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फाइलेरिया (Filariasis)(हाथी पाँव) के Symptom-लक्षण-cause-treatment-उपचार

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  • फाइलेरिया (Filariasis)(हाथी पाँव)

फ़ाइलेरिया को आम बोल -चाल की भाषा में हाथी पाँव भी  कहा जाता हैI विश्व स्वास्थ्य संगठन के रिपोर्ट के मुताबिक करीब 70 करोड़ भारतीय इस रोग के प्रभावित हो रहे हैं फाइलेरिया दुनिया की दूसरे नंबर की सबसे खतरनाक बीमारी हैI  इस रोग के प्रभाव से एक या दोनों पैर सूजकर हाथी के पैर जैसे हो जातें हैंI इससे व्यक्ति विकलांग भी हो जाता है यह काफी गंभीर बिमारी है इसके प्रभाव तुरंत देखने को नहीं मिलता हैI उष्णकटिबंधीय प्रदेशों में अर्थात जहां जल और वर्षा अधिक होते हैं वैसे जगह फ़ाइलेरिया होने की संभावना अधिक  बना रहता हैI फाइलेरिया के कारण व्यक्ति को मृत्यु तो नहीं होता परंतु मृत्यु के सामान्य हीं शरीर को अपंग बना देता है व्यक्ति कोई भी दिनचर्या का क्रियाकलाप सुचारू रूप से नहीं कर पाता हैI फाइलेरिया का असर एकाएक शरीर में देखने को नहीं मिलता बीमारी जब विस्तृत रूप से फैलने लगती है तब धीरे-धीरे उसके लक्षण शरीर में देखने को मिलते हैं तब तक व्यक्ति फाइलेरिया के प्रारंभिक अवस्था(initial stage) से पार कर जाता हैI उनके अंगों में  सूजन दिखाई देने लगता है।,उन्हें चलने में आकस्मिक परेशानी असंतुलन और अंगों के सहकारशीलता में काफी अभाव देखने को मिलता हैI सही समय पर फाइलेरिया की पहचान कर शुरुआती अवस्था में ही अगर इलाज किया जाए तो काफी असरदायक साबित होता हैI इसलिए यह बेहद जरूरी हो जाता है फाइलेरिया के बारे में अधिक से अधिक जानकर उनके लक्षणों और कारणों से लोग अवगत होंIफाइलेरिया किसी भी उम्र में हो सकता हैI

  • फाइलेरिया क्या है?(what is filarisis?)

फाइलेरिया बीमारी संक्रमित मच्छरों के काटने से फैलता हैIकभी -कभी यह मक्खी के कारण सकता हैI ये फाइलेरिया जो निमेटोड परजीवी कृमि  द्वारा फैलने वाली रोग हैI इसमें मुख्य रूप से तीन निमेटोड बरुगिया मलायी,बुशेरिआ ब्रेनक्राफ्टी और ब्रूगिया कीमोरि फाइलेरिया के लिए जिम्मेदार होते हैंI फाइलेरिया जब  होती है जब कोई मच्छर फाइलेरिया से ग्रसित व्यक्ति को काटता है तब उसके लार्वा मच्छर में सम्मिलित हो जाती है उसके उपरांन्त किसी स्वस्थ व्यक्ति को वह मच्छर काटता है तो स्वस्थ व्यक्ति भी लार्वा से ग्रसित हो जाता हैI लार्वा हमारे शरीर में प्रवेश कर विकसित होते हुए  लसिका ग्रंथि (lymphatic gland) तक चला जाता हैI लार्वा lymphatic systemic में जाने के बाद के बाद कभी-कभी पैर -हाथ और शरीर के अन्य भाग में जाकर जम जाता है जिसके बाद सूजन पैदा करता है यह सूजन निरंतर बढ़ते जाता है और व्यक्ति फाइलेरिया रोग से ग्रसित हो जाता हैI फाइलेरिया के कीड़े रात में अधिक सक्रीय होते हैं अर्थात रात को हीं ये हमें अधिकतर काटते हैंI 

  • फाइलेरिया के मुख्य  कारण(causes)क्या है?

फाइलेरिया मच्छरों और मक्खियों के द्वारा फैलता हैI फाइलेरिया मच्छर के काटने के अलावा उसके वातावरण के संपर्क में आने से भी हो सकता है,अगर मच्छर जहां प्रजनन देते हैं और वह संक्रमित मच्छर हो तो जब व्यक्ति  इस पानी के उपयोग करता है तो भी वह संक्रमित हो सकता हैI उसके पानी के फाईलेरिया के लिए मुख्य रूप से मादा मच्छर क्यूलैक्स फैंटिग्स को जिम्मेदार माना जाता है मच्छर अगर किसी ऐसे व्यक्ति को जो पहले से ही फाइलेरिया से ग्रसित हो उसे काटकर स्वत: संक्रमित हो जाता है उसके बाद किसी भी सामान्य व्यक्ति को काटता है तो फाइलेरिया के विषाणु स्वस्थ व्यक्ति में प्रवेश कर जाता हैI जिन क्षेत्रों में यह रोग मुख्य रूप से फैलता है वहां 50 फ़ीसदी से अधिक लोग माइक्रोफाइलेरिया द्वारा संक्रमित होते हैंI  यह एक साइलेंट किलर प्रकार का बिमारी हैI जिसमें लक्षण काफी बाद में दिखाई देते हैं I इसके अधिकांशत:संक्रमण का पता लगाना काफी मुश्किल होता है अर्थात इसके संक्रमण अज्ञात रहते हैंI   

  • फाइलेरिया के मुख्य लक्षण (symptom)क्या है?

फाइलेरिया बिमारी में आमतौर पर होने वाली कोई भी  लक्षण स्पष्ट रूप से दिखाई काफी दिनों बाद देता है

  • फाइलेरिया में बुखार काफी ठण्ड लगती हैI 
  • पीड़ित व्यक्ति को सर्दी,जुकाम का भी शिकायत रहता हैI 
  • अगर व्यक्ति सीरियस कैविटी फाइलेरिया से ग्रसित हो तो निरंतर पेट में भी दर्द राहत हैI 
  • हाथ-पैर ,अंडकोष और शरीर के अन्य अंगों में सूजन और चकते निकलते हैंI 
  • फाइलेरिया से प्रभावित त्वचा ज्यादा मोटी  हो जाती हैI 
  • प्रभावित हिस्सों की त्वचा काली और दाग ,फोड़े भी हो जाते हैंI 
  • फाइलेरिया से  अगर रोगी लंबे समय तक ग्रसित रहे उसके नियमित इलाज ना कराया जाए तो रोगी को मानसिक रूप से विक्षिप्त भी बना सकता है और शारीरिक रूप से विकलांग भी बनाता हैI 
  • फाइलेरिया में की जाने वाली प्रमुख जांच (diganosis or test)- 

फाइलेरिया  एक जटिल बीमारी के रूप में जाना जाता है जिसके लिए अनेक प्रकार के परीक्षण द्वारा कराए जाते हैं

खून की जांच – ग्रसित व्यक्ति की सर्वप्रथम  खून की जांच की जाती है जिससे रक्त  में उपस्थित माइक्रोफाइलेरिया को उपस्थिति का पुष्टि हो सकेI डॉक्टर प्राय:खून का सैंपल अधिकतर रात में लेते हैं क्योंकि शरीर के लिम्फनोट्स में लार्वा को रात में सक्रीय होने के कारण खून के  अंदर रात को अधिक प्रसार करता हैI

Immunodiagnostic test – पीड़ित व्यक्ति के रोग प्रतिरक्षा प्रणाली(immune system) की स्थिति  जानने के लिए इम्यूडायग्नोस्टिक टेस्ट किया जाता हैI 

     इसके अलावा प्लेटलेट्स आदि जांच करने के लिए CBC  की जाँच ,डायबिटीज ,यूरिक एसिड आदि की जांच भी किया जा सकता हैI

  • फाइलेरिया से बचने के लिए  घरेलु उपाय-

 फाइलेरिया में सबसे अधिक जरूरी है अपने आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखें अधिक गंदे जल-जमाव ना रहें जिससे मच्छर ना पनपेंI

  • साफ सफाई का हमेशा ध्यान रखेंI
  •  नियमित रूप से घर का खाना खानपान बनाए रखेंIजिसमें कम वसा और प्रोटीन युक्त आहार का सेवन करेंI
  •  विटामिन सी से जुड़े पदार्थों का सेवन करेंI
  • डॉक्टर से संपर्क कर इलाज समय रहते इलाज करवाएंI
  •  अगर टांगों में सूजन हो रहा हो तो कम करने के लिए प्लास्टिक की पट्टियां बांधेI
  • हमेशा मच्छरदानी का प्रयोग करें और विशेषकर ठण्ड के समय हमेशा फुल बांह का कपड़ा पहन कर सोएंI

 नोट -यह उपरोक्त लेख केवल आपको इस रोग से अवगत कराने के लिए लिखी गयी है जो किसी भी प्रकार की इलाज की  पुष्टि नहीं करती हैIअत :बेहतर इलाज के लिए चिकित्सक से संपर्क कर उनके बताये गए परामर्शों को नियमित रूप से पालन करेंI