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केराटोकेनस (keratoconus) Symptom-लक्षण-cause-treatment-उपचार

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  • केराटोकेनस (keratoconus)

दुनिया भर में आंखों के बीमारियां तेजी से पांव पसार रही है रतौंधी ,मोतियाबिंद , ग्लूकोमा जैसे रोग तो आंखों का प्रचलित रोग  में शुमार है, परंतु उससे भी गंभीर बीमारी है एक जिसका नाम केराटॉकोनस है I जो एक दुर्लभ नेत्र विकार है, कॉर्निया जो हमारे आँखों के दृष्टि का मुख्य भूमिका निभाता है,केरेटोकोनस एक ऐसी बिमारी है जिसमे कॉर्निया के गुम्बदाकार को बदलकर कोणीय रूप में परिवर्तित कर देता है जिसके कारण व्यक्ति दृष्टिहीनता का  सामना तो नहीं करना पड़ता है परंतु उसकी नजर को धुंधला और खराब कर देता है I इसका मुख्य कारण क्या है इसके बारे में डॉक्टर का अलग-अलग अनुमान और संभावना बताते हैं जैसे की एलर्जी ,आनुवांशिकता ,चोट की वजह ,गंभीर बिमारियों की वजह से हो सकता है परन्तु इसका सटीक कारण पर अभी भी शोध चल रहा हैI यह एक खतरनाक बीमारी है जिसके बारे में अधिक जानकारी प्राप्त कर सावधानी  बरतने की जरुरत हैI यह कभी भी और किसी भी मौसम में होने वाली बीमारियों में से एक है जिसमें 10 साल से लेकर 40 साल तक के लोग अधिक ग्रसित होते हैं इसलिए इसके कुछ लक्षणों को जानकर कुछ आसान तरिके और नियमित आँखों का जाँच करा कर यथाशीघ्र इलाज की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए क्योंकि इस बीमारी को जितनी जल्दी पकड़ में आये उसका इलाज उतना ही तेजी से कारगर साबित होंगेI

  • केराटोकोनस(KERATOCONUS)रोग उत्पन्न कैसे होता है ?

 केराटोकोनस  एक लैटिन भाषा है  जिसमें केरेटिन का अर्थ है  =कॉर्निया तथा कोनोस का अर्थ है  =गोलाकार I कॉर्निया आंखों के बिल्कुल सामने एक खिड़की नुमा और घुमावदार संरचना होती है I  कॉर्निया के कारण ही हमारी आंख में किसी भी वस्तु का तस्वीर बनती है जिसके फलस्वरूप हम पारदर्शी रूप से उसे देखते हैंI कॉर्निया जब  इस प्रकार के बनाए रखने लायक शक्तिशाली नहीं हो पाती ,उसका आगे का भाग में शंकु(CONE) का आकार का हो जाता है जिससे आंखों में पारदर्शिता की कमी आती है अर्थात हमें धुंधला नजर दिखाई देता है इस रोग को ही केराटोकोनस कहा जाता हैI  यह बहुत ही दुर्लभ नेत्र विकार  है जो हमारे दोनों आंखों को पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त कर देता है परंतु इसकी विशेषता यह है कि यह पहले एक आँख से  उत्पन्न होता है और उसके बाद दोनों आंखों को प्रभावित करता हैI इस स्थिति में आँख के आगे का रंगहीन ऊतक बाहर की और उभर आता है I जो आँखों की रौशनी का बाधा बनता है I 

कॉर्निया कोलोजेन नामक प्रोटीन बंडलों से बनी होती है जो आपस में रासायनिक रूप से जुड़े होते हैं जिसके हमारी कॉर्निया का आकर स्थित रहता हैI और जब केराटोकोनॉस होता है तो कोलेजन तंतुओं के बीच का जुड़ाव कम हो जाता हैI 

  • केराटोकोनस रोग होने के कारण (CAUSE )-

केराटोकोनस क्यों होता है इसकी ठोस जानकारी अभी भी अज्ञात है हालांकि ,डॉक्टरों द्वारा अनुमानित यह एलर्जी के कारण भी हो सकता है चोट लगने , अनुवांशिक भी हो सकता है या पौष्टिक आहार की कमी भी  कुछ हद तक इस रोग को प्रभावित करता हैI

  • केराटोकोनस रोग में दिखने वाली  प्रमुख लक्षण – 

केराटोकोनस के लक्षण अधिकांशत: किशोरावस्था में  दिखाई पड़ती हैI यह बीमारी धीरे- धीरे प्रभाव छोड़ती है जिसके कारण शुरुआत में लोगो एक साधारण बीमारी की तरह इसका भी आभास नहीं होता परंतु कभी-कभी कुछ मामलों में यह तेजी से भी बढ़ती देखि गयी है I इन लक्षणों को जितनी जल्दी पकड़ा जा सके उतना ही कारगर इलाज तेजी से संभव है I 

  • आपकी नजर में अचानक बदलाव आ जाना
  •  वस्तु आड़ी तिरछी और  धुंधली दिखाई देना 
  • दिखाई देना बंद हो जाना
  •  एक आंख से देखने पर दो वस्तु दिखाई देना
  •  तेज रोशनी के चारों ओर अतिरेक प्रकाश नजर आना 
  •  पास और दूर की वस्तुएँ भी धुंधली के साथ साथ विकृत दिखना 
  • नजर तेजी से कम होने लगना 
  • केराटोकोनस की जाँच-

केराटोकोनस की जांच करने के लिए  डॉक्टर कॉर्निया का माप करते हैं जो की कॉर्नियल टोपोग्राफी नामक आधुनिक तकनीक उपकरण  की मदद से की जाती है

केराटोकोनॉस की शुरुआत अवस्था में चश्मे के मदद से  नजर में सुधार किया जाता हैIचश्मे के लेंस में एक बेलनाकार नंबर होता है जो केराटोकोनॉस के साथ -साथ बढ़ता जाता हैI

  • इलाज की प्रक्रिया –

 केराटोकोनॉस की इलाज चिकित्सक दो बातों के आधार पर करते हैंI

पहले डॉक्टर द्वारा किसी  तरीके से कार्निया के पतले होने से रोकने की कोशिश  की जाती है, क्योंकि जब एक बार कॉर्निया को पतले होने से रोक दिया जाय तो रिफ्रेक्टिव दोष को ठीक करके नजर में सुधार किया जा सकता हैI इसके लिए डॉक्टर रेफ्रेक्टिव उपचार हेतु रिजिड गैस परमिएबिल ,कॉन्टैक्ट लेंस ,फेकिक आईओएल के साथ -साथ नजर का चश्मा दी जाती हैI इन उपचार प्रक्रियाओं का फैसला नेत्र विशेषज्ञ द्वारा रोगी की आंखों की जाँच के बाद की जाती हैI  अगर दूसरी आधार की बात की जाय तो कॉर्निया अगर पतली हो गयी हो तो कोलेजन क्रॉसलिंकिंग द्वारा कॉर्निया को मजबूत की जाती है I यह एक थेरेपी है जिससे कॉर्निया के सरंचना को मजबूत करके कॉर्निया क पतले हो जाने से रोकता है I 

कोलेजन क्रॉसलिंग के दौरान कॉर्निया की ऊपरी परत को हटा दी जाती हैI इस इलाज में कॉन्टैक्ट लेंस कठोर गैस परमिएबिल लेंस केराटोकोनॉस की प्रारम्भिक अवस्था में अधिक सहायक साबित होते हैंI अगर किसी बच्चे को 15 साल के ऊपर या उससे कम के  अवस्था में ही आँखों का विकार उत्पन्न हो तो खासकर नजर सबंधी तो नेत्र विशेषज्ञसे तुरंत जांच करवाएं वरना केराटोकोनॉस रोग के चपेट में आ सकते हैं I 

  • नोट-उपरोक्त दी हुई जानकारी अलग- अलग नेत्र रोग विशेषज्ञ के बातचीत और साक्षात्कार के आधार पर लिखा गया हैI हमारा उद्देश्य सिर्फ अपने पाठकों को स्वास्थ्य के प्रति जानकारियां से अवगत कराकर जागरूक करने से है ,हम किसी भी प्रकार के इलाज  की पूर्ण रूप से पुष्टि नहीं करते हैं , इसलिए बिना डॉक्टर के परामर्श लिए स्वयं चिकित्सा प्रारम्भ न करेंI