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थायरॉइड ( THYROID ) Symptom लक्षण Cause & Treatment उपचार

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  •        थायरॉइड ( THYROID ) विगत कुछ वर्षों से थायरॉइड से पीड़ित रोगियों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है पुरुषों के अपेक्षा महिलाओं में यह समस्या 10 गुना होता है करीब भारत में तो हर तीसरा इंसान थायरॉइड  के कारण मोटापा और हार्मोन असंतुलन से पीड़ित हैI जबकि विश्व में हर दसवां इंसान थायरॉइड  से पीड़ित है ,इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं की यह छोटे कदमों के साथ दस्तक देकर हमारे शरीर के अंगों को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचाता है खासकर महिलाओं के अधिकतम रोगों का उतपन्न होने का कारण थायरॉइड ही  हैI

(THYROID)  थायरॉइड  kya hai – यह एक ग्रंथि  है जो हमारे गले में पाई जाती है यह ग्रंथि विभिन्न तरह के हारमोंस का निर्माण करती है  जो रक्तनलिकाओं से शरीर के विभिन्न अंगों तक पहुंचती हुई उसके कार्य को संपादित करना है I यह हार्मोनस  T-3 और T-4 को रिलीज भी करता हैI यह तितलीनुमा आकार का होता है कई बार विभिन्न कारणों से थायरॉइड ग्रंथि सही से काम नहीं कर पाती उससे निकलने वाले हार्मोन की मात्रा असंतुलित अवस्था में अर्थात कमियां अधिक हो जाती है जिसके कारण हमारे शरीर से जुड़े विभिन्न अंग कार्य सही और सुचारू रूप से नहीं कर पाते जिसका सीधा असर हमारे स्वास्थ्य पर पड़ता है यह मुख्य रूप से मस्तिष्क,वजन ,आँख ,दिमाग ,पाचन-तंत्र सुरक्षा और बाल आदि के कार्यों को सीधा संपादित संबंध रखता है इसके अलावा भी यह शरीर के कई कार्यो में अहम भूमिका निभाता है I

  •  थायरॉइड  का लक्षण-

थायरॉइड की गड़बड़ी से विभिन्न प्रकार के परेशानियां का सामना करना पड़ता है I  

  • हड्डियां कमजोर होने लगती है
  • भूख कम लगना या खाने की इच्छा ही ना होना
  • वजन घटना  या बढ़ना
  • थोड़ी सी गर्मी को  झेल न पाना, पसीना अधिक आना
  • ठीक से नींद नहीं आना अर्थात अनिद्रा के साथ -साथ आंखों में थोड़ी सूजन और जलन होना
  • गले में दर्द ,सूजन और हमेशा भारीपन महसूस होता है
  • हाथ कांपना और घबराहट होना
  • दिल  तेजी से धड़कना , दिल की धड़कन कम हो जाना
  • याददाश्त कमजोर हो जाना, चिंता होना
  • थकान चिड़चिड़ापन और सर में दर्द रहना
  • महिलाओं में अनियमित मासिक चक्र और बालों में रूखापन होना
  • हाथों और पांव में शरीर के अन्य भाग में में सूजन होना
  • ब्रेस्ट से दूध का रिसाव होना
  • और घेंघा रोग के लक्षण भी दिखाई देती हैI
  • उपरोक्त  लिखी गई बातों से यह जगजाहिर होती है और आप समझ रहे होंगे की थायरॉइड  का नियमित जांच कराना और चिकित्सक के परामर्श को ईमानदारी से पालन करना अति आवश्यक है इनमें से कोई भी लक्षण हो तो चिकित्सक से यथाशीघ्र संपर्क करनी चाहिए I
  • थायरॉइड  के प्रकार-

थायराइड रोग मुख्यत : दो प्रकार के होते हैं

(1)हाइपोथारॉइडिज्म  (2) हाइपरथायरॉइडिज्म

हाइपोथारॉइडिज्म-हाइपो का अर्थ होता है   अपेक्षा अनुरूप से कम इसमें  थायरॉइड की प्रक्रिया कम हो जाती है अर्थात T 3 और T 4 हार्मोन कम मात्रा में निकलते हैं और TSH का लेवल बढ़ जाता  जो हमारे ग्रंथि को पूर्ण रूप से प्रभावित करती है अर्थात हाइपो थायराइड अधिकांश थायराइड के रोगियों में होता हैI यह आयोडीन  की मात्रा में कमी ,चिंता-तनाव आदि इसके प्रमुख कारण हैIयह महिलाओं में अधिकांशत: होता है I

हाइपरथायरॉइडिज्म – इसमें T-3 और T-4 नामक हार्मोन बढ़ जाते हैं और TSH का लेवल बढ़ जाता है I इसमें हारमोंस अधिक रिलीज होते हैं अगर वजन बढ़ जाए ,भूख कम लगे ,हाथ पैर में सूजन हो ,यादाश्त की कमी  आदि इसके मुख्य लक्षण हैI

  • थायरॉइड  के पता लगाने लिए की जाने वाली जांच –

इसके लक्षण को जानने हेतु खून की जांच होती है,T3 और  T4 और TSH LEVEL की मुख्यत :जांच की जाती है Iइसके साथ -साथकई बार एन्टीटीपीओबॉडी करानी पड़ती है I

  • थायरॉइड  के निवारण के लिए इलाज और उसकी प्रक्रिया –

इसमें लीवोथायरोक्सिन नामक  दवाई का सेवन किया जाता है जो अन्य नामों से भी मेडिकल स्टोर में उपलब्ध रहती है इलाज का मुख्य मकसद  होता है कि किसी भी तरह से TSH को नार्मल स्तर तक लाया जाए इसके लिए जो भी दवा दी जाती है वह मुख्य रूप से खाली पेट लेनी होती है दवा को नियमित रूप से लेना  होता है ,जिसमें 1 दिन भी लापरवाही बरतने पर क्षति पहुंच सकता है दवा की प्रक्रिया में सुबह खाली पेट लेने के साथ-साथ उसके आधे घंटे बाद ही आप पानी को छोड़कर आधे घंटे बाद ही आप कुछ खा सकते हैं  और भरपूर मात्रा में भोजन कम से कम 2 घंटे बाद ले सकते हैं I प्रेगनेंसी की प्लानिंग वाली महिला या प्रेग्नेंट महिला को हमेशा थायरॉइड की जांच कराना आवश्यक हो जाता है प्रेग्नेंसी के समय टी एस एच 225( mU /L)से नीचे  रखना आवश्यक होता हैIइसके अलावा रेडिएशन और सर्जरी के द्वारा इन दोनों थायरॉइड  की इलाज की प्रक्रिया संपन्न होती हैI

  • इस बीमारी से बचने के लिए घरेलू उपाय-

अगर हम अपने स्वास्थ्य के प्रति थोड़ी सी जागरूक हो और थोड़ा परहेज करें और सावधानियां बरतें तो इस रोग के दुष्प्रभाव से हमेशा बच कर  स्वस्थ रह सकते हैंI

    • यह अधिकांशत:  महिलाओं में ही देखने को मिलती है तो अगर आपको पहले से ही थायरॉइड  की समस्या है और आप प्रेगनेंसी के लिए प्लान कर रही हैं या प्रेग्नेंट है तो अपनी स्त्री रोग विशेषज्ञ इसके बारे में अवश्य जानकारी दें और उससे जुड़ी सावधानियां और दवाओं के बारे में नियमित रूप से सेवन करें क्योंकि थायरॉइड की गोलियां शरीर को नुकसान कम और फायदा अधिक पहुंचाती है इससे  मोटापा और थकान कंट्रोल होता हैI
    • हमें पूर्ण रूप से ध्रूम-पानबंद कर देनी चाहिए
    • ऐसे स्थल जहां  रसायनिक गैसों का स्राव हो वहां ज्यादातर समय कभी ना बिताएं
    • एयर कंडीशनर, हीटर, रेफ्रिजरेटर आदि जैसे उपकरणों के पास आस -पास में  ना बैठे
    • कंप्यूटर ,सेलफोन, गैजेट्स जैसे आधुनिक उपकरणों पर अधिक देर तक समय न व्यतीत करें कार्य के दौरान हमेशा ब्रेक लेते रहें I
  • नोट -यह जानकारी केवल आपको सचेत और  जागरूकता के लिए है जिसमें आपको इस रोग से परिचित होने के साथ-साथ सावधानियां बरतने  की संदेश देता है ताकि आप स्वस्थ और समृद्ध रहें I  परंतु उपरोक्त लिखी गई किसी प्रकार के लक्षण अगर शरीर में दिखाई पड़े तो तुरंत चिकित्सक  से संपर्क कर सलाह लें I