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पीलिया (Jaundice) Symptom-लक्षण-cause-treatment-उपचार

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  • पीलिया (Jaundice)

 पीलिया यकृत से संबंधित रोग है  ,जब हमारे खून में Billrubin का (पित्तरंजक) मात्रा बढ़ जाता है तब हमारे शरीर के विभिन्न अंगों के साथ -साथ आँख ,त्वचा और पेशाब में पीलापन आना लगता हैI खून के अंदर उपस्थित RBC (लाल रक्त कोशिकाएं)की अपने सक्रीय जीवन काल जो औसतन 120 दिनों के बाद विघटित (DECOMPOSED )होते समय यकृत में एक वर्णक(Pigment) उतपन्न होता जिसे Billubrin कहा जाता है यह पिले रंग का होता हैI यह हमारे शरीर से पित (Bile) में जाकर आँतों से होते हुए उत्सर्जित होकर हमारे शरीर से बाहर आता हैI इस तरिके से  bilrubin का बनना और क्षय होकर बाहर आने की प्रक्रिया संपन्न होता है ,परंतु किसी भी कारणवश जब खून में Billrubin की अधिकता बढ़ जाता है तब यह हमारे शरीर के चारों ओर फ़ैल जाता है जिसके वजह यकृत इसे शरीर के बाहर निकलने में असमर्थ हो जाता है I जिसके कारण  शरीर के विभिन्न अंगों में खून के साथ एकत्रित हो जाती है और  पीलिया (Jaundice) उतपन्न  होता हैI सामन्य रूप से स्वस्थ मनुष्य में  Billrubin की मात्रा 1% या इससे भी कम होता है परंतु जब पीलिया के लक्षण किसी व्यक्ति में होता है इसकी मात्रा बढ़ कर  2.5 प्रतिशत हो जाता हैI  पीलिया को रोग  की जगह पर लक्षण का नाम दिया गया  हैI  पीलिया के कारण शरीर  में कई प्रकार की विकृति उत्पन्न होता है और यह किसी भी उम्र में महिलाओं पुरुषों को प्रभावित कर सकता हैI इसे आईसीटीरस भी कहा जाता हैI पीलिया की वजह से शरीर में खून की कमी होने लगता है और दिल के साथ- साथ पाचन तंत्र,आँखों  को भी प्रभावित करता हैI जिसके कारण हमारे शरीर में बहुत हानि होती है इस रोग में रोगी को पाचन तंत्र सुचारू रूप से काम नहीं करने की वजह से  भूख की इच्छा नहीं हो पाती हैIयह कोई गंभीर तो नहीं पर नवजात शिशु में इसके लक्षण हो तो अन्य गंभीर बिमारीयों का जन्म दे सकता है I  

  • पीलिया रोग का कारण-

 पीलिया  अपने -आप में कोई  रोग नहीं है बल्कि लक्षण हैI यह अनेक प्रकार के रोगों से  भी उतपन्न हो सकता हैI 

  •  यह मुख्यत: हेपेटाइटिस  वायरस के कारण होता है,इसमें यकृत में सूजन आ जाती है I  
  •  पित्त की नली के ब्लॉक होने से भी पीलिया होता है I 
  • यह डेंगू,टाइफाइड ,मलेरिया की वजह से भी हो सकता है 
  • अधिक ध्रूमपान और शराब के सेवन करने से 
  • कुछ अन्य बिमारी  जैसे की टीबी,मिर्गी  के अनियमित दवाइयां लेने से होती है I 
  • हमारे दूषित खान-पान की वजह से अगर हम वैसे स्थल पर भोजन करते हैं जहाँ मक्खियाँ की उपस्थति हो उस प्रकार के भोजन को सेवन करने से पीलिया अवश्य होता हैI 
  • एक ही सूई(needle )से किसी दो व्यक्ति उपचार करने से  अर्थात खून के आदान -प्रदान से भी पीलिया रोग होता है I  
  • अलग -अलग लोगों के साथ यौन सबंध बनाने से 
  • किसी स्थिति में RBC के बढ़ जाने सेI 
  •  पीलिया रोग में दिखी जाने वाली प्रमुख लक्षण –
  • इसमें भूख कम लगती है
  • हमारे शरीर के ऊपरी हिस्सों पर पीलापन देखने को मिलता है 
  • हमारे आँखों के सफ़ेद भाग में पीलापन आ जाता है 
  • हमारे मूत्र,नाख़ून और त्वचा में भी पीला रंग को देखने को मिलता है 
  • मल्ल-त्याग आसानी से नहीं होना और मल्ल (लैट्रिन) में सफेदी आना 
  • शरीर में थकावट महसूस होना 
  • खुजली और चर्म सबंधित लक्षण उतपन्न होना 
  • जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द रहना 
  • पेट के ऊपरी हिस्से में दायीं तरफ दर्द का आभास होना 
  • उल्टि ,दस्त और जी मचलना 
  • सिर में हमेशा दर्द रहना 
  • कब्ज और बुखार होना I 
  • इस रोग में की जाने वाली प्रमुख जांच –

इसमें विभिन्न जांचों  के माध्यम से डॉक्टर यह जानने का प्रयास करते हैं की खून कहाँ से और कैसा आ रहा हैI कई बार कफ की जाँच कर  भी खून आने के कारणों का पता लगया जाता है I जैसे की सीबीसी जांच जिससे हमारे हीमोग्लोबिन के लेवल(level) का पता चलता हैI यूरिन की जाँच ,अल्ट्रासॉउन्ड,LFT (LIVER FUNCTION TEST)जिससे लिवर के पूरी प्रक्रिया के साथ -साथ CERIUM BILLRUBIN  का LEVEL भी देखी जाती हैI 

  • पीलिया  के लिए उपचार और घरेलु उपाय –

वैसे तो पीलिया कोई खतरनाक बीमारी के श्रेणी  में नहीं आता है जिससे लोगों की जान-माल की अत्याधिक नुकसान हो परंतु  डॉक्टर के द्वारा बताये गए सलाह को ईमानदारी-पूर्वक पालन नहीं करने पर जरा भी सावधानी में चूक हुई तो jaundice जानलेवा बन सकता है,इसलिए बेहद जरूरी है की नियमित रूप से डॉक्टर के संपर्क में रहे और उनके द्वारा बताई गयी जांच ,खान -पान और दिनचर्या का पालन करेंI पीलिया में रोगी के खान-पान पर विशेष ध्यान दी जाती है क्यूंकि इस रोग का सीधा सबंध यकृत (liver)से जुड़ा हुआ हैI

  • पानी अधिक से अधिक मात्रा में पियें
  • ताजे और  मौसमी फलों का जूस पियें 
  • हमेशा प्रोटीनयुक्त  और कार्बोज वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करें
  • अत्याधिक वसायुक्त भोजन आने आहार में शामिल न करें
  • शहद और मौसमी फलों  के अलावा पके पपीता,गाजर ,मूली ,चुकंदर , शकरकंद अवश्य लें
  • सलाद और सब्जियों में सभी तरह के हरी सब्जी के अलावा टमाटर ,आलू ,गोभी भी खा सकते हैंI
  • हमेशा योग और व्यायाम करें 
  • लागातर जांच कराये और नियमित रूप से दवाईयां लें 
  • हमेशा ताज़ी और स्वच्छ भोजन करें
  • अपने कमरे और बिस्तर के साथ -साथ अगल -बगल हमेशा साफ सफाई रखें I 
  • नोट-उपरोक्त दी हुई जानकारी डॉक्टर के बातचीत और अध्ययन के आधार पर लिखा गया हैI हमारा उद्देश्य सिर्फ अपने पाठकों को स्वास्थ्य के प्रति जानकारियां से अवगत कराकर जागरूक करने से है ,हम किसी भी प्रकार के इलाज  की पूर्ण रूप से पुष्टि नहीं करते हैं , इसलिए बिना डॉक्टर के परामर्श लिए स्वयं चिकित्सा प्रारम्भ न करेंI