पोषकयुक्त भोजन लें जैसे की हरी सब्जियां ,हरे फल,मौसमी फल अत्याधिक मात्रा में लें क्यूंकि जिंक और मैग्नीशियम जैसे लवण भी उनसे प्राप्त होते हैंI 
  • देर रात ना सोएं ,भरपूर नींद लेंI 
  • किसी भी प्रकार के over thinking या टेंशन ना लेंI 

  नोट -इस लेख में उपरोक्त लिखी गई बातें अर्थात चिक्तिसकीय आलेख लोगों की  स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने बीमारी के बारे में अवगत कराने के लिए हैI  जो इलाज की पुष्टि नहीं करता हैI इसलिए स्वयं इलाज न करें उपरोक्त लिखी गए लक्षण होने पर  चिकित्सक से संपर्क करें और नियमित रूप से इलाज करवाएंI 

Haiza हैजा Cholera के Symptom-लक्षण-cause-treatment-उपचार

 

  • हैजा (Cholera)

हैजा एक ऐसा बीमारी है जो हमारे अनियमित दिनचर्या गलत खान-पान और शरीर की सही  देखभाल न करने से अधिक फैलता हैI प्राय: किसी भी रोग का जिम्मेदार हम खुद हैं आधुनिक जीवनशैली में हम शरीर क देखभाल करना भूल गए हैं,अशुद्ध खान -पान व्यस्त दिनचर्या के कारण कई प्रकार के रोग  धीरे -धीरे दस्तक देता है और हमें भनक भी नहीं लगती,किसी भी गंभीर बीमारी को सही खान -पान और सही देखभाल से काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता हैI हैजा को एशियाई महामारी के रूप में भी जाना जाता हैI करीब दो दशक पहले भारत में इसका प्रकोप बहुत अधिक था हर उम्र के लोग इस बीमारी के चपेट में आकर काल के गाल  में समा जाते थेI विश्व भर में लाखों मौत अभी भी हैजा का कारण होता हैI 

  • हैजा क्या है?(what is cholera?)

 हैजा गर्मी और मानसून के समय अधिक  फैलता हैI हैजा जीवाणुओं से फैलने वाली बीमारी है,जिसे घरेलु भाषा में विसूचिका भी कहा जाता हैI यह बैक्टीरिया से होने वाला एक रोग है जो मुख्य रूप से पानी से फैलता है, जिसमें रोगी के शरीर में गंभीर दस्त और शरीर में  पानी की कमी हो जाती हैI जिससे डीहाइड्रेशन हो सकता है अगर समय पर इलाज ना हो तो व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती हैI हैजा विब्रियो कोलेरा  नामक जीवाणु के कारण फैलता है यह जीवाणु मुख्य रूप से गंदे और अशुद्ध  भोजन और जल में पाए जाते हैंI यह मुख्य रूप से आंत को प्रभावित करता हैI हैजा गंदे वातावरण ,बाहर खुले में शौच जाने के कारण गंदे पानी , बासी भोजन के कारण अधिक फैलता हैI   हैजा का अगर समय पर इलाज ना हो तो यह महामारी का रूप धर लेता है परंतु हैजा एक व्यक्ति के संक्रमित होने से अन्य में नहीं फ़ैलता हैI हैजा संक्रमित आहार या पाने के कारण उसके बैक्टीरिया हमारे शरीर में आ जाते हैं और तेजी से अपना प्रभाव हमारे शरीर पर दिखाई देता है यह सीधा हमारे अंत को प्रभावित करता है और लगातार बैक्टेरियों की संख्या हैजा में  शरीर के अंदर बढ़ता रहता हैIहालांकि वर्तमान में हालात काफी सुधर गए हैं लोग शिक्षित होने के कारण स्वच्छता पर अधिक ध्यान देते हैं इसलिए यह एक सामान्य बीमारी की श्रेणी में शामिल हो गया है अब हैजा का रोगी पहले की तुलना में कम पाए जाते हैंI 

  •   हैजा होने का मुख्य कारण

जैसा कि आपको पता है कि हैजा वाइब्रियो कोलेरा नामक  मैं कारण फैलती है और यह बैक्टेरिया विभिन्न माध्यम से उत्पन्न होता हैI

  • खुले में शौच करने से ,अक्सर लोग गांव और कस्बों में  खेत -खलियान, नदी, तालाब के किनारे शौच करने से अत्याधिक संख्या  में यह बैक्टेरिया बाहर आता है और मक्खियों माध्यम से हमारे घरों में  भोजन, पानी तक फैलता हैI
  • बाजार का भोजन करने से ,सड़क के किनारे बिकने वाले खुले में ठेले आदि पर बिकनी वाली खाद्य सामग्री में हमेशा धूल,धुंआ और  मक्खी आकर बैठते हैं जिससे मक्खियों यों के ममाधयम से वह बैक्टेरिया हमारे आंत में प्रवेश कर जाता हैI
  • कच्चे और देर का भोजन जोदूषित हो जाता है उसे खाने से भी  हैजा हो सकता हैI
  •  मानव अशिष्ट द्वारा पानी सेउगाए गए सब्जियों का सेवन करने सेI
  • हैजा के प्रमुख लक्षण (SYMPTOMS)-

हैजा के लक्षण कुछ घंटों के बाद  या तो कुछ दिनों के बाद भी शुरू हो सकते हैं शुरुआती लक्षण थोड़े हल्के होते हैं लेकिन अगर सबसे बड़ी कठिनाई है कि प्राय: लोग शुरुआत में इसके लक्षणों को पहचान नहीं पाते जिससे हैजा कभी गंभीर बीमारी का रूप लेता है और जानलेवा  भी बन सकता हैI

  • शुरआत में रोगी को समय -समय पर निरंतर  कई बार उल्टी और बार -बार पानी जैसे दस्त होती हैI
  • कभी -कभी  पेट दर्द हो सकता हैI
  • सिर में चक्कर और दर्द के साथ अधिक कमजोरी महसूस होनाI
  • पानी की कमी की वजह से  डिहाईड्रेशन होनाI
  • शरीर के कुछ अंगों में,नाखूनों  नीलापन दिखाई देनाI
  •  प्यास अधिक लगना ,पल्स का धीमा हो जाना 
  • कभी कभी रोग बेहोशी के हालत में चला जाता हैI
  • मांसपेशियों में खिंचाव और ऐंठन महसूस होनाI
  • शरीर का ठंडा पड़ जानाI
  • कभी -कभी शरीर के आंतरिक अंग काम करना बंद कर देता हैI
  • हैजा से बचने का घरेलू उपाय – 

हैजा में इलाज के साथ बचाव की जरूरत ज्यादा होती है अगर हम अपने शरीर पर थोड़ा देखभाल करना शुरू कर दें अच्छी और बुरे का फर्क कि समझ हो तो इस रोग से संक्रमित होने से आशंका कम होती है,क्योंकि गंदे पानी का सेवन और दूषित खाद्य पदार्थो का सेवन है इस रोग की सबसे बड़ी वजह है तो  इसलिए खुद को नीचे लिखी गयी बातों को अपने दैनिक जीवन में जरूर याद रखेंI

    • हमेशा खाने -पीने में सावधानी बरतें ताज़ी और गर्म पानी पियेंI
  • हमेशा पानी को उबालकर पियें  पानी को गर्म करने से उसमें (पानी)से युक्त कीटाणु  नष्ट हो जाते हैंI
  • खुले में शौच नहीं करनी चाहिएI
  • भोजन करने से पहले और उसके बाद में हमेशा हाथ अच्छे तरीके से धो लेंI
  • हमेशा ताजी और हरी सब्जियां का ही आहार लें सब्जियों को बनाने से पहले अच्छे तरीके से और गर्म पानी से धोएंI
  • बाहर का विशेषकरके बिकनी वाली खुले में बिकने वाली खाद्य पदार्थों को ना खाएंI
  •  मक्खियों को भोजन पर क्या अपने बिस्तर पर न बैठने देंI
  •  हमेशा रसोई घर को साफ सुथरा और भोजन कर रखेंI
  • पूरी तरीके से पकाई गयी भोजन करेंI
  • भोजन को साफ़ सुथरा करके बनायें हमेशा बर्तनों को पूरी तरीके से साफ़ कर लेंIरात को हमेशा ब्रश करें और बच्चों को नाख़ून मुंह में ना लेने देंI
  • हैजा का उपचार की प्रक्रिया(Treatment)-

हैजा का शुरुआती लक्षण धीरे-धीरे विकसित होता है और गंभीर बीमारी का रूप ले लेता हैI हैजा में निरंतर B.P की जांच ,पल्स की जाँच निरंतर किया जाता हैI चूँकि हैजा एक संक्रामक रोग है , इसके लिए टीका भी उपलब्ध हैI  जब व्यक्ति डिहाईड्रेशन का शिकार हो जाता है तो कभी-कभी कभी जानलेवा बन जाता है इसलिए रीहाड्रेशन किया जाता हैI जब रोगी गंभीर रूप से डिहाईड्रेशन का शिकार हो जाता है उसे अस्पताल में भर्ती में डॉक्टर नसों के  माध्यम से तरल पदार्थ शरीर में पहुंचाते हैंIकुछ मामलों में एंटीबायोटिक्स भी जरुरत पड़ने पर दी जाती हैI

  • नोट -इस लेख में उपरोक्त लिखी गई बातें अर्थात चिक्तिसकीय आलेख लोगों की  स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने बीमारी के बारे में अवगत कराने के लिए हैI  जो इलाज की पुष्टि नहीं करता हैI इसलिए स्वयं इलाज न करें उपरोक्त लिखी गए लक्षण होने पर  चिकित्सक से संपर्क करें और नियमित रूप से इलाज करवाएंI 

BREAST CANCER (स्तन कैंसर) के Symptom-लक्षण-cause-treatment-उपचार

 

  • BREAST CANCER (स्तन कैंसर)

आधुनिक दौर में मानव की जीने की तरीके में परिवर्तन होने के चलते पूर्ण रूप से स्वस्थ रहना एक चुनौती की तरह हैI  हमारे दिनचर्या में लापरवाही बरतने से और अनियमितता के वजह से न जाने कितने रोग हमारे शरीर में दस्तक दे रहा हैI दुनिया भर में कैंसर की बीमारी  हर आयु वर्ग के लोगों को युवा से लेकर बुजुर्ग तक चाहे महिला हो या पुरुष सभी के शिकार हो रहे हैंI पिछले 10 साल से शरीर में खासकर महिलाओं में जो कैंसर असामान्य  कोशिकाओं के प्रभाव और कोशिकाओं की संख्या में वृद्धि से होने वाले विभिन्न कैंसर में सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाले कैंसर ब्रेस्ट कैंसर हैI ब्रेस्ट कैंसर हालंकि की पुरुषों में को भी होता है परन्तु अपवाद के रूप में अर्थात काफी कम लोगों में पुरुषों में ब्रैस्ट कैंसर देखने को मिलता हैI क्या एक ऐसी बीमारी है जिसको जितनी जल्दी पकड़ा जाए उतना ही  कम समय में कारगर उपचार हो सकता हैI इसलिए यह जरूरी है इसके बारे में पूरी जानकारी हो जिससे हम इसके लक्षणों को पहचान ले ताकि शुरुआती दौर में ही इसका सरल रूप से उपचार हो सकेI अगर महिलाएं स्वयं परीक्षण करें तो इस रोग को पहले दौर में ही पहचाना जा सकता है शुरुआती दौर में यदि त्वचा को छूने से दर्द दे रही रही है या कहीं गाँठ हो जिसको महसूस पता लग सके सके तो उसके बाद राहें आसान हो जाएगीI

  • ब्रेस्ट कैंसर क्या है?

कैंसर का वह प्रकार जो महिलाओं के अंदर  स्तनों(Breasts) में पनपता हैI कैंसर के मामले महिलाओं में भी आजकल काफी सामने आ रहे हैं जिसमें ब्रेस्ट कैंसर सर्वाधिक 70 % हैI  आंकड़ों के मुताबिक 8 में से एक महिला की मौत के कारण ब्रेस्ट कैंसर बनता हैI ब्रेस्ट कैंसर में स्तन की कोशिकाओं में ट्यूमर उतपन्न होता है शरीर के अन्य भागों को भी प्रभावित करता हैI इसके लक्षण अधिकांशत: जिनकी उम्र 40 वर्ष या उससे अधिक हो उनमें  देखने को मिलता हैI हमारा शरीर कोशिकाओं (cells)से बना हुआ है जिसका जीवन चक्र सिमित रहता है अर्थात शरीर में कोशिकाओं का क्षय होना और फिर नए कोशिकाओं का निर्माण होता है परन्तु जब कैंसर होता है तो कोशिकाएं नष्ट होने के बजाय केवल बढ़ने लगती है ,कोशिकाओं की संख्या  जब अनियंत्रित रूप से बढ़ते हैं तो यह एक ट्यूमर(गाँठ) का रूप ले लेता हैI गांठ धीरे -धीरे कैंसर का रूप ले लेता है यह शरीर के किसी भी अंग(भाग)में हो सकता है अगर स्तन में यह गांठनुमा आकृति दर्द के साथ उतपन्न होती है तो उसे स्तन कैंसर का नाम दिया जाता हैI कोशिकाओं की संख्या जब अनियंत्रित होने लगती है तो लगातार उत्तकों (Tissues)  की संख्या में भी इजाफा होती है, यह उत्तकों का समूह लागतार बढ़ते रहने से उत्तक के टुकड़े खून के रास्ते शरीर के अन्य हिस्सों में पहुंचते हैं और नई जगह पर विस्तार करने लगते हैं जिसे मेटास्टेसिस कहा जाता हैI स्तन रोगों के कई प्रकार होते हैं वह संक्रमण के साथ या बिना संक्रमण के आसन पर गांठ का कारण बन सकते हैं 

  • स्तन कैंसर के लक्षण(Symptoms)-

ब्रेस्ट कैंसर का लक्षण को एकाएक पहचानना बहुत ही मुश्किल होता है इसलिए सप्ताह में महिलाओं को हमेशा स्वयं परीक्षण करनी चाहिएI  स्तन में कहीं गांठनुमा आकृति  उत्पन्न या कहीं दर्द का आभास हो या किसी प्रकार के अन्य विकार आये तो समझ लें की यह ब्रेस्ट कैंसर का दस्तक है,अगर शुरूआती दिनों में इसकी पहचान करके उपचार शुरू हो जाए तो यह पूरी तरह से ठीक हो सकता हैI  

  •  किसी एक स्तन में किसी भी तरह के मांस या गांठनुमा आकृति उतपन्न होना,इसके दबाने  उतनी दर्द नहीं होतीI 
  • कैंसर वाली गांठ कभी गोलाकार नहीं होते और ना ही शुरुआती दिनों में दर्द होता हैI 
  • स्तन के चमड़ी (त्वचा)मोटी और सुन्न(asleep/dead) हो जाता है अर्थात उसमे सक्रियता कम दिखाई देने लगती हैI 
  • स्तन में किसी प्रकर की गड्ढा(dimple) आ जाता हैI 
  •  जिस प्रकार से किसी घाव या जख्म को सूखने पर हमारे शरीर के त्वचा सुखकर पतली परत बना लेता है ठीक उसी प्रकार से स्तन  nipple पर पतली परत बन जाता हैI इसे चिकित्सीय भाषा में (Paget’s disease)पगेट रोग कहा जाता हैI
  • स्तन  में सूजन हो जानाI 
  •  स्तन की त्वचा  लाल दिखाई देती हैI 
  •  स्तन कभी -कभी इन्फेक्शन की वजह से गांठ फट  जाता है, जिससे बदबूदार मवाद आने लगते हैं जो ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण हो सकते हैंI  
  • स्तन के आकार में भी परिवर्तन देखने को मिलता हैI
  • ब्रेस्ट कैंसर जब धीरे -धीरे फैलकर  लिम्फनोट्स तक फ़ैल जातें हैं तो  
  • स्तन कैंसर का प्रमुख कारण-

किसी भी कैंसर का मुख्य  कारण कोशिकाओं का असमान्य  वृद्धि है, कोशिकाओं के वृद्धि हो या अन्य  कारण कैंसर की बीमारियां हमारे लापरवाह भरी जीवनशैली ,अशुद्ध खाद्य पदार्थ और नशे के आदत इसका मुख्या कारक हैIपहले यह समस्या अधिकतर बुजुर्ग महिलाओं में देखने को मिलती थी परंतु आज स्तन कैंसर इतना प्रभावी हो चुका है किसी भी उम्र में महिलाएं इसका शिकार बन सकती हैं, इसलिए यह बेहद जरूरी है कि हम इसके प्रमुख कारणों को नसीर की जान है बल्कि  दिनचर्या में हमेशा सजग और सावधानी बरतेंI

  • यह  अनुवांशिकता के कारण भी हो सकता है अगर आपके परिवार में कोई भी महिला या पुरुष स्तन कैंसर से पीड़ित है तो इसके लक्षण आपने भी आ सकती हैं परंतु इस रोग में अनुवांशिकता  उतना मायने नहीं रखताI 
  • प्रोस्टेट सबंधी किसी तरह की समस्याएं को नजर अंदाज करने से अगर हम प्रोस्टेट ग्रंथि में हो रहे हैं किसी तरह के समस्याओं को शुरुआती उपचार नहीं करवाते हैं सुरिया गंभीर रूप धारण कर कैंसर का कारण बन सकता हैI 
  •  बाजारू भोजन,गर्म भोजन,रिफाईनयुक्त भोजन और खराब जीवनशैली  के साथ -साथ शराब, बीड़ी सिगरेट गुटका (ध्रूमपान) आदि का सेवन करने सेI
  • धूल ,धुआं, मिट्टी और वायु  प्रदूषण की वजह से स्तन कैंसर हो सकता हैI 
  • सिगरेट और तंबाकू ऐसे दो कारक है जो फेफड़ों ,मुंह, स्तन का कैंसर पैदा करने का मुख्य कारक हैI 
  • अगर किसी महिला को पहले से गर्भाशय कैंसर की समस्या है तो उन्हें स्तन कैंसर से ग्रसित होने की आशंका बनी रहती हैI 
  • डिप्रेशन, हाइपरटेंशन,मोटापा और अस्थमा  बिमारी के अधिकतम दवाइयों ज सेवन करने से भी स्तन कैंसर उत्पन्न हो सकता हैI
  • अधिक मोबाइल ,गैजेट्स जैसे आधुनिक उपकरण जिनमें रेडिएशन  सक्रिय रहता है का इस्तेमाल से भी रेडिएशन के संपर्क में आ जाने से स्तन कैंसर स्तन कैंसर होने की आशंका बनी रहती हैI  
  • अधिक उम्र में वैवाहिक जीवन शुरुआत करने से, उम्र में गर्भवती होने सेI
  • ब्रेस्ट कैंसर का इलाज और प्रक्रिया(TREATMENT)-

 सभी लोग जानते हैं की महिलाओं का स्तन का प्रमुख  कार्य मां बनने के बाद अपने शिशु के दूध पिलाकर उनका लालन -पोषण करना होता हैI स्तन(BREAST) का वह भाग जहां दूध बनता है उसे NODULES(ग्रंथि) कहा जाता हैI स्तन का वह भाग जहाँ से  दूध बाहर आता है उसे DUG कहा जाता हैIस्तन कैंसर इन दोनों भागों में परिवर्तन के कारण होता हैI स्तन कैंसर में लक्षण और स्थितियां ,अवस्था(Stages) जानकर उसके अनुसार थेरेपी और दवाइयां द्वारा उपचार किया जाता हैI उसके उपरांत  Stages के आधार पर रेडिएशन थेरेपी , कीमोथेरेपी,हार्मोनल थेरेपी आदि द्वारा उपचार किया जाता हैI इसके अलावा कई प्रकार के सर्जरी और दवाईयां दी जाती हैI

  •  स्तन कैंसर से बचने के लिए घरेलु उपाय और सावधानियां-

महिलाओं को अक्सर कई प्रकार के समस्याओं का सामना करना पड़ता है जिसमें सांस लेने से लेकर जनन क्षमता खानपान कामकाज और पूरे परिवार का देखभाल करना उन्हीं कंधों पर होता है जिसके कारण काफी कम समय अपने लिए निकाल पाती हैं  आमतौर पर अगर देखा जाए तो जितना परिवार को देखभाल करना जरूरी है उतना ही एक गृहणी हो या कामकाजी औरत के लिए अपने शरीर का देखभाल करना बेहद महत्वपूर्ण हैI 

  • हमेशा महीने के किसी निश्चित तारीख को परिवार के किसी सदस्य की मदद से त्वचा में उपस्थित होने वाले किसी भी लाल काले या किसी अन्य रंग के दाग धब्बे को देखने का प्रयास करनी चाहिएI 
  •  अगर दाग शरीर के किसी अंग में हो या  गठीला हो या किसी प्रकार के दर्द उत्पन्न हो तो चिकित्सक से संपर्क करना चाहिएI 
  • कैंसर के उत्पन्न दाग या गाँठ अधिकतम  पीठ, स्तन की दायीं और बाजुओं की तरफ होता हैI 
  • हमारे शरीर में करीब  800 लसीका ग्रंथियां होती है जिनमे करीब 300 ग्रंथिया ऐसी होती हैं  जो शरीर में बिमारी का पता लगता हैं लिम्फ ग्रंथियां दोनों हाथों के अंदर  या बगल में और जांघों के जोड़ में होता है इनमें किसी तरह की सूजन शरीर का संकेत होता हैI 
  • सिगरेट और तम्बाकू से बिल्कुल तौबा कर लेंI 
  • समय पर शादी और गर्भधारण करेंI 
  • चाय या कॉफी कम मात्रा में लेंI 
  • ताज़ी सब्जियों  का सेवन करेंI 
  • नियमित योग और व्यायाम करेंI  

उपरोक्त दी गई जानकारी चिकिसकों और किताबों के अध्ययन के माध्यम से लिखी गयी हैI इस आलेख का मकसद अपने पाठकों को जागरूकता बढ़ाने तथा इस रोग के प्रति सचेत करवाना हैI  अगर आप इस रोग से अवगत हो जाते हैं या किसी प्रकार के लक्षण दिखाई दे तो स्वयं इलाज प्रारंभ ना करें तुरंत ही किसी अच्छे सर्जन और यूरोलॉजिस्ट से मिले क्योंकि हम किसी भी प्रकार के इलाज की पुष्टि नहीं करतेI 

Prostate Cancer प्रोस्टेट कैंसर के Symptom-लक्षण-cause-treatment-उपचार

 

  • Prostate Cancer – प्रोस्टेट कैंसर (प्रोस्टेट सबंधी बीमारी)

प्राय: लोग शुक्राणुओं और यूरिन( पेशाब)  से जुडी किसी भी विकार को सामान्य बीमारी मानकर नजरअंदाज करते हैं और सामान्य रूप से चिकित्सा करवाते हैं जिसका परिणाम और घातक हो सकता हैIअगर आपको प्रोस्टेट सबंधी किसी तरह की समस्या  महसूस होती है तो उसे बिल्कुल भी नजरअंदाज ना करें क्योंकि आपकी छोटी सी लापरवाही इस रोग में काफी गंभीर और घातक हो सकती हैI प्रोस्टेट है क्या सबसे पहले यह जानना होगा  इसके बाद आप स्वत: उससे जुड़ी अनेक रोग को पहचान सकते हैंI भारत में इस समय प्रोस्टेट से सबंधित रोगियों की संख्या दिनों -दिन बढ़ती ही चली जा रही हैI प्रोस्टेट का शुरुआती दिनों में ही उपचार ना हो तो कैंसर भी हो  सकता हैI चिकित्सक के अनुसार प्रोस्टेट के शुरुआती लक्षण हमारे आंतरिक होते हैं पेशाब संबंधी वह हर समस्या जिनमें पेशाब में जलन ,पेशाब की धार में कमजोरी ,रुक- रुक कर पेशाब आना ,पेशाब को रोकने में असमर्थ,पेशाब का आभास होने पर भी पेशाब ना हो पाना ,बार बार पेशाब का आभास होना आदि पेशाब संबंधी जितने भी मुख्य समस्याएं हैं प्रोस्टेट ग्रंथि बढ़ने पर हो सकता हैI चिकित्सकों का कहना है कि अगर व्यक्ति सही समय पर प्रोस्टेट का इलाज करा ले तो उसे पूर्ण रूप से कई बीमारियों से मुक्ति मिल सकती है यह सिर्फ अंदरूनी रूप से ही नहीं  बल्कि बाहरी रूप से भी शरीर को दुर्बल बनाने के साथ साथ- साथ जीवन को नरकीय बना देता है जिसमें व्यक्ति कोई भी अपनी दैनिक क्रियाकलाप अच्छे से नहीं कर पाता है यहां तक कि उनकी दिनचर्या बिस्तर पर हीं बिताने को मजबूर होते हैंI

  • प्रोस्टेट क्या है?(WHAT IS PROSTATE?)

प्रोस्टेट एक पुरुषों में पाए जाने वाली ग्रंथि है जिसका आकार अखरोट के जैसा होता है और  मूत्राशय (urine bladder )के नीचे निकट होता हैIइस ग्रंथि का कार्य ऐसे द्रव पदार्थों का निर्माण करना है जिसमें वीर्य(sperm) मौजूद हों उसे चिकित्सीय भाषा में प्रोस्टेट फ्लूइड कहते हैं जो वीर्य का लगभग 30 से 35% भाग बनाता है और इसी कारण वीर्य को हल्का रंग सफेद होता हैI यह शुक्राणु में  संबंधित तरल पैदा करता हैI आप दूसरे शब्दों में बोल सकते हैं कि प्रोस्टेट Reproductive system और uratory system का एक हिस्सा हैI इसके द्वारा पेशाब की नली बाहर निकलता हैI  

  • प्रोस्टेट ग्रंथि का बढ़ना -BPH क्या है?(what is prostate enlargement?

वैसी परिस्थति जब पुरुषों के अंदर प्रोस्टेट ग्रंथि बढ़ जाती है तो उससे प्रोस्टेट इनलारजमेंट(ENLARGMENT) या  BPH(BEINGN PROSTATIC HYPERTROPHY) भी कहा जाता हैI ग्रंथि के बढ़ने के कारण अनेक प्रकार के पेशाब संबंधी समस्याएं उत्पन्न होती हैI  प्रोस्टेट ग्रंथि हमारे जीवन में दो बार बढ़ता है जब PUBERTY की उम्र में थोड़ा सक्रिय होता है तथा जब 25 वर्ष के उम्र के आस-पास में थोड़ी-थोड़ी वृद्धि होने लगती है और जीवन भर बढ़ता है,लेकिन यह  कभी तकलीफ नहीं देता परन्तु 50 वर्ष की उम्र के बाद के व्यक्तियों में जब प्रोस्टेट के चपेट में आने लगते हैं धीरे -धीरे वह ग्रंथि बढ़कर पेशाब मार्ग में अवरोध पैदा करता है तो अनेकों पेशाब संबंधी समस्याएं देखने को मिलती हैI

  प्रोस्टेट ग्रंथि की वृद्धि दो प्रकार की होती है-(1)जब ग्रंथि के अंदरूनी अर्थात अंदर की तरफ से कोशिकाओं में वृद्धि होती है उसे BPH कहा जाता हैI  इसके अंदर की तरफ जो पेशाब जाना रहती है उन पर दबाव महसूस होती है जिसकी वजह से पेशाब से संबंधित अनेक प्रकार के समस्याओं का सामना करना पड़ता हैI 

(2) CRACINOMA OF PROSTATE- इसमें ग्रंथि के बाहरी  की तरफ से कोशिकाएं बढ़ने लगती है अगर इसमें वृद्धि तेजी से बढ़ती है तो प्रोस्टेट कैंसर का रूप ले लेता है अगर इसका  उपचार शुरुआती चरणों में ना हो तो काफी घातक साबित होता हैI 

  • प्रोस्टेट ग्रंथि बढ़ने का मुख्य कारण  है? 
  •  इसका मुख्य वजह  बढ़ती उम्र है प्रोस्टेट का आकार उम्र के साथ हमेशा वृद्धि होती हैI 
  • हार्मोन असंतुलन उम्र के साथ-साथ पुरुषों में Androgen  हार्मोन का स्तर कम हो जाता है और Estrogenका स्तर बढ़ जाता हैI 
  • मसाला और अधिक प्रोटीन युक्त भोजन करने से
  •   प्रोस्टेट ग्रंथि का बढ़ना अनुवांशिकी भी हो सकता हैI
  • योगा और व्यायाम ना करनाI 
  • प्रोस्टेट वृद्धि (BPH )का  मुख्य लक्षण (SYMPTOMS) 

प्रोस्टेट वृद्धि  में अनेक प्रकार के पेशाब सबंधी समस्याएं से रोगी  ग्रसित होता है अगर आपको जरा सभी पेशाब संबंधी परेशानियां महसूस हो तो सावधान हो जाइए और नीचे दिए गए लक्षणों के आधार पर अपना उपचार जरूर करवाएंI

  • अगर आपको रात में बार -बार पेशाब लगे तो यह प्रोस्टेट ग्रंथि का प्राथमिक लक्षण हो सकते हैंI 
  • रुक रुक कर पेशाब लगना
  •  बार बार पेशाब का महसूस होना
  •   पेशाब के साथ रक्तस्राव  होना
  • पेशाब का आभास तो होता है परंतु पूरी तरह से उसका पेशाब नहीं हो पाताI 
  •  पेशाब रोकने में असमर्थता अर्थात  पेशाब का आभास हो तो व्यक्ति का उस पर नियंत्रण रखना असंभव हो जानाI 
  •  प्रोस्टेट ग्रंथि में वृद्धि होने पर मरीज का पेशाब रुकने लगता है और पेशाब की थैली हमेशा भरी रहती हैI 
  •  इस तरह के समस्याएं अधिकतर बुजुर्गों में या अधिक उम्र के व्यक्ति जिनकी उम्र 50 के आसपास या उससे ऊपर हो उन्हें देखने को अधिकतम मिलती हैI 
  • सेक्स सबंधी समस्याएं आ भी आ सकती हैI 
  • प्रोस्टेट ग्रंथि में वृद्धि का पहचान कैसे करें?(DIAGNOSIS of BPH) 

प्रोस्टेट का बढ़ने का पहचान लक्षणों  के आधार के साथ-साथ चिकित्सक विभिन्न जांच करके BPH  का पता लगाते हैं ताकि सबसे पहले यह स्पष्ट हो सके कि यह कहीं कैंसर की ओर तो नहीं बढ़ रहा हैI इसके लिए चिकित्सक द्वारा सोनोग्राफी कराई जाती है जिसमें ग्रंथि का वजन का पता लगया जाता है, सोनोग्राफी से  यह भी ज्ञात हो जाता है की रोगी का पेशाब स्पष्ट हो रहा है की नहीं, सभी तरह के खून की जांच कराया जाता है जिससे इस ग्रंथि की लंबाई में कितनी वृद्धि हुई है इसके लिए Digital Rectal Examination करवाया जाता है जिसमें  गुदाद्वार के अंदर उंगली के द्वारा डॉक्टर पता लगाते हैं की लंबाई कितनी बढ़ी हुई हैIइसके अलावा पेशाब की जांच, पेशाब में संक्रमण के निदान के लिए और खून में क्रिएटिनिन की जांच जैसे प्रमुख जांच की जाती हैI जिससे यह आसानी से पता लगाया जा सकता है प्रोस्टेट ग्रंथि में कितनी वृद्धि हुई है उसके अनुसार दवा द्वारा या सर्जरी द्वारा डॉक्टर उपचार करते हैंI 

  • प्रोस्टेट कैंसर क्या है?(what is prostate cancer?)

प्रोस्टेट  कैंसर पुरुषों में होता है क्यूंकि प्रोस्टेट ग्रंथि केवल पुरुषों में पायी जाती हैI यह प्रोस्टेट से सबंधित सबसे बड़ी बीमारी है हालाँकि कैंसर के नजरिए से देखा जाए तो यह एक सामान्य कैंसर कि श्रेणी में आता है परन्तु इसमें व्यक्ति की जान भी जा सकता हैI  प्रोस्टेट कैंसर में प्रोस्टेट की ग्रंथि में कोशिकाओं की अनियंत्रित रूप से वृद्धि होती है सामान्य तौर पर ग्रंथि धीमे -धीमे बढ़ती है वही कैंसर में अन्य कैंसर की तरह तेजी से नए-नए कोशिकाओं का निर्माण होता है जिससे प्रोस्टेट ग्रंथि में गाँठ उतपन्न होती हैIमुख्य रूप से 50 वर्ष के अधिक वाले व्यक्ति में प्रोस्टेट कैंसर  होता हैI वैसे लोग जो 50 वर्ष के आस -पास हैं उनमें से प्रत्येक 7 में से 1 को  अपनी चपेट में लेता हैI प्रोस्टेट कैंसर में  ग्रंथि के बाहरी सतह की कोशिकाएं प्रभावित करती हैI  एक बार प्रोस्टेट कैंसर जब विकसित  होता है तो बाहर के तरफ फैलने लगता हैI  इसका ठोस कारण का पता अभी तक नहीं मिला हैIआनुवंशिकी , बढ़ती उम्र ,हार्मोन असंतुलन ,अनियमित दिनचर्या इसका भी कारण है

  •   प्रोस्टेट कैंसर का मुख्य लक्षण-  (SYMPTOMS OF PROSTATE CANCER)

प्रोस्टेट कैंसर को साइलेंट किलर (silent killer) कहा जाता है क्योंकि इसमें BPH की तुलना में काफी देर से लक्षण दिखाई देते हैं,तब तक शरीर के काफी क्षति भी पहुंच सकता  हैंI 

  • पेशाब रुक -रुक होकर होना ,अगर पेशाब बार -बार रूकती है तो पथरी की भी समस्या उतपन्न हो सकती हैI 
  • अचानक बैठे-बैठे पेशाब महसूस होना जिन पर नियंत्रण ना हो जिस स्थान पर बैठे  हैं वहीँ पेशाब की कुछ बुँदे गिर सकती हैI 
  • यौनक्षमता कमजोर होना अर्थात सेक्स में अरुचि 
  • पेशाब करते समय दर्द होनाI 
  • पैरों ,एड़ियों में सूजन और दर्द होनाI 
  • शरीर की हड्डियों में जगह -जगह पर दर्द महसूस होनाI 
  • रोगी बुखार से भी पीड़ित रहता हैI 
  • मूत्र के साथ मवाद निकलनाI 
  • कमजोरी महसूस होनाI 
  •  एनीमिया रोग की लक्षण भी दिखाई देते हैंI 
  • प्रोस्टेट कैंसर के उपचार की प्रक्रिया –

प्रोस्टेट कैंसर में  जिस प्रकार ग्रंथियों की वृद्धि  होने पर विभिन्न प्रकार की जांचे यूरोलोजीस्ट और सर्जन द्वारा की जाती है, वही जाँच की प्रक्रियाएं कैंसर में भी होता हैI इसके तत्पश्चात कैंसर की अवस्था के अनुसार विभिन्न प्रकार के सर्जरी और दवाएं द्वारा उपचार किया जाता हैI जरुरत पड़ने पर थेरेपी चढ़ाई जाती हैI इसका इलाज अन्य कैंसर की तुलना कम समय तक चलता हैI 

  • प्रोस्टेट कैंसर के घरेलु उपचार-
  • अगर किसी भी तरह के पेशाब  या पेट संबंधी या ऊपर बताई गई लक्षणों का संकेत आपके शरीर में पाई जाती है तो तुरंत किसी अच्छे सर्जन और यूरोलॉजिस्ट मिले और उनके द्वारा  बताई गई परामर्श को ईमानदारी से पालन करें और निरंतर उपचार करवाएंI 
  • अगर प्रोस्टेट कैंसर होता है तो रोगी को बिल्कुल भी घबराना नहीं चाहिए या किसी प्रकार के Over thinking नहीं करनी चाहिएक्योंकि इसमें रोगी काफी कम समय में उपचार के बाद पूरी तरीके से स्वस्थ हो  जाता हैI 
  • धूम्रपान का सेवन ना करेंI 
  •  हमेशा हरी और  ताज़ी सब्जियां और मौसमी फलों का सेवन करेंI
  •  नियमित रूप से योग और व्यायाम करेंI 
  • नोट प्रोस्टेट संबंधी उपरोक्त दी गई जानकारी चिकिसकों और किताबों के अध्ययन के माध्यम से लिखी गयी हैI इस आलेख का मकसद अपने पाठकों को जागरूकता बढ़ाने तथा इस रोग के प्रति सचेत करवाना हैI  अगर आप इस रोग से अवगत हो जाते हैं या किसी प्रकार के लक्षण दिखाई दे तो स्वयं इलाज प्रारंभ ना करें तुरंत ही किसी अच्छे सर्जन और यूरोलॉजिस्ट से मिले क्योंकि हम किसी भी प्रकार के इलाज की पुष्टि नहीं करतेI 

  

Appendix(अपेंडिक्स) के Symptom-लक्षण-cause-treatment-उपचार

 

  • Appendix(अपेंडिक्स)

पेट हमारा पाचन तंत्र  से लेकर शरीर के हर गतिविधियों में संतुलन बनाने का कार्य करता हैI अपेंडिक्स के मामले में दोनों हाथ और उनके अंदर की मालिका दीवारों में सूजन और कई प्रकार के अधिकारी उत्पन्न होती हैं जिससे रोगी को बहुत प्रकार के परेशानियां उत्पन्न होती हैI  यह मूल रूप से गंदे और शरीर के अनुकूल खाद्य पदार्थों के सेवन ना करने से होता है I अपेंडिक्स में ही नहीं बल्कि पेट के आंतरिक गतिविधियों में थोड़ी भी समस्या या लक्षण दिखाई देने पर व्यक्ति को डॉक्टर को दिखाना चाहिए क्यूंकि यह पूरी तरह से आंतरिक बीमारी है बीमारी को नियंत्रित करने के लिए  विशेषज्ञ डॉक्टर से ही परामर्श लेना सर्वोत्तम है I आधुनिक युग में अपेंडिक्स एक आम समस्या हो चुका है जो काफी कष्टकारी भी है अपेंडिस रोगी के रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ने से वो धीरे धीरे अन्य बीमारियों से भी ग्रसित हो जाता है इसलिए अपेंडिक्स से बचाव के लिए समय पर ही लक्षण पहचान कर उपचार करवाना यह एकमात्र उपाय हैं विशेषज्ञ बताते हैं शुरुआती लक्षणों में यदि अपेंडिस की पहचान हो जाए तो संपूर्ण इलाज काफी कम समय में हो जाता है जिससे इस पर पूरी तरह से नियंत्रित किया जा सकता है

  • अपेंडिक्स क्या है?(What is Appendix)? 

अपेंडिक्स (Appendix ) हमारे शरीर का आंतरिक अंग है जो पेट के अंदर बड़ी आंत और छोटी आंत के जंक्शन में पेट के निचले हिस्से में  दाहिनी तरफ होता हैIपेट का निचला दाहिना हिस्सा जहँ पैर का जोड़(joint)है उस जगह पर अगर दर्द का आभास होता है तो ये (appendicits)एपिन्डिसाइटिस  का लक्षण हो सकता हैI एपिन्डिसाइटिस(आंत्रपुच्छ) अपेंडिक्स के दर्द को कहा जाता हैI अपेंडिक्स की आकृति झिल्लीनुमा होता हैI यह बड़ी आंत से परस्पर जुड़ा होता हैI अपेंडिक्स शरीर में  सेलुलोज को पचाने में सहायक होता हैI अपेंडिक्स का एक सिरा खुला होता है और दूसरी बंद होता हैI कई बार भोजन का कोई कण इसमें चले जाता है तो दूसरे सिरे को ब्लॉक होने के कारण दूसरी ओर से  निकल नहीं पाता जिसके परिणामस्वरूप अपेंडिक्स संक्रमित हो जाता है इसमें बैक्ट्रिया कीटाणु और सड़न पैदा होने लगती है जिसे चिकित्सीय भाषा में एपिन्डिसाइटिस कहा जाता हैI इस रोग का असर 10 वर्ष से 35 वर्ष तक के लोगों में  अधिकतर देखने को मिलती हैI जिंदा खाना-पीना शुद्ध नहीं होता है अर्थात वह बाहरी भोजन और जंग फूड चाइनीज फूड आदि जैसे खाद्य पदार्थ को ज्यादा अपने आहार में शामिल करते हैं तो उनमें अपेंडिक्स होने की आशंका हमेशा बनी रहती हैI अपेंडिक्स की शरीर में भूमिका क्या है ऊपर अभी चिकित्सा विज्ञान में पूर्ण रूप से स्पष्ट नहीं  हुआ हैI इसका आकार अलग -अलग रोगियों में अलग-अलग आकृति होती हैIपर अधिकांशत: 9 c.m इसकी लम्बाई होत्ती है परन्तु इसकी लम्बाई कम से कम 2 c.m से लेकर 20 c.m तक देखने को मिलती हैI अपेंडिक्स का (diameter) 6mm होता हैI अपेंडिक्स का दर्द विशेष रूप से पहचान में नहीं आता अचानक काफी कठिन होता है क्योंकि यह अपेंडिक्स का दर्द है कि नहीं पेट में विभिन्न कारणों से दर्द उत्पन्न हो सकता  है जिनमें अशुद्ध भोजन और अन्य वजहों के कारण भी होता हैI  

  • अपेंडिक्स के प्रमुख लक्षण -(Symptomps of Appendix)

अगर हम इन लक्षणों  की जानकारी ना हो तो अपेंडिक्स बीमारी को पहचानना थोड़ा कठिन हो जाता है

  • पेट में  जहाँ भी इन्फेक्शन होता है तो उसके कारण तेज दर्द होता हैI 
  • जी मचलना और उल्टी आना 
  • पेट में भारीपन और गैस महसूस होना
  • बुखार और सिर में तेज दर्द होना 
  • भूख न  लगना और कमजोरी का आभास होनाI 
  • कफ युक्त मल आता हैI 
  •  नब्ज में ऐंठन और कब्ज का समस्या रहनाI 
  • कई बार अपेंडिक्स में मूत्राशय की समस्या भी देखने को मिलती है अगर मुद्रास है अपेंडिसेज संक्रमित हो तो बार-बार  पेशाब लगता है और पेशाब करते समय दर्द का आभास भी होता हैI 
  • अपेंडिक्स  रोग में होने वाली प्रमुख जांचे –

अपेंडिक्स रोग में सर्वप्रथम Physically Examination  किया जाता है जिसमें शरीर के परिवर्तन सूजन ,बाहरी चोट आदि की जांच की जाती हैI इसके अलावा खून की जांच  करवाया जाता है जिनमें खून के अंदर इन्फेक्शन तो नहीं,CBC ,अल्ट्रासाउंड,CT SCAN आदि प्रमुख जांचें करवाई जाती हैI

  • अपेंडिक्स के प्रकार(Types of Appendix)-

अपेंडिक्स मुख्यतः दो प्रकार के होते हैंI (1) एक्यूट अपेंडिक्स (2)क्रोनिक अपेंडिक्स 

  •  एक्यूट अपेंडिक्स-  इसमें  अपेंडिक्स की आकर  तेजी से फैलता और बढ़ता है  जिस समय निरोगी इस अपेंडिक्स से ग्रसित हो जाता है तो उसे कब्ज ,उल्टी,जी मचलना  आदि कई प्रकर की परेशानियों का सामना करना पड़ता हैI 
  • क्रोनिक अपेंडिक्स –इस तरह के अपेंडिक्स बहुत कम देखने को मिलते हैं अर्थात इसके रोगी काफी कम पाए जाते हैं कुछ समय बाद स्वता ही समाप्त हो जाता है इनमें पेशाब करते समय दर्द, ठंडा लगना और शरीर कांपना, पेट में गैस और गांव,  बुखार लगना,भूख न लगना आदि लक्षण देखने को मिलती हैI 
  • अपेंडिक्स  रोग होने का मुख्य कारण(cause)-

बाजारू चीज और लापरवाही भरी दिनचर्या के कारण अपेंडिक्स का प्रकोप  अधिक बढ़ा है जिससे हर उम्र के लोग प्रभावित हो रहे हैं I चाहे वह बुजुर्ग, स्त्रियां हों या बच्चेI अपेंडिक्स बढ़ाने में  रसायन युक्त भोजन और ध्रुव के साथ-साथ वायु प्रदूषण का भूमिका है

  • अगर आप किसी  पेट से संबंधित  या फेफड़े से संबंधित किसी रोक से ग्रसित हैं तो अपेंडिक्स  होने का चांस अधिक रहता हैI 
  •  इसके अलावा अगर लंबे समय तक कब्ज, खांसी हो तो अपेंडिक्स का कर्क बन सकता हैI 
  •  पेट में  पलने वाला  परजीवी(Parasite) और आंतों के अन्य समस्या से अपेंडिक्स हो सकता हैI 
  •    रेशेदारयुक्त  भोजन ना करना
  •  बाजारु और रिफाइनयुक्त खाद्य  पदार्थों का अधिक मात्रा में सेवन इनफेक्शन होने का डर रहता हैI
  • अपेंडिक्स का घरेलू उपचार-

अपेंडिक्स  एक बीमारी ऐसी है जिसमें अधिकांश था सर्जरी करवानी पड़ती है यह उस अंग को बाहर निकलवा दिया जाता है परंतु सही खान-पान और सही देखभाल से इस रोग को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है इसलिए सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए इस बीमारी से निजात पाने के लिए नीचे दिए गए इन बातों को हमेशा अपने दिनचर्या में शामिल करें

  • इसके मरीजों को खानपान में काफी विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है ,हमेशा रेशेदारयुक्त भोजन और घर का खाना  जिनमें रसायन की मात्रा काफी कम हो वैसी भोजन हमेशा करनी चाहिएI
  •  प्रदूषण से बचें ,धूल ,धुंए के संपर्क से हमेशा दूर रहने को  कोशिश करें क्योंकि प्रदूषण ना सिर्फ फेफड़े बल्कि हमारे आँतों और पेंटो को अत्यधिक हानि पहुंचाते हैं जिसके कारण अपेंडिक्स भी हो सकता हैI  
  •  अपेंडिक्स में रोज नमक मिलाकर छाछ पीना फायदेमंद होता हैI 
  •  डेयरी  प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल न करेंI 
  •  खाना धीरे-धीरे चबाकर खाएं
  •  ताजे फल और हरी पत्तेदार सब्जियां अधिक मात्रा में शामिल करेंI 
  • एलर्जी से बचने की कोशिश करेंI 
  •   अदरक अपेंडिक्स में दर्द और सूजन को दूर करने में उपयोगी है इसलिए उसका इस्तेमाल चाय और अन्य तरीके से  अपने आहार में उपयोग जरूर करेंI 
  •  पुदीना तुलसी का पत्ता और शहर का उपयोग निरंतर करना चाहिएI  विटामिन बी के साथ अन्य मिनरल्स होते हैं जो की छाती में जकड़न खास ही आदि की समस्या को दूर करने में काफी उपयोगी साबित होते हैंI 
  •  इसके अलावा द्वारा बताई गई दवाइयों का नियमित रूप से लेंI 
  •  हल्का व्यायाम और योगा अवश्य करेंI 
  • नोट -इस लेख में उपरोक्त लिखी गई बातें अर्थात चिक्तिसकीय आलेख लोगों की  स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने बीमारी के बारे में अवगत कराने के लिए हैI  जो इलाज की पुष्टि नहीं करता हैI इसलिए उपरोक्त लिखी गए लक्षण होने पर से संपर्क करें और नियमित रूप से इलाज करवाएंI