HomeSerious Diseases

Appendix(अपेंडिक्स) के Symptom-लक्षण-cause-treatment-उपचार

Like Tweet Pin it Share Share Email

 

  • Appendix(अपेंडिक्स)

पेट हमारा पाचन तंत्र  से लेकर शरीर के हर गतिविधियों में संतुलन बनाने का कार्य करता हैI अपेंडिक्स के मामले में दोनों हाथ और उनके अंदर की मालिका दीवारों में सूजन और कई प्रकार के अधिकारी उत्पन्न होती हैं जिससे रोगी को बहुत प्रकार के परेशानियां उत्पन्न होती हैI  यह मूल रूप से गंदे और शरीर के अनुकूल खाद्य पदार्थों के सेवन ना करने से होता है I अपेंडिक्स में ही नहीं बल्कि पेट के आंतरिक गतिविधियों में थोड़ी भी समस्या या लक्षण दिखाई देने पर व्यक्ति को डॉक्टर को दिखाना चाहिए क्यूंकि यह पूरी तरह से आंतरिक बीमारी है बीमारी को नियंत्रित करने के लिए  विशेषज्ञ डॉक्टर से ही परामर्श लेना सर्वोत्तम है I आधुनिक युग में अपेंडिक्स एक आम समस्या हो चुका है जो काफी कष्टकारी भी है अपेंडिस रोगी के रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ने से वो धीरे धीरे अन्य बीमारियों से भी ग्रसित हो जाता है इसलिए अपेंडिक्स से बचाव के लिए समय पर ही लक्षण पहचान कर उपचार करवाना यह एकमात्र उपाय हैं विशेषज्ञ बताते हैं शुरुआती लक्षणों में यदि अपेंडिस की पहचान हो जाए तो संपूर्ण इलाज काफी कम समय में हो जाता है जिससे इस पर पूरी तरह से नियंत्रित किया जा सकता है

  • अपेंडिक्स क्या है?(What is Appendix)? 

अपेंडिक्स (Appendix ) हमारे शरीर का आंतरिक अंग है जो पेट के अंदर बड़ी आंत और छोटी आंत के जंक्शन में पेट के निचले हिस्से में  दाहिनी तरफ होता हैIपेट का निचला दाहिना हिस्सा जहँ पैर का जोड़(joint)है उस जगह पर अगर दर्द का आभास होता है तो ये (appendicits)एपिन्डिसाइटिस  का लक्षण हो सकता हैI एपिन्डिसाइटिस(आंत्रपुच्छ) अपेंडिक्स के दर्द को कहा जाता हैI अपेंडिक्स की आकृति झिल्लीनुमा होता हैI यह बड़ी आंत से परस्पर जुड़ा होता हैI अपेंडिक्स शरीर में  सेलुलोज को पचाने में सहायक होता हैI अपेंडिक्स का एक सिरा खुला होता है और दूसरी बंद होता हैI कई बार भोजन का कोई कण इसमें चले जाता है तो दूसरे सिरे को ब्लॉक होने के कारण दूसरी ओर से  निकल नहीं पाता जिसके परिणामस्वरूप अपेंडिक्स संक्रमित हो जाता है इसमें बैक्ट्रिया कीटाणु और सड़न पैदा होने लगती है जिसे चिकित्सीय भाषा में एपिन्डिसाइटिस कहा जाता हैI इस रोग का असर 10 वर्ष से 35 वर्ष तक के लोगों में  अधिकतर देखने को मिलती हैI जिंदा खाना-पीना शुद्ध नहीं होता है अर्थात वह बाहरी भोजन और जंग फूड चाइनीज फूड आदि जैसे खाद्य पदार्थ को ज्यादा अपने आहार में शामिल करते हैं तो उनमें अपेंडिक्स होने की आशंका हमेशा बनी रहती हैI अपेंडिक्स की शरीर में भूमिका क्या है ऊपर अभी चिकित्सा विज्ञान में पूर्ण रूप से स्पष्ट नहीं  हुआ हैI इसका आकार अलग -अलग रोगियों में अलग-अलग आकृति होती हैIपर अधिकांशत: 9 c.m इसकी लम्बाई होत्ती है परन्तु इसकी लम्बाई कम से कम 2 c.m से लेकर 20 c.m तक देखने को मिलती हैI अपेंडिक्स का (diameter) 6mm होता हैI अपेंडिक्स का दर्द विशेष रूप से पहचान में नहीं आता अचानक काफी कठिन होता है क्योंकि यह अपेंडिक्स का दर्द है कि नहीं पेट में विभिन्न कारणों से दर्द उत्पन्न हो सकता  है जिनमें अशुद्ध भोजन और अन्य वजहों के कारण भी होता हैI  

  • अपेंडिक्स के प्रमुख लक्षण -(Symptomps of Appendix)

अगर हम इन लक्षणों  की जानकारी ना हो तो अपेंडिक्स बीमारी को पहचानना थोड़ा कठिन हो जाता है

  • पेट में  जहाँ भी इन्फेक्शन होता है तो उसके कारण तेज दर्द होता हैI 
  • जी मचलना और उल्टी आना 
  • पेट में भारीपन और गैस महसूस होना
  • बुखार और सिर में तेज दर्द होना 
  • भूख न  लगना और कमजोरी का आभास होनाI 
  • कफ युक्त मल आता हैI 
  •  नब्ज में ऐंठन और कब्ज का समस्या रहनाI 
  • कई बार अपेंडिक्स में मूत्राशय की समस्या भी देखने को मिलती है अगर मुद्रास है अपेंडिसेज संक्रमित हो तो बार-बार  पेशाब लगता है और पेशाब करते समय दर्द का आभास भी होता हैI 
  • अपेंडिक्स  रोग में होने वाली प्रमुख जांचे –

अपेंडिक्स रोग में सर्वप्रथम Physically Examination  किया जाता है जिसमें शरीर के परिवर्तन सूजन ,बाहरी चोट आदि की जांच की जाती हैI इसके अलावा खून की जांच  करवाया जाता है जिनमें खून के अंदर इन्फेक्शन तो नहीं,CBC ,अल्ट्रासाउंड,CT SCAN आदि प्रमुख जांचें करवाई जाती हैI

  • अपेंडिक्स के प्रकार(Types of Appendix)-

अपेंडिक्स मुख्यतः दो प्रकार के होते हैंI (1) एक्यूट अपेंडिक्स (2)क्रोनिक अपेंडिक्स 

  •  एक्यूट अपेंडिक्स-  इसमें  अपेंडिक्स की आकर  तेजी से फैलता और बढ़ता है  जिस समय निरोगी इस अपेंडिक्स से ग्रसित हो जाता है तो उसे कब्ज ,उल्टी,जी मचलना  आदि कई प्रकर की परेशानियों का सामना करना पड़ता हैI 
  • क्रोनिक अपेंडिक्स –इस तरह के अपेंडिक्स बहुत कम देखने को मिलते हैं अर्थात इसके रोगी काफी कम पाए जाते हैं कुछ समय बाद स्वता ही समाप्त हो जाता है इनमें पेशाब करते समय दर्द, ठंडा लगना और शरीर कांपना, पेट में गैस और गांव,  बुखार लगना,भूख न लगना आदि लक्षण देखने को मिलती हैI 
  • अपेंडिक्स  रोग होने का मुख्य कारण(cause)-

बाजारू चीज और लापरवाही भरी दिनचर्या के कारण अपेंडिक्स का प्रकोप  अधिक बढ़ा है जिससे हर उम्र के लोग प्रभावित हो रहे हैं I चाहे वह बुजुर्ग, स्त्रियां हों या बच्चेI अपेंडिक्स बढ़ाने में  रसायन युक्त भोजन और ध्रुव के साथ-साथ वायु प्रदूषण का भूमिका है

  • अगर आप किसी  पेट से संबंधित  या फेफड़े से संबंधित किसी रोक से ग्रसित हैं तो अपेंडिक्स  होने का चांस अधिक रहता हैI 
  •  इसके अलावा अगर लंबे समय तक कब्ज, खांसी हो तो अपेंडिक्स का कर्क बन सकता हैI 
  •  पेट में  पलने वाला  परजीवी(Parasite) और आंतों के अन्य समस्या से अपेंडिक्स हो सकता हैI 
  •    रेशेदारयुक्त  भोजन ना करना
  •  बाजारु और रिफाइनयुक्त खाद्य  पदार्थों का अधिक मात्रा में सेवन इनफेक्शन होने का डर रहता हैI
  • अपेंडिक्स का घरेलू उपचार-

अपेंडिक्स  एक बीमारी ऐसी है जिसमें अधिकांश था सर्जरी करवानी पड़ती है यह उस अंग को बाहर निकलवा दिया जाता है परंतु सही खान-पान और सही देखभाल से इस रोग को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है इसलिए सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए इस बीमारी से निजात पाने के लिए नीचे दिए गए इन बातों को हमेशा अपने दिनचर्या में शामिल करें

  • इसके मरीजों को खानपान में काफी विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है ,हमेशा रेशेदारयुक्त भोजन और घर का खाना  जिनमें रसायन की मात्रा काफी कम हो वैसी भोजन हमेशा करनी चाहिएI
  •  प्रदूषण से बचें ,धूल ,धुंए के संपर्क से हमेशा दूर रहने को  कोशिश करें क्योंकि प्रदूषण ना सिर्फ फेफड़े बल्कि हमारे आँतों और पेंटो को अत्यधिक हानि पहुंचाते हैं जिसके कारण अपेंडिक्स भी हो सकता हैI  
  •  अपेंडिक्स में रोज नमक मिलाकर छाछ पीना फायदेमंद होता हैI 
  •  डेयरी  प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल न करेंI 
  •  खाना धीरे-धीरे चबाकर खाएं
  •  ताजे फल और हरी पत्तेदार सब्जियां अधिक मात्रा में शामिल करेंI 
  • एलर्जी से बचने की कोशिश करेंI 
  •   अदरक अपेंडिक्स में दर्द और सूजन को दूर करने में उपयोगी है इसलिए उसका इस्तेमाल चाय और अन्य तरीके से  अपने आहार में उपयोग जरूर करेंI 
  •  पुदीना तुलसी का पत्ता और शहर का उपयोग निरंतर करना चाहिएI  विटामिन बी के साथ अन्य मिनरल्स होते हैं जो की छाती में जकड़न खास ही आदि की समस्या को दूर करने में काफी उपयोगी साबित होते हैंI 
  •  इसके अलावा द्वारा बताई गई दवाइयों का नियमित रूप से लेंI 
  •  हल्का व्यायाम और योगा अवश्य करेंI 
  • नोट -इस लेख में उपरोक्त लिखी गई बातें अर्थात चिक्तिसकीय आलेख लोगों की  स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने बीमारी के बारे में अवगत कराने के लिए हैI  जो इलाज की पुष्टि नहीं करता हैI इसलिए उपरोक्त लिखी गए लक्षण होने पर से संपर्क करें और नियमित रूप से इलाज करवाएंI