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महिलाओं में बांझपन(infertility in Women)Symptom-लक्षण-cause-treatment-उपचार

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  • महिलाओं में बांझपन(infertility in Womens) 

गर्भावस्था महिलाओं  के जीवन का सबसे ख़ुशी का क्षण होता हैI हर महिला को मां बनने की सपना होता है परंतु आधुनिक जीवन में महिलाओं के जीवन शैली में आएं कई बदलाव के कारण बांझपन की समस्या अधिक हो गई हैI लोगों का धारणा है कि कई महिला को गर्भाशय  की जन्मजात विकृतियां भी होती है और इस तरह के विकृतियों को लेकर कई महिलाओं को पहले बाँझपन का शिकार होना पड़ता था| लेकिन अब ठीक करने की तकनीक खोज ली गई है इससे महिलाएं मां बन सकती है जो किसी कारणवश नहीं बन पाती थी ,हर महिलाएं में अलग -अलग समस्याएं बांझपन की पायी जाती हैI कुछ महिलाएं में  गर्भाशय छोटा होता है तो कई महिलायें में गर्भाशय होता ही नहीं हैI छोटा गर्भाशयशय होने पर भी महिलाओं को गर्भधारण करने में काफी समस्या होती है उनके गर्भधारण करने के बाद भी बार-बार गर्भपात होने की आशंका बनी रहती हैI यह जानकर तोड़ी हैरानी होगी पर यह सत्य है की गर्भाशय न होने वाली महिलायें की पहचान 14 -15 वर्ष की उम्र में भी हो सकती हैI अगर नियमित इलाज और बांझपन  के बारे में विस्तार से जानकारी हो तो हम इसके कारण और समस्याएं और उसके उपाय को पहले ही जानकर महिलाएं बांझपन की समस्या से काफी हद तक अपने आप को बचा सकती हैंI

  • बाँझपन क्या है और इसके क्या -क्या कारण है ?

आधुनिक समय में बांझपन एक आम समस्या बन गयी है,जिसे निःसंतानता भी कहा जाता हैI बांझपन के  पुरुष और महिलाओं दोनों में अलग -अलग कारण हो सकता हैI महिलाओं में PCOS(POLYCYSTIC OVARY SYNDROME)एक सबसे बड़ा कारण है जो प्रजनन क्षमता की प्रक्रिया में अवरोध पैदा करता हैI यह महिलाओं के हार्मोन मात्रा में असंतुलन पैदा करता है ,इसके असंतुलन के कारण माहवारी(MENSTRUATION) की प्रक्रिया नियमित रूप से नहीं होती जो मां  बनने में अवरोध पैदा करता हैI POI के चपेट में आने से भी निर्धारित उम्र के पहले हीं मोनोपोज के तरफ जाने लग जाती हैंI मोनोपोज का अर्थ है की स्त्री-जीवन की वह अवस्था जब मासिक धर्म (menstruation) को रुके हुए काम से काम 9 -12 महीने से ऊपर हो गए होंI मोनोपोज महिला के जीवन में मासी और तारीख बदलाव ले कर आता हैIमोनोपोज के दौरान सेक्स से रूचि खत्म होने लगती है और उनकी योनि सूख-सी जाती हैIइसके अलावा कॅरियर  बनाने की चक्कर में लोग आजकल देर शादी करने की वजह से बच्चा होने में शारीरिक बदलाव एक बड़ी समस्या बनती जा रही हैIहमारे देश में महिलाओं के प्रजनन के लिए 20 से 30 वर्ष की उम्र काफी बेहतर होती हैI उसके बाद महिला के अण्डों में खराबी आने लगती हैIख़राब अंडो एवं स्पर्म से संतान पैदा करना बहुत ही मुश्किल हैI ऐसा होने पर सबसे पहले दवाओं के माध्यम से अंडो की गुणवत्ता बेहतर करने की कोशिश की जाती हैI 

  •  बाँझपन होने के प्रमुख कारण – 

बाँझपन होने के कई कारण हो सकते  हैं,इसलिए समय पर परीक्षण कराकर सुचारु रूप से नियमित इलाज करवाने की जरूर होती है

  • ट्यूबल इनफर्टिलिटी (TUBAL- INFERTILITY) यह गर्भाशय में सूजन या महिलाओं  में सेक्सुअल इन्फेक्शन के कारण होता है जिसके कारण शुक्राणु अंडे तक पहुंच नहीं पाते हैंI 
  • किसी अन्य रोग में की गयी सर्जरी के वजह से भी बांझपन की समस्या उतपन्न हो सकती हैI 
  • मोटापा और तनाव ,वैसे तो  मोटापा या अधिक वजन हर प्रकार के गंभीर बीमारयों का कारक होता है,परन्तु गर्भधारण में इसकी भूमिका अहम है मोटापा के वजह से हाइपरटेंशन और तनाव पैदा करता है जिससे पुरुष और महिलाओं दोनों को यौन सबंध बनाने की इच्छा नहीं होती हैI 
  • ध्रूमपान और शराब का सेवन करने से नशा हमें  शारीरिक और मानसिक दोनो ही माध्यम से कमजोर बना  देता हैIयह न सिर्फ अवसाद ,चिचिड़ापन पैदा करके डिप्रेशन की और ढकेलता है बल्कि शारीरक सबंध के प्रति रूचि ख़त्म हो जाती हैI 
  • तेल और मसालेयुक्त भोजन  के साथ-साथ अधिक गर्म और डब्बाबंद खाद्य पदार्थ के सेवन अगर नियमित और प्रचुर मात्रा में की जाए तो नपुंसकता भी हो सकती हैI 
  • एंडोमेट्रोसिस(ENDOMETRIOSIS) गर्भाशय से बाहर, गर्भाशय के ऊतकों की असमान्य रूप से वृद्धि होने के कारण  गर्भाशय ,अंडाशय ,अंडकोष और फैलोपीयन ट्यूब पर बुरा प्रभाव पड़ता है ,जिससे शुक्राणुओं का अंडे तक पहुंचने में बाधा उतपन्न होती हैI 
  • कोई गंभीर या लंबी बीमारी से ग्रसित होने के कारण भी महिलाओं में बांझपन की समस्या उतपन्न होती हैI
  • अधिक उम्र में शादी की वजह से पर्याप्त स्वास्थ्य अंडो की कमीI  
  • फैलोपीयन ट्यूब का ब्लॉक हो जानाI 
  • बांझपन में महिलाओं में दिखने वाली प्रमुख लक्षण-
  • अधिक उम्र में गर्भधारण से  शरीर के अंदरूनी भागों में समस्याएँ उतपन्न होनाI 
  •   ऐसे महिलाओं की सम्भोग से इच्छा ख़त्म हो जाती हैI 
  • आत्मविश्वास की कमी होना 
  • उदासी  और चिचिड़ापन 
  • हमेशा सिर और सम्पूर्ण शरीर में दर्द रहनाI 
  • शीघ्रपतन अर्थात सम्भोग करते समय जल्द ही डिस्चार्ज हो जानाI 
  • पीरियड्स का  नियमित समय पर ना आनाI  
  • महिलाओं की बांझपन में की जाने वाली प्रमुख जांचे-

डॉक्टर द्वारा  बाँझपन का सही कारण का पता लगाने के लिए अनेक प्रकार की अलग -अलग तरह की जांच की जाती हैI वर्तमान में छोटे गर्भाशय को बड़ा करने की तकनीक भी विकसित कर ली गयी है जीसके उपरांत  मूल वजहों को जानकर गर्भाशय बड़ा करने के बाद महिला में गर्भ धारण करने की क्षमता विकसित हो जाती हैI 

चिकित्सक द्वारा अल्ट्रासॉउन्ड से गर्भाशय की जांच की जाती है ताकि बिमारी का सही कारण पता चल जाता हैI इसके अलावा सोनोग्राफी ,दूरबीन जाँच ,बायोप्सी ,लैप्रोस्कोपी ,हिस्टेरोस्कोपी  प्रमुख तकनीक जांचें जांचे और उपचार की जाती हैI 

  • बाँझपन से बचने के लिए प्रमुख उपाय
  • स्पाइसी ,ऑयली और  जंक फ़ूड, रेडीमेड बजारु  खाना का सेवन न करें इन खाद्य पदार्थों की सेवन से प्रजनन क्षमता कम होती हैI 
  • शरीक रूप से तंदरुस्त और स्वस्थ रहना अर्थात किसी बीमारी से ग्रसित न रहनाI 
  • अपने उम्र के अनुसार वजन रखना अर्थात मोटापा के चपेट में ना आएं हमेशा शरीरीक क्रियाकलाप अधिक से अधिक करेंI 
  • नियमित व्यायाम और योग करना इससे शारीरिक बदलावों को काफी हद तक रोका जा सकता हैI शुरू से ही महिलाएं अगर योगाभ्यास करती हैं तो बहुत समय तक अपनी प्रजनन क्षमता को बरकरार रख सकती हैंI डॉक्टरों के अनुसार अधिकतर महिलाएं बांझपन के बारे में सोचकर बेहद कम समय में ही तनाव और अवसादग्रसित हो जाती हैंI तनाव कई समस्योओं की जननी है इसलिए योग  के माध्यम से तनाव को दूर कर प्रजनन संबंधी समस्याओं को काम किया जा सकता हैI 
  • संतुलित मात्रा में मौसमी फल और हरी सब्जियों का आहार लेनाI इससे  हमारी हमारी सम्पूर्ण अंग सुचारु रूप से सक्रीय रहते हैंI 
  • नशा और ध्रूमपान बिलकुल भी न करेंI 
  • अनियमित पीरियड्स या शरीर के अन्य  अंगों में विकार उत्पन्न हो तो तुरंत स्त्री विशेषज्ञ से संपर्क करेंI 
  •  नोट-  ऊपरोक्त  लिखी हुई तथ्य और बातें किसी  भी रूप से रोग के इलाज की पुष्टि नहीं करती यह  सिर्फ अपने पाठकों को जागरूक कर स्वस्थ और खुशहाल रखने के मकसद से  लिखा गया है I अगर आपको बाँझपन से जुड़े लक्षण दिखाई देते हैं जो ऊपर लिखी गयी हैं तो बिना चिंता और दबाव के तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और नियमित रूप से दवाईयां लेंI इस बीमारी का इलाज शुरुआती दौर में  पूर्ण रूप से संभव है इसलिए जितना जल्दी उपचार करवाएंगी उतना ही बेहतर परिणाम देखने को मिलेगाI