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सोरायसिस(Psoriasis) के Symptom-लक्षण-cause-treatment-उपचार

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  • सोरायसिस(Psoriasis)

जीवन में हमारे अनियमित जीवनशैली कुपोषण एवं पौष्टिक आहार की कमी के कारण कई शारीरिक विकार जन्म ले लेते हैंI इसके साथ ही आधुनिक युग में कई प्रकार की त्वचा की बीमारियां हैं जो वंशानुगत  या जन्मजात भी होता हैI कुछ इंसान की त्वचा इतनी संवेदनशील होती है कि किसी भी मौसम में अगर थोड़ा भी तापमान ऊंच-नीच हो उनकी त्वचा में अनेक विकार देखने को मिलते हैं जो काफी तकलीफदायक होते हैं जो उनके सौंदर्य को बुरी तरह से प्रभावित करता है और उनके मन में हीनता की भावना आ जाता है वह अपने ही लोगों से कटे-छंटे से  रहते हैं उन्हें किसी भी काम में मन नहीं लगता तो कभी-कभी कोई भी कार्य करने में असमर्थ हो जाते हैंI उन्हीं त्वचा रोगों में से एक रोग सोरायसिस है यह एक बहुत जिद्दी और तकलीफ दायक चर्म रोग है जो लंबे समय तक शरीर में बनी रहती हैI कई बार यह बीमारी पूरी तरीके से ठीक नहीं होती हैI इसे कारण रोगी की पूरी तरीके से सुंदरता ख़त्म हो जाती है उसे  अनेक प्रकार के कठिनाइयों का सामना करना पड़ता हैI सोरायसिस को कठिन रोगों में से एक कहा जाता हैIइससे पूरे भारत में करीब 1 करोड से अधिक लोग प्रभावित हैं इसलिए इस रोग के बारे में जानना बेहद आवश्यक हैI यह बीमारी किसी भी उम्र में नवजात शिशु से लेकर वृद्ध तक को भी हो सकता है सामन्यत: 20 से 30 वर्ष की आयु में अधिक प्रकट होती है लेकिन कभी-कभी इस बीमारी के लक्षण क्रॉनिक बीमारियों की तरह देरी से उभर कर आते हैंI  सोरायसिस एक बार ठीक हो जाने पर कुछ समय पश्चात पुनः भरकर आ सकता है और कभी-कभी यह अधिक मात्रा में सामने आता हैI 

  • सोरायसिस क्या है? (what is psoriasis?)

सोरायसिस त्वचा की एक ऊपरी सतह का चर्म रोग है यह एक क्रॉनिक ऑटो इम्यून रोग हैI  क्रॉनिक का अर्थ यह है की वैसे रोग जो हमारे शरीर में लंबे समय तक सक्रिय रहता है इसमें हमारा  इम्यून सिस्टम हमारे शरीर के खिलाफ काम करने लगती हैI यह असाध्य बीमारी कभी भी किसी भी उम्र में हो सकती है कई बार इलाज के बाद इसके लक्षण कई महीनों  तक नहीं दिखाई देते जिससे लोग इसे ठीक हुआ समझ लेते हैं जबकि याराना कर उत्पन्न होने लगता है विशेषकर सर्दियों में यह बीमारी बहुत अधिक गंभीर रूप ले लेता हैI हमारे त्वचा के कोशिकाओं का  औसत जीवन चक्र 20 दिनों का होता है और उनकी जगह नए कोशिकाओं का निर्माण होता है परंतु सोरायसिस में कुछ ऐसे परिवर्तन होते हैं जिसमें बहुत तेजी से त्वचा में कोशिकाओं का निर्माण होने लगता है यह जो तेजी से कोशिकाएं बढ़ने लगते हैं वह हमारे चाचा के ऊपरी परत पर जमा होने लगते हैं जिसके कारण त्वचा की ऊपरी सतह पर लाल या गुलाबी रंग का गोलाकार चकते बनने लगती हैं ,उजला पपड़ी बनने लगती है  त्वचा रूखापन हो जाता है काफी खुजली होता है और खुजली के उपरांत खून भी निकलता हैI इस बीमारी में पूरी तरीके से त्वचा पर मोटी परत जम जाती है जिसे ही सोरायसिस कहा जाता हैI साथ ही तकलीफ दायक बीमारी है यह शरीर के किसी अंग को भी प्रभावित कर सकता है परन्तु प्रमुख रूप से खोपड़ी पर पीछे बालों के निचे,हाथ की हथेलियों,पैरों के तलवों ,कोहनी ,घुटनों और पीठ पर अधिक होती है यह छुआछूत की बीमारी नहीं है अर्थात संक्रामक बीमारी नहीं हैI सोरायसिस को छाल रोग भी कहा जाता हैI 

  • सोरायसिस के प्रकार(Types of psoriasis)-

सोरायसिस के लक्षणों के आधार पर अनेक प्रकार के हो सकते हैंIइनमें से प्रमुख हैं –

 एरिथ्रोडर्मिक सोरायसिस – इस प्रकार के सोरायसिस में खुजली हार्ट रेट का बढ़ जाना शरीर का तापमान घटता -बढ़ता रहता है और अधिक लम्बे समय तक रहने की अवस्था में  निमोनिया में भी तब्दील हो सकता हैI 

प्लेक सोरायसिस– प्लेक सोरायसिस में शरीर के ऊपरी त्वचा पर  सिल्वर सफेद रंग की अनगिनत रेखाएं बन जाती हैI पीठ ,पैर, घुटने आदि में होने वाला से लाल धब्बे और जलन होने लगती हैI

 नेल सोरायसिस- इस प्रकार की सोरायसिस का प्रभाव सबसे अधिक आर्थराटीस  पीड़ित रोगियों में देखने को मिलता हैI हाथ -पैर दोनों में  हमारे हाथ से दोनों के नाखूनों में दर्द नाखूनों के रंग में बदलाव नाखूनों के अंदर चौक जैसा तत्व भर जाता है अधिकतर समस्या फंगल इंफेक्शन के कारण होता हैI  

सोरियाटिक-आर्थराइटिस सोरायसिस – सोरायसिस के अधिकांश रोगियों में सबसे  अधिक सोरियाटिक सोरायसिस का हीं लक्षण पाया जाता है इसका असर लम्बे समय तक शरीर में देखने को मिलता है इसमें जोड़ों में दर्द ,उंगलियों घुटनों और टखनों में हमेशा सूजन रहता हैI

  •  सोरायसिस के प्रमुख लक्षण-(Symptom of psoriasis)

सोरायसिस त्वचा पर होने वाले अन्य रोगों से की तुलना में अति सक्रिय प्रतिरोधक पुराने वाला रोग है जिसमें अनेक प्रकार के प्रमुख लक्षण देखने को मिलती हैIयह रोग मानसिक और शारीरिक दोनों तरीके से प्रभावित करती हैIइसके लक्षण हल्के-फुल्के से लेकर भरी मात्रा में होते हैंI   

  • इसमें त्वचा मोटी और फटी हुई दिखाई देती हैI 
  • इससे प्रभावित त्वचा चमकविहीन हो जाती हैI 
  • सोरायसिस में  त्वचा पर लाल और गुलाबी चकते उभरने लगते हैंI 
  • सोरायसिस से प्रभावित अंगों में खुजली होती है जिसमें खून का स्राव होता है कभी-कभी  रीम भी निकलता है I 
  • त्वचा की परत उतर जाती है और दरार पड़ने लगती हैI 
  •  त्वचा काफी रुखा हो जाता हैI 
  • सोरायसिस से प्रभावित रोगियों में जोड़ों का दर्द और सूजन जैसे लक्षण भी पाए जाते हैंI जिसके कारण इससे गंभीर रूप से ग्रसित रोगियों को चलने में परेशानी का सामना करना पड़ता हैI 
  • सोरायसिस  रोग में नाखूनों में छोटे गड्ढे और उन पर एक अलग प्रकार के रोग के चिन्ह  दिखाई देते हैंI 
  •  सोरायसिस के प्रमुख कारण-

सोरायसिस होने के ठोस कारणों की अभी तक पुष्टि नहीं हुई परंतु अभी तक के  रिसर्च के अनुसार सोरायसिस की उत्पत्ति के लिए मुख्य रूप से प्रेडिस्पोजिशन और एनवायरमेंटल फैक्टर का जवाबदार माना गया हैI 

  • अधिक तनाव के कारण भी सोरायसिस बढ़ सकता हैI 
  • सोरायसिस वंशानुगत रोग श्रेणी में आने वाली बीमारी है अर्थात अनुवांशिकी भी हो सकती हैI 
  •  अधिक मसालेदार या मांसाहारी भोजन करने से भी सोरायसिस बढ़ सकता हैI 
  • विटामिन D के कमी के कारण भी सोरायसिस हो सकता हैI 
  • अधिक मोटापा और ध्रूमपान के कारण सोरायसिस बढ़ता हैI 
  • किसी तरह के अधिक चोट या धुप तीव्रता के कारण भी सोरायसिस हो सकता हैI 
  • कुछ  दवाइयों का लम्बे समय तक  सेवन करने से भी सोरायसिस हो सकता हैI 
  • सोरायसिस का  उपचार और जांच-(Test and treatment)-

सोरायसिस की समान्य लक्षणों के आधार पर हीं  चिकित्सक पहचान लेते हैं कुछ जटिल प्रक्रिया में  त्वचा को बायोप्सी किया जाता हैI इसके अलावा खून की जांच भी की जा सकती हैI  सोरायसिस के उपचार में डॉक्टर द्वारा त्वचा पर लगाए जाने वाले एंटीसोरिएटिक क्रीम या लोशन दी जाती हैI अगर रोग अधिक तीव्र न हो  तो सुधार हेतु मॉइश्चराइजिंग क्रीम इत्यादि से भी रोग नियंत्रण में रहता है लेकिन जब त्वचा पर लगाने वाली क्रीम या लोशन से अधिक फायदा न हो  तो दवाइयों का नियमित सेवन और कुछ परहेज बताए जाते हैंI डॉक्टर इस बात का हमेशा सलाह देते हैं सोरायसिस के मरीजों को डायबिटीज को हमेशा नियंत्रण रखें वरना सोरायसिस का प्रभाव उपचार के बावजूद पूर्ण रूप से सफल नहीं हो सकता हैI  

  • सोरायसिस के घरेलू उपचार या सामान्य उपचार-

सोरायसिस रोग हमारे शरीर के किसी भी हिस्से को प्रभावित कर सकता हैI  यह काफी जटिल रोग है जिसमें अपने त्वचा को उपचार के अलावा खुद से देखभाल करना बेहद जरूरी हो जाता है

  • इसके अंदर त्वचा काफी रूखापन हो जाती  है इसलिए हमेशा नारियल का इस्तेमाल करना चाहिए विशेषकर सर्दियों में मॉइश्चराइजिंग क्रीम को  दो बार जरूर लगाएंI 
  • अधिकतरशराब का सेवन और  ध्रूमपान न करेंI 
  • मसालेदार ,रिफाईनयुक्त ,अधिक गर्म भोजन और मांसाहारी भोजन का अधिक सेवन ना करेंI
  • सोरायसिस में डाइबिटीज का भूमिका अहम है इसलिए दवाइयों के साथ-साथ अधिक योग और व्यायाम जरूर करें जिससे तनाव भी कम होता हैI
  • स्नान करते समय ठण्ड में अधिक गर्म पानी से स्नान न करेंI 
  • हल्दी या नीम का पत्ते के साथ एलोवेरा जेल से मालिश करेंI 
  • निम्बू का रस का सेवन करने से और लगाने से रक्त शुद्धिकरण होता है जो सोरायसिस में अधिक फायदेमंद होता हैI 
  • त्वचा पर खरोंचे नहीं पड़ने देंI 
  • ऐसे कपडे पहनें जो त्वचा के लिए आरमदायक हो अर्थात ज्यादातर कसी हुई जींस,शर्ट ना पहनेंI 
  • इसका इलाज नियमित रूप से एक अच्छे डॉक्टर जो त्वचारोग विशेषज्ञ हों उनसे करायें तथा उनके द्वारा बताये गए निर्देशों का पालन करते हुए पूरा उपचार कराएं I 
  • नोट- यह चिकित्सकीय आलेख पाठकों को रोग के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा नए रोगों से परिचित करवाने के  लिए लिखा गया है जो किसी प्रकार के स्वयं इलाज की पुष्टि नहीं करता हैI इसलिए उपरोक्त लक्षणों के दिखाई देने पर अपने चिकित्सक से जरूर दिखाएं और उनके द्वारा बताए गए निर्देशों का ईमानदारीपूर्वक पालन  करेंI