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जलने के बाद क्या करें उपचार | First Aid treatment for Fire Burnt Case

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  • जलने के बाद क्या करें (FIRE BURNT SOLUTION)

त्वचा हमारे शरीर का सबसे बड़ा अंग है, मनुष्य की सुंदरता के साथ-साथ हर तरीके से अलग-अलग रोगों से  रक्षा करता हैIइसके कारण ही हम सक्रीय जीवन जी पाते हैं क्यूंकि हमारी त्वचा न सिर्फ प्रचंड धूप,कंपकंपाती ठण्ड से हमे बचाती है  बल्कि हमारे अंदरूनी अंगों को भी प्रोटेक्ट करता हैI परन्तु कुछ घटनाएं ऐसे हैं जिनकी वजह से हमारी त्वचा पूर्ण रूप से खराब हो जाती है और इसका सबसे बड़ा कारण हैI   किसी तरह त्वचा  का जल(burn) जाना या झुलस जानाI हर घरों  में देखा जाता है की जाने – अनजाने में कभी भोजन बनाते समय या किसी कारणवश  अचानक से कुछ ऐसा हादसा होता है जिससे परिवार की कोई सदस्य आग की चपेट में आ जाता है जिससे उनका शरीर के किसी अंग जल जाता है और उस समय हमारा दिमाग जरा भी काम(सक्रीय) नहीं करता और चिकित्सक के पास जाने में अगर थोड़ी भी देर हो तो जख्म गहरा होता जाता हैI  अगर जख्म ठीक होने पर भी त्वचा पहले से सुन्दर नहीं दिख पाती जिसके कारण मनुष्य के सौंदर्य पर गहरा प्रभाव पड़ता है और वह हमेशा हताश और आत्महीन महसूस करता हैI इसलिए तुरंत हमें  ऐसे प्राथमिक उपचार करनी चाहिए जो त्वचा को नुकसान भी ना पहुंचाएं और जलन और दर्द से  भी रोगी को राहत मिलेI इसलिए यह बेहद जरूरी है अस्पताल जाने से पहले कुछ घरेलू उपाय एक वरदान की तरह साबित होती हैIसामान्य रूप से साधारण जलन अर्थात पटाखे, चाय, कॉफी या भोजन बनाते समय जलने पर तुरंत प्राथमिक उपचार करने से त्वचा और दर्द जलन के साथ-साथ कोई बड़ा  फफोला भी नहीं होने देताI

  • जलने का प्रकार (TYPES OF BURN)

जलना शरीर को काफी क्षति पहुंचाता है और त्वचा को बदसूरत बनाता हैIऐसा इसलिए क्यूंकि जलने के कारण  त्वचा में प्रभावित कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैI हम केवल सोचते हैं कि आग या कोई गर्म पदार्थ के कारण ही हम  जल(Burn)सकते है परंतु ऐसा नहीं है हमारी त्वचा गर्म और ठंड दोनों के कारण जलती है जैसे प्रकार से धूप तेज हो  या कोई भी गर्म पदार्थ , बिजली से , रासायनिक पदार्थ से जलने का वजह हो सकते हैं उसके अलावा बच्चे धूप में अधिक खेलने से ,पटाखे  से जलते हैं, इसके अलावा अक्सर भोजन बनाते समय गरम दूध या अन्य रसायन पदार्थ और कभी-कभी बर्तन के कारण भी हो सकता हैI इसके अलावा कुछ वैज्ञानिक पद्धति भी  हमारे शरीर को नुकसान पहुंचाता है जिस कारण आदमी जल सकता है जैसे कि X-RAY निकलने वाले विकिरण जो कैंसर के इलाज में उपयोग में आने वाली पराबैगनी किरण के संपर्क में  हमारी त्वचा जल सकती हैI इसके अलावा पेट्रोल अन्य रासायनिक तत्व के कारण,गर्म कुछरेशे वाले कपडे जिनमे अधिक गर्म होने पर घर्षण होने पर आग लग सकती है,रसोई के जैसे ओवन शेल्व आदि  बिजली उपकरणों वाले वस्तओं के कारण भी हमारा त्वचा जल सकता है त्वचा का जलना अनेक प्रकार का होता है जैसे त्वचा के मुख्य रूप से दो परतें होती हैंI डर्मिस और एपिडर्मिस और इनके उप- परतें भी  होती हैं कुल मिलाकर त्वचा के 7 परतें होतीं हैंI चिकित्सीय रूप से किसी तरह के आग से झुलसे जलन को तीन रूपों में वर्गीकरण किया गया है I जिनको फर्स्ट डिग्री, सेकंड डिग्री और थर्ड डिग्री बर्न मैं चिकित्सकों द्वारा विभाजित किया गया है

फर्स्ट डिग्री बर्न –फर्स्ट डिग्री वैसी परिस्थितियों को कहा जाता है त्वचा की सबसे ऊपर वाली परत प्रभावित होती है गांव में दर्द होता है और सूजन के साथ-साथ लाली दिखाई पड़ता है इसे सामान्य रूप का जलन होता है जिसमें इसके दाग भी अच्छे से उपचार करने पर थोड़ी ही दिन में स्वत: या उपचार के बाद मिट सकते हैंIइसके अगर लक्षण  की बात की जाए तो जाली हुई त्वचा काफी लाल हो जाता है जिसमे लालिमा के साथ -साथ सूजन और फफोले भी हो जाते हैंI  

सेकंड डिग्री बर्न-  इसमें बाहरी त्वचा के साथ-साथ अंदरूनी परत एपिडर्मिस जिसे त्वचा की भूमि कहा जाता है दोनों को प्रभावित करता है इसमें जख्म  गहरे होते हैं जिससे जले हुए अंग को हिलाने में भी तकलीफ होता हैI इसके जलन के साथ-साथ सूजन और दाग उपचार के बावजूद उम्र भर  रहता हैI इसका जख्म हमेशा गीला अर्थात जली हुई भाग में चिपचपा द्रव्य भर जाता है जिसको रीम कहा जाता हैI इसमें दर्द और जलन थोड़ी अधिक रहती है और सबसे बड़ी चिंता की बात यह होती है की उपचार होने के बाद रोगी पूर्ण रूप से स्वस्थ तो हो जाता है परन्तु त्वचा पर आजीवन गहरा जख्म का दाग रह जाता हैI 

थर्ड डिग्री बर्न –इसमें त्वचा के तीसरा परत  भी प्रभावित होता है अर्थात त्वचा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो जाती है जिसमें जले हुए स्थान को उत्तक  उत्पन्न होने के कारण स्वेट ग्लैंड पूरी तरीके से खत्म हो जाता है इसका असर रुखसार के बरसों बाद भी देखने को मिलता है अत्यधिक रोगी अनेक प्रकर के अन्य  गंभीर रोगों के शिकार भी जाते हैंI यह बहुत घातक होता है थर्ड डिग्री बर्न की परिस्थितयां तब पैदा होती है जब शरीर के आधे फीसदी से अधिक जल जाते हैं इसमें रोगी न तो पूर्ण रूप से ठीक हो पता है और अधिकांशतः रोगियों की जान चला जाता  हैI 

इसके  अलावा कुछ तापमान के कारण चाहे वह अधिक हो या कम कभी-कभी तो त्वचा जिनके अति संवेदनशील होते हैं संपर्क में आते हैं जल सकते हैंI इसमें त्वचा करा चटक लाल सफेद काले दिखते हैंI  उदाहरण के तौर पर अगर आपकी त्वचा के संपर्क में आने से जला है तो ठन्डे प्रदेशों जहाँ बर्फ़बारी होती होगी वहां लम्बे समय तक रहने के कारण हो सकते हैं और गर्म प्रदेशों और धुप के जरा भी संपर्क में आने से जलन महसूस होता हैI 

इसके अलावा  कभी-कभी ऐसा होता है कुछ रसायन पदार्थ से या लिथियम ,सोडियम ,मैग्नीशियम ,फास्फोरस जैसे ज्वलनशील तत्वों के संपर्क में आने से जल सकता है जिसका असर तुरंत देखने को ना मिले परंतु एक-दो दिनों बाद देखने को मिलती है जिसमें धब्बे  लाल, खोलें और खुजली होता है और इन्फेक्शन होने का भी डर लगता है इसका सीधा उपचार हमें चर्म रोग विशेषज्ञ डर्मेटोलॉजिस्ट पास ही करवाना चाहिएI   

  • सामान्य उपचार /घरेलु उपचार(HOME REMEDIES 

सामान्यतः जलने के बाद बेहद अहम होता है समान्य उपचार क्यूंकि अस्पताल पहुंचने में अगर थोड़ी देर  हो जाए तो हमारी त्वचा की कोशिकाएं (cells)अधिक नष्ट होने लगेगीं जिससे जख्म अधिक गहरा होता चला जाएगा  इसलिए यह बेहद आवश्यक है की तुरंत घरेलु उपचार करके रोगी को राहत पहुंचाया जाएI (यह उपचार सिर्फ फर्स्ट डिग्री  बर्न तक ही कारगर साबित होगी)

  • जब भी किसी कारणवश शरीर के किसी अंग  जल जाए तो बिना देर किए उस पर ठंडा पानी डालें या हाथ , पैर जली हो तो  इनको ठंडे पानी में जल्दी से भिंगो कर थोड़ी देर तक रखें और एक कपड़ा भिगोकर लपेट दें जिससे जलन भी कम होगी और दर्द जख्म बनने का इतना खतरा नहीं रहेगा परंतु यह सब सिर्फ और सिर्फ साधारण रूप से जलने के परीस्थिति में किया जाना चाहिएI 
  • अगर रोगी गरम पानी या भोजन बनाते समय छिटपुट अर्थात जलन गंभीर ना हो तो नारियल के तेल के साथ चूने का पानी मिलाकर एक पेस्ट बनाया जाता है जिसके फलस्वरूप जले हुए भाग पर लगाने से तुरंत जलन  और दर्द से राहत मिलता हैI 
  • जलन को दूर करने के लिए किसी भी तरीके का टूथपेस्ट बढ़िया उपचार है जले हुए अंग पर टूथपेस्ट लगाने ना सिर्फ जलन बल्कि दर्द भी कम हो जाता हैI 
  •  नीम के पत्ते  को पीसकर तथा नीम का तेल का जले हुए भाग पर लगाएं नीम तेल में मौजूद मौजूद एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण होते हैंI 
  • इसके अलावा तुलसी के पत्ते का रस जले हुए स्थान पर लगाने से भी संक्रमण के साथ -साथ दाग कम होने की संभावनाएं रहती हैंI 
  • अगर जल कर छोटा जख्म बना लें उस पर सिरका अच्छी तरह से उपयोगी होता है क्योंकि इसमें एंटीसेप्टिक गुण होते हैं जो घाव के निशान को कम करते हैं और जलन से भी राहत देते हैं इसका असर तुरंत ही रोगी में देखने को मिलेगाI  जो घाव के निशान को भी कम करते हैं और को भी देते हैं ठंडे पानी में 
  • कभी-कभी जलन  में आलू का रस काफी उपयोगी होता है क्योंकि इनमें विटामिन सी के साथ-साथ बी कॉन्प्लेक्स और आयरन जैसे तत्वों के गुण पाए जाते हैं जो त्वचा के निशानों को कम करने में अहम भूमिका निभाते हैंI 
  • लैवेंडर का तेल विशेष रुप से मक्खियों के विरुद्ध अधिक प्रभावशाली होते हैं परंतु इसमें एंटीसेप्टिक और दर्द निवारक गुण होने के कारण जलने में इसका उपयोग किया जा सकता है जो बाहरी संक्रमण को रोककर त्वचा की देखभाल करने में करने के लिए हमें साफ-सुथरे सूती कपड़े में तेल की डाल कर जले हुए स्थान पर लगाना चाहिएI 
  •  इसके अलावा एलोवेरा ,सरसों का तेल आदि  भी प्रयोग में लाया जाता हैI 
  • अगर त्वचा सामन्य रूप से भी जली हो तो डॉक्टर से  यथाशीघ्र संपर्क कर इलाज अवश्य करवाएं डअस्पताल क्यूंकि इस प्रकार के उपचार  अस्पताल पहुंचने तक ही प्रभावी हो सकते हैं अथवा पूर्ण रूप से स्वस्थ होने के लिए बिना चिकित्सक संभव नहीं हैI 
  •  जलने पर सावधानी बरतें  (Precaution tips for burn)-

कुछ देखो क्योंकि कारण या हम यूं कहें की नासमझ होने कारण हम कुछ कुछ लोग अपने घर में ऐसी गलतियां कर जाते हैं जिससे रोहित की स्थिति गंभीर हो जाती है अर्थात जला हुआ भाग अधिक भयंकर रूप ले लेता है और काफी नुकसान पहुंचाता हैI  

  • अगर त्वचा गंभीर रूप से जल जाए  तो अंग को कभी भी पानी में ना डुबाएं क्योंकि यह एक गलत मिथ्या ही  उससे और जख्म गहरी हो सकती हैIजिसके कारण त्वचा पर घातक प्रभाव पड़ता हैI   
  • किसी तरिके से कपड़े भी  जलकर शरीर से चिपक गया हो तो घाव को कुरेद कर ना निकाले बल्कि उसी अवस्था रोगी को तुरंत अस्पताल पहुंचाएंI 
  • गंभीर रूप से जले हुए घाव पर कोई मलहम क्रीम तेल या किसी प्रकार के घरेलू उपचार ना करें इससे इंफेक्शन होने का भी डर रहता हैI 
  • उपचार के बावजूद भी घाव के रंग में लाल गुराया काले रंग का बदलाव होने पर हमेशा नजर रखें किसी प्रकार से गांव के आसपास उस प्रकार के वर्षा के पद से जो अंदर हरे रंग के विवांता पर भी नजर रखेंI 
  • अगर  अगर जलन समान हो और दलाल भाग परंतु फफोले में बदल जाए तो उस फोड़े को बल्कि चिकित्सक के बताए हुए दवाइयां नियमित रूप से लेंI 

  नोट -इस लेख में उपरोक्त लिखी गई बातें अर्थात चिक्तिसकीय आलेख लोगों की  स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने बीमारी के बारे में अवगत कराने के लिए हैI  जो इलाज की पुष्टि नहीं करता हैI इसलिए स्वयं इलाज न करें उपरोक्त लिखी गए लक्षण होने पर  चिकित्सक से संपर्क करें और नियमित रूप से इलाज करवाएंI