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हकलाने की बीमारी (Stammering/Stutterin) आदत कैसे ठीक करें

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  • हकलाना (Stammering/Stutterin)

जब  कोई छोटा बच्चा  अपने शुरूआती दिनों में बोलना शुरू करता है तो, किसी शब्द का सही उच्चारण नहीं कर पाता वह तोतलाकर और हकलाकर बोलता  हैI उस समय उनका बोली (वाक्य)काफी मनोरंजक और शोभनीय लगता है,परन्तु एक निश्चित उम्र के बाद लगातार वही आदत रह जाती है बोलना कुछ चाहता है और उसके मुंह से दूसरे शब्द निकलता है अर्थात तोतलाता हैI अगर किसी शब्द को  बोलने में काफी समय लेता है और व्यक्ति कुछ देर बाद बोलता है या कोई शब्द के बिच में या अंत में अटक जाता है या किसी विशेष शब्द को बोलने में समस्या आती है और उनका चेहरे का भाव (Expression)बदल जाता है व्यक्ति का मुंह देर तक खुली रहती है तो उसे ही हकलान कहते हैं अर्थात वह व्यक्ति बोलने में हकलाता हैIअगर ५ वर्ष से अधिक आयु के  किसी भी लड़के -लड़कियों अगर स्कूल जाने लगते हैं उसके बाद हकलाते हैं यह गंभीर हो स्का है और एक रोग का आकर ले लेगाI इसी तरह से अगर उनकी यह समस्या Advance Stage में जाने पर अर्थात किशोरावस्था में जाने पर भी जब वह कॉलेज के विद्यार्थी हो जाता है ,या किसी व्यवसाय(Profession) या नौकरी करने लगे तो उस समय हकलाने लगे तो व्यक्ति को काफी समस्याएं आने लगती है खुद में ही   काफी दबाव मह्सूस करने लगता है,अपनी किसी विचार को स्पष्टता से जाहिर करने से डरता है ,उनमें काफी आत्मविश्वास की कमी देखने को मिलती है और व्यक्ति डिप्रेशन का शिकार हो जाता हैI उनकी नियमित रूप से इलाज कर ऐसी समस्याओं के किसी भी महिला या पुरुष के जन्मजात विकृतियों का सामाधान संभव हैI 

  • हकलाना क्या है?

हकलाना(stammering) एक प्रकार की बोलने की बाध्यता है,जिसमें वक्ता बोलने वाले शब्द को ना चाह कर भी   के धवनियों को दोहराता हैI यह एक आम समस्या है जिसे रोगी के श्रेणी में नहीं रखा जा सकता हैI यह बचपन में शुरू होता है, जिसमें बच्चों की बोलने की क्षमता विक्सित हो रही होती है तो वह हकलाकर बोलता है जो सामन्य है उन बच्चों की उम्र 2 से 7 वर्ष होती है परन्तु इसके बाद अर्थात 10 वर्ष के अधिक की आयु वाले बच्चों में भी यह हकलाहट बनी रहती है तो काफी चिंता का विषय बन जाता हैIयह कत्तई आवश्यक नहीं है की हकलहाट किसी दबाव या सार्वजनिक रूप से हिचकिचाहट के कारण होता हैI यह आनुवंशिकी भी हो सकता हैI लड़कियों के तुलना में लड़कों में हकलाहट अधिक देखने को मिलता हैI

  • हकलाने का मुख्य  कारण क्या है?

हकलाते  क्यों है इसका कोई ठोस सबूत अभी तक आधुनिक चिकित्सा में भी नहीं मिल पाया हैI परन्तु कुछ मुख्य  निम्न कारणों की वजह से बच्चे हकलाते हैंI

  • यह अनुवांशिक भी हो सकता है अर्थात उनके  माता-पिता को इस प्रकार समस्याएं रही हो तो  उनके बच्चों में भी इस प्रकार की अवरोध देखने को मिल सकती हैI 
  • जीभ और होठों में जरुरत से अधिक नियंत्रण अर्थात जीभ और होठ उतनी तेजी से काम नहीं करनाI 
  • वैसे बच्चें जिनको अपने घर में अपेक्षाकृत प्यार -दुलार नहीं मिलता तो उनमें हकलाने की समस्याएं उतपन्न हो जाती हैI 
  • बच्चे की भाषा पर पूरी ज्ञान न होना जिस कारण वह बोलने से हिचकिचाता(खुद पर संशय)करता है और उसी आदत की वजह से हकलाने लगता हैI 
  • बहुत भावुक होनाI 
  • मानसिक तनाव या एकाग्र नहीं हो पानाI 
  • कभी -कभी छोटे बच्चे अन्य साथी जो पहले से ही हकलाने की समस्या से ग्रस्त है तो उनकी नकल करते हैं जो आदत बन जाती है जिसके कारण भी हकलाहट पैदा हो सकता हैI 

  •  हकलाने की समस्या को दूर कैसे करें?(घरेलु उपचार)

हकलाने के परेशानी का लोग उपचार हेतु अधिकतर लोग होम्योपैथिक विधि से करवाने की सलाह देते हैंI हकलाने वाले लोगों को दवा से अधिक मोनोचिकित्स्क और स्पीच थेरेपिस्ट की मदद ली जाती हैI ऐसे लोग हकलाते हैं  विश्वास थोड़ा कम होता है ,सार्वजनिक जगह पर उसका मजाक उड़ाने की वजह से उसकी आत्मविश्वास में लगतार गिरावट देखि जाती है जिसकी वजह से वह सार्वजनिक स्थलों पर या सार्वजानिक सामरोह में जाने से कतराते हैंI इसलिए उनके परिवार के  सदस्यों को चाहिए की हमेशा उन्हें प्रोत्साहित कर आत्म -विश्वास पैदा करने की कोशिश करें I कुछ बच्चों में देखि जाती है कई बार जीभ उनकी अधिक चिपकी होती है तो हल्की सर्जरी करवाना पड़ता हैI किसी शब्द को वो गलत तरिके से उच्चारण कर रहा  तो उसे बार -बार ना टोकें(सुझाव दें) उस पर किसी भी तरीके का गुस्सा न करें बल्कि धैर्यपूर्वक और प्यार से उसे समझाएंI स्पीच थेरेपिस्ट द्वारा उन्हें क्रमशः उसी शब्दों को बुलवाया जाता है और गाना गनवाने की कोशिश करवाते हैंI अक्सर देखा जाता है की हकलाने वाला व्यक्ति को गाना गाते समय कोई विशेष परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है इसके सन्दर्भ में मनोचिकित्सक  कहते हैं की गाते समय शब्दों के इस्तेमाल और उसे बोलने के समय को लेकर दिमाग में कोई अनिश्चितता या किसी तरह का तनाव नहीं होता जिसकी वजह से उन्हें गाते समय उतनी अवरोध पैदा नहीं होतीI यदि बड़ी उम्र में बोलने की सबंधित या हकलाने की सबंधित समस्याएं हो तो न्यूरोलॉजिस्ट ,ENT डॉक्टर ,मनोचिकित्सक के पास उपचार के साथ -साथ योग और व्यायाम करने की निरंतर सलह दी जाती हैI 

नोट-नोट-उपरोक्त लिखी गयी आलेख अपने पाठकों को जागरूकता बढ़ने तथा नये -नये रोगों के बारें में विस्तृतपूर्वक बताकर रोगों से अवगत करवाना हैI हम किसी प्रकार के इलाज की पुष्टि नहीं करते हैं अगर आलेख में लिखी गयी लक्षणों में से कोई भी लक्षण महसूस हो तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करेंI इस आलेख के आधार पर स्वयं  प्रारम्भ न करेंI