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ट्यूबरक्लोसिस (टीबी) / Tuberculosis T.B Symptom लक्षण Cause & Treatment उपचार

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  • ट्यूबरक्लोसिस (टीबी)/ Tuberculosis T.B 

टीबी एक प्रकार की बीमारी है यानी संक्रमण से होने वाली बीमारी, यह वाकई में बहुत तेजी से फैलने के साथ -साथ जानलेवा साबित हो रहा है I ट्यूबरक्लोसिस के करीब विश्व भर में 55% रोगी है जो ग्रस्त है परंतु आपको यह बात जानकर ज्यादा हैरानी होगी कि उनमें से सबसे अधिक रोगियों की संख्या भारत में है और यह  सिर्फ और सिर्फ स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता कम और जानकारी ना होने की वजह से अधिक लोग इस बीमारी का शिकार हो जाते हैंI आइए उसके बारे में विस्तृत में जानना ही नहीं बल्कि अपने व्यवहार में अमल करना और परिवार, आस-पड़ोस और सभी लोगों में जानकारी देकर स्वच्छ राष्ट्र और स्वस्थ राष्ट्र निर्माण में अपनी भागीदारी पुष्टि करें I

  • ट्यूबरक्लोसिस kya hai –ट्यूबरक्लोसिस को टीबी , और यक्ष्मा भी कहा जाता हैI यह तेजी से फैलने वाली एक संक्रामक बीमारी हैI यह  ट्यूबरक्लोसिस माइकोबैक्टेरियम ट्यूबरकलोसिस नामक जीवाणु के कारण होता है,जो काफी घातक हI टीबी  कुपोषण के शिकार व्यक्तियों का ज्यादा निशाना बनाता है या यूं कहें कि जितने भी टीबी से पीड़ित व्यक्ति होते हैं उनमें सबसे ज्यादा उचित भोज्य खाद्य  पदार्थ से वंचित के कारण कुपोषण के कमी से ग्रसित होकर व्यक्ति ज्यादा के ज्यादा टीबी का शिकार हो जाते हैं I कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्तियों में सबसे अधिक होता है संक्रामक का अर्थ जैसे पता है कि यह सबसे अधिक एक -दूसरे से संपर्क में आने पर फैलता है जैसे कि किसी को कोई रोग हुआ हो  और आप उनके संपर्क में रहते हैं उसके साथ रहने उसके वस्त्र, भोज्य पदार्थ इस्तेमाल करने से भी अधिक फैलता है वैसे तो इसकी बैक्टीरिया बहुत सारे रोगों में अधिक पाए जाते हैं टीबी को माइक्रो बैक्टीरिया चलाते हैं जो सीधे सबसे अधिक हमारे शरीर के फैसले को प्रवाहित करते हैं इसके अलावा हमारे शरीर के संपूर्ण भाग में इनका सीधा असर देखने को मिलता है दुनिया में तेजी से टीबी  से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है I  एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में टीबी  के कारण होने वाली मौतों में सबसे ज्यादा भारत में होता है देश में टीबी के मरीजों की संख्या को जो पूरे विश्व में 90,00000 से अधिक लोग  पीड़ित है जिनमें से भारत में लगभग 30,00000 से अधिक लोग इस बीमारी से प्रभावित है I  इस प्रकार के बैक्ट्रिया दूषित स्थानों और वातावरण में अधिक पाया जाता है इसके साथ ही का दूषित पानी और खान-पान  दूषित खाद्य पदार्थ से यह जीवाणु हमारे शरीर में प्रवेश कर जाता है धूल, मिट्टी की कण के साथ हमारे फेफड़े में जाते हैं वहां इन्फेक्शन कर देते हैं I
  • टीबी होने के प्रमुख कारण-

टीबी  मुख्य रूप से ट्यूबरक्लोसिस माइक्रो बैक्टीरियम नामक बैक्टीरिया के कारण होता हैI  इससे प्रभावित व्यक्ति के के संपर्क में आने से यह और फैलता हैI  दूसरे व्यक्ति को भी होने की संभावना अधिक हो जाती है करीब से करीब 50% रोगियों की मौत टीबी के सुचारू रूप से ,नियमित रुप से स्वास्थ्य के प्रति लापरवाहियां बरतने से होता है प्रदूषण टीबी को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है टीबी  के बैक्टीरिया शरीर के जिस अंग में होता है उसको पूरी तरह से नष्ट कर देता है जिससे उस अंग का कार्य प्रभावित होता है I अगर फेफड़ों के अलावा किसी और अंग के टीबी से ग्रसित व्यक्ति हैं तो यह संक्रामक तरीके से नहीं फैलती है लेकिन यह अधिकांशत : फेफड़ों  का ही टीबी होता है लेकिन यह फेफड़ों से रक्त प्रवाह के साथ शरीर के अन्य भागों में फ़ैल सकता है और उसको विकृत कर देता है I जब भी इस रोग से पीड़ित व्यक्ति खुले और सार्वजनिक स्थलों पर खांसता है तो उनसे संपर्क में आने वाले व्यक्ति को भी  रोग पकड़ लेती है इसके अलावा अधिकतर शराब ,ध्रूमपान के सेवन से ,विटामिन और पौष्टिक आहार की पर्याप्त मात्रा में सेवन न मिलने के कारण होता हैI

 

  • टीबी  के प्रकार –

 

टीबी  मुख्यतः दो प्रकार में बाटा गया है –

           ( 1)लेटेंट टीबी( 2) सक्रिय टीबी  

लेटेंट टीबी –इसमें बैक्टीरिया   शरीर में मौजूद होता है परंतु व्यक्ति के शरीर के प्रतिरक्षा प्रणाली बैक्टीरिया को सक्रिय नहीं होने देती है इसमें टीवी के लक्षण प्रत्यक्ष रूप से दिखाई नहीं देते और यह   संक्रामक नहीं है अर्थात इसमें ब्रेन,लिंफ नोड्स, गले और शरीर के अन्य अंगों में अन्य प्रकार के ट्यूबरक्लोसिस के बैक्टीरिया पाए जाते हैं I

सक्रिय टीबी – इस प्रकार की टीबी  में बैक्टीरिया व्यक्ति के शरीर में विकसित होते हैं और उसके लक्षण भी महसूस होते हैं यदि किसी व्यक्ति के फेफड़े में सक्रिय टीवी से संक्रमित हो तो यह बीमारी एक से दूसरे व्यक्ति में आसानी से फैलती है इसका कारण जब किसी की मिलिट्री इम्यूनिटी कम हो जाती है या कुपोषण का शिकार है या  प्रदूषित वातावरण में रहता है उससे यह ज्यादा फैलती है और यह सबसे ज्यादा फेफड़ों में होता हैI

  • टीबी  का लक्षण

टीबी  को प्रारंभ में हि ना रोका जाए तो यह जानलेवा साबित हो सकती है इसलिए इसके लक्षण और थोड़ा सा भी दिखाई दे यथाशीघ्र चिकित्सक से संपर्क करनी चाहिएI

  • अगर 2 हफ्ते से अधिक लगातार खांसी और सीने में दर्द हो तो यह टीबी  के दस्तक की पहचान हो सकती हैI
  • खांसी के साथ -साथ उल्टी और मुंह से खून आ जाता है
  • एक नियमित समय पर जैसे ही शाम या रात में हमेशा बुखार आ जाना
  • सर्दी में भी खूब पसीना आना
  • सांस लेने में कठिनाई होना , सांस लेने में सीने में दर्द होना,सांस फूलना
  • वजन लगातार कम होना कमजोरी का आभास होना
  • बलगम में खून आना
  • भूख कम लगना
  • इस रोग से प्रभावित अंगों में छोटी-छोटी गांठ बन जाती है I
  • यह दिमाग और पेट में भी असर करता है अर्थात इसे पेट का टीबी , और ब्रेन की टीबी भी होते हैं जिसमें व्यक्ति की दिमागी संतुलन की जांच होती है
  • इसके अलावा इनमें प्रत्येक अंगों का टीबी  होता है जहाँ और भी अलग प्रकार के लक्षण मिल सकते हैंI
  • टीबी में की जाने वाली  प्रमुख जांच-

टीबी के इलाज लगभग हर स्थानों अस्पतालों और डॉट सेंटर में होता है टीवी का इलाज लंबा चलता है अगर पूरी तरह से इस रोग से ग्रसित हो जाए तो उनको स्वस्थ होने में 2 साल तक का समय आसानी से लग जा सकता हैIइसमें होने वाले प्रमुख जांच छाती का एक्सरे ,बलगम की जांच ,स्क्रीन टेस्ट आईजीएम हिमोग्लोबिन जांच कराकर, सीटी स्कैन जैसे जांच कराक टीबी के लक्षण की पुष्टि की जाती हैI

  • टीबी से बचने की घरेलु उपाय –
  • यह रोग इतनी तेजी से फैलती है उसको देखते हुए  डॉक्टर द्वारा दिए गए सुझाव और दवाइयां को नियमित रूप से लेनी चाहिए
  • कुछ घरेलू तथा आयुर्वेदिक जैसे कि सहजन की पत्तियां उबालकर पीना, कच्चे लहसुन खाली पेट सेवन करना टीबी  के सबसे प्रसिद्ध घरेलू उपाय हैI
  • वैसे समय जब आप बाहर खुली हवा में जाते हो तो छींकते- खांसते समय मुंह पर कपड़ा रखेंI
  • किसी के उपयोग की वस्त्र  , खाद्य पदार्थ घंटे खुले में रखी गई कोई बाहरी चीज का प्रयोग  कतई ना करें
  • भीड़-भाड़ वाले इलाके में अत्याधिक एक दूसरे से बात ना करें हमेशा मुंह ढक कर रखें
  • जो मरीज टीबी  रोग से ग्रसित है उनसे थोड़ी दूरी पर रखी संवाद करें और उनके साथ रहने पर अपने स्वच्छता के प्रति आश्वस्त रहे क्योंकि यह संक्रामक रोग है एक दूसरे के संपर्क में आने से ज्यादा फैलता है तो इसलिए उस मरीज की देखभाल के साथ -साथ अपना देखभाल भी काफी महत्वपूर्ण हैI
  •  बच्चों को बचपन में टीबी  के टीका जरूर लगावें
  • प्रतिरक्षा से बचाव हेतु योग और व्यायाम जरूर करें
  • हमेशा खनिज युक्त हरी सब्जियां जरूर सेवन करें जैसे कि टमाटर ,पालक गाजर ,मूली आदि उनमें से प्रमुख है
  • जंक फूड और चिकनी पदार्थ काफी कम मात्रा में सेवन करें
  • हमेशा स्वच्छ और ताजा फलों  और पौष्टिक आहार अवश्य लें जिससे कुपोषण का सामना ना करना पड़ेI
  • नोट – यह  चिकित्सक और स्वास्थ्य विशेषज्ञों से ली गई जानकारी पर आधारीत  उपरोक्त लिखी गई बातें हैं जो इस गंभीर बीमारी को देखते हुए औसत हैIहमारा मकसद आप को जागरूक कर सचेत करना है  ताकि इन लक्षणों में से कोई भी थोड़ा सा भी दिखाई दे तो यथाशीघ्र चिकित्सक से संपर्क कर उनके द्वारा बताई गई नियमों का पालन अवश्य करें I