HomeSerious Diseases

लू(Heat Stroke) Symptom-लक्षण-cause-treatment-उपचार

Like Tweet Pin it Share Share Email

 

  • लू(Heat Stroke) 

गर्मियों में अक्सर अधिक तापमान के  कारण शरीर को लू के चपेट में आने की संभावना बानी रहती है I कुछ  लोग इसे लू को औसत बिमारी समझने का भूल करते हैं पर सच्चाई यह है की इसे जरा भी नजरअंदाज करने पर गंभीर और जानलेवा बन सकता हैI वृक्षों के अंधाधुंध कटाई कर इंसान अपने ही जीवन को खुद से अस्वस्थ बना रहे हैंI पारे की लगातार बढ़ने रहने के कारण हमारे शरीर पर बेहद ही विपरीत असर पड़ता है I गर्मियों में ठन्डे वातावरण से निकलकर प्रचंड धूप के सामना करने से शरीर तापमान का इतना उतार -चढाव सहन नहीं कर पाता हैI यही कारण है की लोग इस मौसम में अधिक बीमार पड़ रहे हैं I ना सिर्फ लू से बल्कि वायरल बुखार ,उल्टियां और दस्त ,टाइफाइड,डिहाइड्रैशन की चपेट में वयस्कों से अधिक बच्चे इन रोगों के चपेट में आ रहे हैं I अगर हम आज से भी प्राकृतिक सरंक्षण के प्रति गंभीरता से न सोचकर पेड़ों के रोपने की बजाय काटेंगे ,पॉलिथीन की अनावश्यक इस्तेमाल करने से नहीं बचेंगे तो हम और हमारी आने वाली पीढ़ियां शायद हीं स्वस्थ और खुशहाल जीवन बिता पाएंगे

  • लू – जब भी मौसम का तापमान करीब 40 डिग्री से 45 डिग्री तक के ऊपर से जाने लगता है तो उसके कारण हमारे शरीर को तापमान में संतुलन बनाये रखने के लिए अतिरिक्त पानी की आवश्यकता होती है,अगर लगातार हम धूप  में चलते रहें या कुछ क्रियाकलाप करते रहें तो हमारा हाइपोथैलमस जो शरीर के तापमान को नियंत्रित करता है तो वहाँ से (हाइपोथैलमस) से शरीर का नियंत्रण ख़त्म हो जाती है या जब व्यक्ति के शरीर में पानी की कमी हो जाती है तब शरीर का तापमान 40 डिग्री तक पहुंच जाती है और जब शरीर का तापमान 37० सेल्सियस से अधिक हो जाता है तब उस अवस्था में हमारा खून गर्म होने  लगता है ,प्रोटीन उबलकर नष्ट हो जाते हैं और मांसपेशियों में कड़कपन के साथ -साथ शरीर में पानी की कमी हो जाती हैIजिस कारण व्यक्ति लू की चपेट में आ जाता है ,लू लगने  से दिमाग में खून का संचरण सुचारु रूप से नहीं हो पाता है जिससे व्यक्ति बेहोशी की अवस्था में या व्यक्ति की जान भी जा सकती है I  उसके मस्तिष्क में गड़बड़ी के साथ कई अन्य मुख्य अंग भी निष्क्रिय हो जाते हैंI जैसे ही तापमान में वृद्धि होती है लू लगने की प्रबल आशंका बना रहता है I लू अक्सर मार्च से जून की बीच चलती है I लू को घरेलु बोल-चाल की भाषा में ऊष्माघात भी कहा जाता हैI
  • लू लगने का  मुख्य कारण

गर्मियों में राहत पाने के लिए लोग कूलर ,पंखा ,A.C आदि आधुनिक उपकरणों का उपयोग कर घर या ऑफिस में भले ही हम तापमान ठंडा कर लें परन्तु बाहर की तापमान में इन उपकरणों के कारण  और भी वृद्धि हो जाता हैI बाहर तापमान अधिक होने के कारण जो टेम्परेचर आल्ट्रेशन हमें बीमार कर देता है

  • पानी काम पिने  हमेशा लू की चपेट में आने की आशंका बनी रहती है I 
  • गर्मियों में ज्यादा दुकानों की डब्बा बंद भोजन ,मसालेदार भोजन ,जंक फ़ूड ,स्पाइसी फ़ूड खाने से I 
  • बिना सिर को  ढंके हुए गर्मियों में यात्रा करने से क्यूंकि उससे  धूप का सीधा असर हमारे शरीर पर पड़ती हैI 
  • ज्यादा देर तक गर्मी और धूप में समय व्यतीत करने से I 
  • अचानक ठंडे वातावरण से गर्म में और गर्म से ठंडे वातावरण में जाने सेI 
  • शरीर में पानी और नमक की कमी होने परI 
  • काले और भरी भरकम कपडे पहनना I 
  • लंबे समय तक गर्मी में रहने से ,अत्यधिक पसीना के साथ -साथ मूत्र और लार के रूप में तरल पदार्थ और इलेक्ट्रोलाइट्स का काफी नुकसान हो जाता है जिससे डिहाइड्रेशन होने की खतरा बढ़ जाता है I 
  • शराब  का सेवन  और ध्रूमपान करने से I 
  • बवासीर ,हाई बी.पी ,हृदयरोग के उपचार में इस्तेमाल में आने वाली दवा के सेवन करने से I 
  • लू के प्रमुख लक्षण –

जब लू लगता है तो रोगी का जीवन पूरी तरीके से अस्त -पस्त हो जाता है ,लू से ग्रसित रोगी अपना सामान्य रूप से नित्य -कर्म भी नहीं पाता है I इस मौसम में अधिक सावधानी बरतने की जरुरत हैI

    •  सिर में तेज दर्द के साथ- साथ भारीपन महसूस होना 
  • अचानक शरीर  तापमान बढ़ जाना 
    • दिल की धड़कन तेज होना
  • चक्कर आना ,आँखों में जलन होना 
  • गर्मी में भी पसीना न  आना या पसीना में कमी 
  • त्वचा लाल ,गर्म हो जाना 
  • नाड़ी की गति बढ़ना या तेज हो जाना 
  • खून की गति तेज हो जाना 
  • सांसों की गति अनियंत्रित हो जाना 
  • हाथ,पैर और तालुओं में जलन  होना 
  • आंखो में जलन के साथ -साथ अचानक बेहोशी भी आने लगती है I 
  • गहरे और पिले रंग का मूत्र होना
  • बार -बार प्यास महसूस होना अर्थात मुँह का सुख जाना I
  • कैसे अपने को लू लगने से बचाएं( लू से बचने का घरेलु उपाय )-

हम कुछ नियमित क्रियाकलापों को पालन करें तो हमेशा लू लगे से बच सकते हैं I 

    • अधिक से अधिक और कम से कम  4 लीटर पानी जरूर पियें
  • पेयजल की शुद्धि का ध्यान रखें ,यदि थोड़ी भी शक हो तो पानी को उबालकर पियें
  • सिर ,कान,नाक को हमेशा ढंक कर रखें ताकि गर्म हवा सीधे शरीर में प्रवेश न करे
  • भोजन में हमेशा तरल और पेय पदाथ का सेवन अधिक करें 
  • तेलयुक्त ,मांसाहारी भोजन नहीं करें 
  • शराब और ध्रूमपान का सेवन न करें 
  • चाय -कॉफी का सेवन अल्प मात्रा में करें 
  • हमेशा अपने  दैनिक आहार में मौसमी फल ,जूस अधिक से अधिक तरल पदार्थ शामिल करें
  • शरीर एक के बाद दूसरे तापमान का सामना करता है ,जैसे की कुछ बच्चे बाहर से खेलकर  लौटते हीं फ्रीज के ठंडा पानी पी लेते हैं जिससे सक्रमण के साथ -साथ लू लगने की आशंका बढ़ जाती है
  • नमक ,शक़्कर  का घोल या ORS का घोल निरंतर समय  प्रतिदिन पियें
  • ढीले और सूती वस्त्र ही पहनें I 
  • तेज धूप और गर्मी में अत्यधिक शारीरिक श्रम न करें
  • अपना ब्लड प्रेशर की जांच हमेशा कराएं अन्यथा  ब्लड प्रेशर लो होने पर थकान होती है और पसीना आता है जिसके साथ -साथ दिल की धड़कन भी तेज हो जाती है I  ऐसे लक्षणों  सामने आते हीं  तुरंत अस्पताल जाएंI 
  •  बाहर जाते समय हमेशा सनस्क्रीन का इस्तेमाल करेंI 
  • लू (Heat -Stroke)लग जाने पर क्या करनी चहिये  –

अगर किसी व्यक्ति में लू के लक्षण दिखाई दे या उसे लू लग जाए तो तुरंत चिक्तिसक(doctor )से संपर्क करें I पर कुछ  स्थितियों में अगर डॉक्टर के पास यथाशीघ्र न पहुंच पाएं तो तत्काल राहत के लिए निचे दिए गए सुझावों का पालन करने से मरीज को थोड़ी राहत मिल सकती है I

  • अधिक बुखार होने पर पुरे शरीर को गीली कपड़ों से पोंछकर बर्फ की पट्टी सिर पर रखनी चाहिए 
  • प्याज का रस शहद में मिला कर खिलाएं 
  • हमेशा घड़े का पानी पिलायें या नार्मल पानी पिलायें ,फ्रीज का पानी बिलकुल न दें 
  • रोगी को ठंडी और खुली हवा में रखें उसके आस -पास किसी भी प्रकार का शोरगुल न करें
  • नींबू का रस चीनी और नमक के घोल के साथ पिलायें 
  • मरीज के तलवे पर तौलिया से या कच्ची लौकी घिंसे जिससे उनकी गर्मी निरंतर मात्रा में उतरती रहेगी
  • गेहूं के आटा के बजाय जौ का आटा प्याज के रस के साथ मिलाकर पुरे शरीर में लेप लगाएं
  • कच्चे आम को काली नमक के साथ मिलाकर घोल बनाएं और रोगी को पिलाने के साथ -साथ उसके तलवे पर रगड़ें
  • नोट -ऊपर दिए गए समस्त चिक्त्सिकीय आलेख आपको और आपके परिवार को जागरूकता बढाने तथा नयी जनकारियों से अवगत कराना है  जो किसी भी तरह के चिक्तिसकीय प्रक्रिया से पूर्ण रूप से स्वस्थ्य होने की पुष्टि नहीं करती आप इसे मुख्य आधार मान स्वंय चिकित्सा प्रारंभ  न करें I उपरोक्त दिए गए लक्षणों के गुण मिलने पर डॉक्टर से सीधे संपर्क करेंI