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फेफड़े का कैंसर (Lungs Cancer ) Symptom-लक्षण-cause-treatment-उपचार

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  • फेफड़े का कैंसर (Lungs Cancer )

विश्व स्वास्थ्य संगठन  के आंकड़े से यह जाहिर होता है कि दुनिया भर में फेफड़े का कैंसर की बीमारी तेजी से फैल रही हैI यह युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक को अपनी चपेट में ले रहा हैI  डब्ल्यूएचओ के आंकड़े के अनुसार दुनिया भर में 76 लाख से अधिक लोग प्रत्येक साल फेफड़े के कैंसर के शिकार हो रहे हैं , इसका मुख्य कारण ध्रूमपान करना है| विशेषकर सिगरेट पीने से अधिकतम लोग  तेजी से फेफड़े के चपेट में आ रहे हैं| चिकित्सकों के अनुसार मानो तो पहले यह कैंसर केवल पुरुषों में पाया जाता था परंतु इन दिनों यह बीमारी महिलाओं में भी तेजी से फैल गई है जो गंभीर चिंता का विषय है ऐसा नहीं की यह  सिर्फ धूम्रपान करने से फैलता है बल्कि एक अध्ययन और सर्वे के अनुसार पाया गया की लगभग 25 फीसदी ऐसे मरीज थे जो धूम्रपान न करने के बावजूद फेफड़े के कैंसर से पीड़ित थे और उनकी उम्र 50 साल से भी कम थी| यह गंभीर चिंता का विषय है सही मायने में जानकारी प्राप्त कर अगर हम शुरुआत में ही सावधानी बरतें तो इस गंभीर बीमारी के चपेट में आने से हमेशा के लिए बचे रह सकते हैं और लोगों को भी इस बीमारी के प्रति सावधान किया जा सकता है जिससे हमारे देश में स्वस्थ और समृद्धि बने रहे|

  • फेफड़े का कैंसर क्या है?

 कैंसर का  वह प्रकार ,जो फेफड़े को प्रभावित करता है अर्थात कैंसर का विकार फेफड़ों में शुरू होता है|हमारे शरीर में दो फेफड़े होते हैं ,यह छाती के दायीं और बायीं ओर होती है |फेफड़े के कारण ही हमारे शरीर के अंदर खून में ऑक्सीजन का सक्रीय रूप से संचरण होता है और अशुद्ध गैस और कार्बनडाईऑक्साइड को बाहर निकालता है जिससे हमारे स्वस्थ जीवन की प्रक्रिया सुचारु रूप से चलता है|   फेफड़े का कैंसर को साइलेंट किलर भी कहा जाता है किसी कारण हमारे फेफड़ों में असामान्य कोशिकाओं के संख्या में वृद्धि हो जाती है जिससे अंगों में अनेक परिवर्तन हो कर के कोशिकाओं के बढ़ने के कारण फेफड़ों में गाँठनुमा आकृति बनने लगता है तो वह फेफड़ों में कैंसर का रूप ले लेता है |यह मुख्यत : 50 वर्ष के अधिक आयु वाले लोग  इस रोग से ग्रसित होते हैं| यह रोग जानलेवा होने के साथ-साथ इसका इलाज भी बहुत महंगा होता है|

  • फेफड़े का कैंसर कैसे होता है?(मुख्य कारण )-

आज के दौर में समाज और मानव की जीवन शैली में बदलाव होने के कारण,मनमानी ढंग से  जीने की वजह से गंभीर रोगों की संख्या में वृद्धि हो रही है| फेफड़े का कैंसर गंभीर एवं जानलेवा बीमारियों में से एक है| इसका मुख्य कारण वायु प्रदूषण  है, वायु में फैले कार्बन डाइऑक्साइड, सीसा और अन्य रसायनिक तत्व लोगों के फेफड़ों में धीरे -धीरे एक परत बनते है जो बीमारी का कारण बनता है|

  •  सामान्यत:  किसी भी प्रकार के धूम्रपान करने से फेफड़े के कैंसर का मुख्य कारण है सिगरेट और तंबाकू दो ऐसे कारक हैं जो न सिर्फ फेफड़े बल्कि जबड़े अमाशय, आंख और मुद्रा से का कैंसर पैदा कर सकते हैं  धूम्रपान का आशय सिर्फ सिगरेट और गुटका ही नहीं बल्कि किसी भी प्रकार की नशा चाहे वह गांजा ,बीड़ी ,गुटका और अनेक प्रकार की तंबाकू किसी भी रूप में ली जा रही हो कैंसर सही अनेक रोगों को पैदा कर सकती है क्योंकि तंबाकू में 18 जानलेवा रसायन होते हैं जो हमारे शरीर को पूरी तरीके से खोखला कर देता हैI  जिससे मन्युष्य का जीवन नरकीय हो जाता है|
  • किसी भी प्रकार के कारखाना ,औद्योगिक क्षेत्रों में काम करते है तो उसके कारण भी फेफड़े का कैंसर हो सकते हैं क्यूंकि हमारी वातवरण में कारखानों से निकले विषैली रासायनिक गैस की मात्रा मानकों से कई गुना ज्यादा बढ़ जाने के कारण हमारे जलवायु दूषित हो रहे हैं |
  • भोजन -सामग्री के लिए   नए उपकरणों के इस्तेमाल जैसे रेफ्रिजरेटर , मइक्रोओवन  आदि ऐसे उपकरण जिसमें खाद्य पदार्थ रखे जाते हैं तो हमारे भोजन में उन उपकरणों से निकलने वाली रासायनिक गैसों का मिश्रण हमारे भोजन में हो जाता है जिसके बाद उस  भोजन को सेवन करने से भी हमे फेफड़ों का कैंसर हो सकता है |
  • आधुनिक गाड़ियों के अत्याधिक इस्तेमाल से या वैसे जगह पर दैनिक जीवन बिताने से जहाँ हमेशा यातयात का परिचालन हो उससे भी हमे फेफड़ों का कैंसर होने की संभावना बनी रहती है|वाहनों से   निकले विषैली धुंआ और गैस की वजह से हमारे वातवरण तेजी से प्रदूषित हो रहे हैं |
  •  मोबाइल,गैजेट्स आदि  ऐसे अनेक प्रकार के उपकरण जिनसे रेडिएशन तेजी से  फैलता है उसके कारण भी फेफड़े का कैंसर हो सकता है|
  • कई फेफड़ों से सबंधित अन्य बिमारियों की वजह से भी हो सकता है |
  • इस कैंसर का प्रकार –

डॉक्टरों ने मुख्य रूप से कैंसर को दो भागों में विभाजित किया है अर्थात फेफड़े का  कैंसर दो प्रकार के होते हैं-(1)small cell cancer(लघु कोशिका कैंसर) (2)non-samll cancer (गैर लघु-कोशिका कैंसर)

  (1 )लघु कोशिका कैंसर -यह  कैंसर बहुत ही तेजी से शरीर में फैलता है इसमें कोशिकाओं की संख्या कई गुना तेजी से बढ़ता है| 

(2)गैर लघु कोशिका कैंसर –इस कैंसर में कोशिकाएं  बढ़ती तो है परंतु बहुत ही कम संख्या में इस प्रकार के कैंसर में  शुरुआती दौर में पता चल जाए तो यथाशीघ्र स्वस्थ हो सकता हैI 

  • फेफड़ों की कैंसर की कितनी स्टेज होती है?

फेफड़े का  कैंसर को डॉक्टरों द्वारा TNM के आधार पर स्टेजेस की वर्गीकृत किया जाता है I जहाँ T का अर्थ=ट्यूमर  इसमें ट्यूमर की आकृति देखि जाती हैI N का अर्थ=निम्फनोट्स जिसमे ग्रंथियों की अवस्था देखि जाती हैI M का अर्थ=मेटास्टेसिस जिसमें ट्यूमर के शरीर के विभिन्न अंगों में फैला है की नहीं यह पता लगता हैI 

यह मुख्यत: TNM के आधार पर  4 स्टेजेस में विभाजित किया गया हैI 

  • स्टेज-1(ST-1)- इस अवस्था में ट्यूमर फेफड़े के अंदर सिमित दायरे तक ही सिमित रहते हैं यह सबसे शुरुआती स्टेज होता है जिसमें सर्जरी द्वारा उपचार  किया जाता हैI 
  • ST-2-  इन्हें भी सर्जरी से उपचार किया जा सकता हैI 
  • ST-3 – इस अवस्था को  डॉक्टरों ने दो श्रेणी में बांटा  है पहली श्रेणी में ट्यूमर हमारे छाती के बीच वाले ग्रंथि में आ जाता है उसमें कीमोथेरपी के बाद ऑपरेशन किया जाता है और ट्यूमर को निकला जाता हैI 

                                  इसकी दूसरी  श्रेणी की बात की जाए तो फेफड़े के ग्रंथि के दूसरे भाग में आ पहुंचता है इस स्टेज में केवल कीमोथेरपी और रेडियोथेरेपी से उपचार किया  जाता है इसमें रोगी को पूर्ण रूप से स्वस्थ होने की संभावना क्षीण(कम ) हो जाती हैI 

  • ST-4-यह कैंसर की अंतिम अवस्था होता है जिसमें कैंसर छाती से होते हुए पुरे शरीर में फैल जाता है जिसमें रोगी को  कीमोथेरेपी के द्वारा ही उपचार किया जा सकता हैIइस स्टेज में मरीज के ठीक होने की गुंजाइश नहीं होती हैI  
  • फेफड़े के कैंसर का मुख्य लक्षण-

फेफड़े का कैंसर भारत में बहुत अधिक होता है क्योंकि हमारे यहां तंबाकू ,बीड़ी ,सिगरेट खैनी, गुटखा और पान मसाले जैसे नशीली चीजों का लोग बहुत करते हैंI इसके स्क्रीनिंग के दौरान मुख्य लक्षण और बातों पर ध्यान देते हैं जो निम्न है-

  • छाती में दर्द होना 
  • खांसी और अनेक रंग के बलगम आना ,खून आना 
  • फेफड़े में हमेशा कफ का अभास होना
  • सांस फूलना और हांफ आना 
  • शरीर के जोड़ों में दर्द रहना
  • बार -बार गला बैठ जाना 
  • थोड़ी देर चलने पर ही थकान महसूस होना
  • लगातार या कभी -कभी सिर में दर्द महसूस होना 
  • बुखार और ऊर्जाहीन,कमजोरी  महसूस करना 
  • तेजी से वजन काम होना 
  • भूख कम लगनाI 
  •   फेफड़े के कैंसर में किए जाने वाले प्रमुख जांच

फेफड़ों के  कैंसर को पता लगाने के लिए डॉक्टर द्वारा अनेक प्रकार के जांच करवाई जाती हैI इसके जाँच के लिए X-RAY ,ब्रोंकोस्कोप ,खून की जांच ,सिटी स्कैन ,बायोप्सी ,सीने का रेडियोग्राफ  आदि कराई जाती है I 

  • फेफड़े के कैंसर से  बचने का उपाय-

यदि फेफड़ों  किसी प्रकार के समस्या हो और इलाज कराते हुए 4 महीने से अधिक समय बीत चुका हो  तो छाती के एक्सरे जरूर करवाएंI  फेफड़ों के मामले में कोई अच्छे से सर्जन से इलाज करवाएं I निचे दी गयी बातों को अपने दिनचर्या में शामिल कर हमेशा इस खतरनाक बीमरी से  सुरक्षित रह सकते हैंI

  • ध्रूमपान का सेवन कतई न करें 
  • हमेशा शुद्ध भोजन करें जो मौसम के अनुकूल हो 
  • फाइबरयुक्त पात्रों या बर्तन में गर्म भोजन न करें 
  • ताज़ी सब्जियों का सेवन करें 
  • मौसमी फलों का सेवन करें 
  • जहँ ध्रूमपान हो या अधिक कल -कारखानें और वाहनों का अवागमन हो उस स्थल से हमेशा दुरी बनाये रखेंI 
  • बाहर जाते समय हमेशा मुंह और नाक ढँक कर जाएँI 
  • नियमित व्यायाम और योग करें I 
  • नोट- ऊपर दिए गए पूरी जानकारी डॉक्टरों  के बातचीत और किताबों के अध्ययन के आधार पर दी गयी है I जो रोगी को पूर्ण रूप से स्वस्थ और लाभ होने की पुष्टि नही करता है ,हमारा मकसद सिर्फ आपको जागरूक कर अपने स्वास्थ्य के पार्टी सचेत करना है,ताकि आप सपरिवार स्वस्थ और खुशहाल जीवन बिता सकें I 

फेफड़े में जरा भी समस्या आये या ऊपर लिखी गयी   लक्षण होने पर डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें और उनकी परामर्श को ईमानदारी पूर्वक पालन करें I